बेमिसाल मुरलीधरन

मुथैया मुरलीधरन
Image caption मुरलीधरन ने वन डे को भी अलविदा कहा

श्रीलंका के महानतम खिलाड़ी मुथैया मुरलीधरन के जीवन का ये लगातार पांचवां विश्वकप है. टेस्ट और वनडे दोनों ही में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले मुरलीधरन ने टेस्ट से तो पहले ही संन्यास ले लिया है लेकिन इस विश्वकप के बाद उन्होंने वन डे क्रिकटे को भी अलविदा करने की घोषणा कर दी है.

टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 800 विकेट लिए हैं और वनडे में 534 विकेट लेकर ऐसा विश्व रिकॉर्ड बना दिया है जिसे तोड़ना किसी भी गेंदबाज़ के लिए आसान नहीं होगा. इस विश्वकप में मुरलीधरन अब तक 15 विकेट ले चुके हैं.

स्पिन गेंदबाज़ी का नया व्याकरण

टेस्ट क्रिकेट में आठ सौ विकेट लेने वाले दुनिया के अकेले गेंदबाज़ बनने वाले मुथैया मुरलीधरन ने अब टेस्ट क्रिकेट को अलविदा भी कह दिया है. हाल ही में भारत के साथ खेले गए अपने आखिरी टेस्ट मैच के दौरान उन्होंने 800 विकेट पूरे किए.

मुरलीधरन स्पिन गेंदबाज़ी का एक नया व्याकरण रचने वाले गेंदबाज़ के रुप में याद किए जाएंगे जिन्हें बार-बार अपने आपको साबित करने के लिए परीक्षा देनी पड़ी.

श्रीलंका के कैंडी शहर में 17 अप्रैल, 1972 को जन्मे मुरलीधरन अलग तरह की गेंदबाज़ी के लिए मशहूर हुए.

38 वर्षीय मुरलीधरन की स्पिन गेंदबाज़ी को लेकर शुरुआत में कई सवाल उठे. लेकिन 1996 और 1999 में दोनों बार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) ने उन्हें क्लीनचिट दी.

शुरुआती दिन

Image caption मुरलीधरन ने लगातार पांच विश्वकप खेला

चार भाई-बहनों में सबसे बड़े मुथैया मुरलीधरन ने मध्यम-गति के गेंदबाज़ के तौर पर अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत की लेकिन बाद में उन्होंने ऑफ-स्पिन गेंदबाज़ी का हुनर सीखा.

वर्ष 1992 में 20 साल की उम्र में ऑस्ट्रेलिया के साथ खेले गए अपने पहले टेस्ट के दौरान 141 रन देकर उन्होंने तीन विकेट लिए.

इसके एक साल बाद साउथ-अफ़्रीका के साथ खेले गए एक टेस्ट मैच में 104 रन देकर उन्होंने पांच विकेट लिए.

वर्ष 1995 में श्रीलंका और न्यूज़ीलैंड के बीच खेली गई त्रिकोणीय क्रिकेट श्रंखला में 19 विकेट लेकर उन्होंने न सिर्फ श्रीलंका को ये सीरीज़ 2-1 से जिताई बल्कि अकेले अपने दम पर मैच जिताने की क़ाबलियत का प्रदर्शन भी किया.

कालजयी क्षण

वर्ष 1997 को वो ऐसे पहले श्रीलंकाई गेंदबाज़ बने जिसने 100 विकेट लिए हों. जनवरी 1998 में ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ खेले गए पहले ही टेस्ट में उन्होंने 10 विकेट लिए.

इसी साल अगस्त में मुरलीधरन ने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए इंगलैंड के खिलाफ खेले गए टेस्ट मैच में 220 रन देकर 16 विकेट लिए.

वर्ष 2004 में कैंडी में ऑस्ट्रेलिया के साथ खेले गए दूसरे टेस्ट के दौरान सबसे कम उम्र में सबसे तेज़ी से 500 विकेट लेने वाले खिलाड़ी बने.

अपने इस प्रदर्शन के ज़रिए उन्होंने शेन वॉर्न के उस पिछले रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया जो वॉर्न ने पहले टेस्ट के दौरान चार दिन पहले ही बनाया था.

ज़्यादा से ज़्यादा टेस्ट विकेट लेने की होड़ में शेन वॉर्न को वो लगातार कड़ी टक्कर देते रहे. तीन दिसंबर 2007 को मुरलीधरन ने इंग्लैंड के साथ खेलते हुए 709 वां विकेट लेकर एक बार फिर इस कीर्तिमान पर अपना हक़ जमाया.

वनडे का रिकॉर्ड

फरवरी 2009 में उन्होंने एक दिवसीय मैचों में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले पाकिस्तान के वसीम अकरम के 502 विकेट के रिकार्ड को भी तोड़ दिया. 534 विकेट के साथ उनका ये रिकॉर्ड आज भी क़ायम है.

22 जुलाई, 2010 की तारीख़ को इतिहास में दर्ज कराते हुए अपने आख़िरी टेस्ट मैच के दौरान आठ विकेट लेकर उन्होंने 800 का आंकड़ा भी छू लिया.

भारत के प्रज्ञान ओझा को पेवेलियन रवाना करते हुए मुरलीधरन ने अपने 800 विकेट पूरे किए. उनकी इस कामयाबी को देखने के लिए गॉल स्डेडियम में उनका परिवार भी मौजूद था.

श्रीलंका की ओर से इंग्लिश कांउटी में लंकाशायर और कैंट के साथ खेले गए 33 मैचों के दौरान उन्होंने 236 विकेट लिए.

वर्ष 2008 में मुरलीधरन इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में शामिल हुए और आईपीएल में उपविजेता रही चेन्नई सुपर किंग्स का हिस्सा भी बने.