पाकिस्तानी खिलाड़ियों की बेबसी

पाकिस्तानी टीम इमेज कॉपीरइट BBC World Service

पिछले दिनों विश्व कप क्रिकेट के सेमी फ़ाइनल में हार के बाद पाकिस्तान के कप्तान शाहिद अफ़रीदी के बयान पर भारतीय मीडिया में ख़ूब चटख़ारे ले-ले कर बातें कहीं गईं.

अफ़रीदी ने कह दिया था कि भारतीयों का दिल बड़ा नहीं है. ख़ैर अफ़रीदी ने अब इस बयान से पल्ला झाड़ लिया है और इस बात को ज़रूरत से ज़्यादा लंबा खींचने की आवश्यकता भी नहीं है.

लेकिन अफ़रीदी के जिस बयान को मीडिया पचा ले गया, वो था इंडियन प्रीमियर लीग को लेकर पाकिस्तानी खिलाड़ियों की बेबसी.

अफ़रीदी के बयान से जो पीड़ा झलक रही थी, क्या भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) या फिर आईपीएल टीमों के आकाओं के पास इसका जवाब है...शायद नहीं.

अप्रत्यक्ष पाबंदी

मुंबई में वर्ष 2008 में हुए हमलों के बाद पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर इस प्रतियोगिता में खेलने पर अप्रत्यक्ष पाबंदी है. समय बीता, समय के साथ राजनीतिक मोर्चे पर बातचीत का दौर भी शुरू हो गया.

मोहाली में जब विश्व कप का सेमी फ़ाइनल हुआ, तो भारत और पाकिस्तान की टीम आमने-सामने थी. दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के लिए ये मैच एक मौक़ा था.

इस मौक़े का फ़ायदा भी उठाया गया और ये कहा गया कि इस क्रिकेट मैच ने रिश्तों की बेहतरी की कोशिश में भूमिका निभाई है.

लेकिन इसका कोई जवाब किसी के पास नहीं कि दोनों देशों के बीच क्रिकेट के संबंध क्यों नहीं स्थापित हो पा रहे हैं. क्यों आईपीएल में पाकिस्तानी खिलाड़ियों का बहिष्कार जारी है?

पाकिस्तानी क्रिकेट इस मैच काफ़ी बुरे दौर से गुज़र रहा है. विश्व कप के सेमी फ़ाइनल में पहुँचकर इस टीम ने एक उम्मीद जगाई है कि विवादों के साये में रहने वाला उनके देश का क्रिकेट शायद फिर ऊँचाइयाँ छू ले.

आईपीएल को अपना 'ब्रेन चाइल्ड' मानने वाले ललित मोदी के चेयरमैन रहते वर्ष 2010 में आईपीएल-3 के लिए खिलाड़ियों की बोली में किसी पाकिस्तानी खिलाड़ी को नहीं चुना गया.

बेतुका तर्क

ऐसा नहीं था कि पाकिस्तानी खिलाड़ी बोली का हिस्सा नहीं थे, लेकिन बोली के दौरान एक ऐसा सच सामने आया, जिससे लगा सभी टीमें पहले से ही तय करके आई थी कि उन्हें किसी पाकिस्तानी खिलाड़ी को नहीं लेना है.

इमेज कॉपीरइट AP
Image caption अफ़रीदी का बयान उनकी पीड़ा को बयां करता है

उस समय ललित मोदी का तर्क था कि ये टीम मालिकों पर निर्भर करता है कि वे किस देश के किस खिलाड़ी को अपनी टीम में लेते हैं या नहीं.

असाधारण बात को साधारण लहजे में कहना कोई ललित मोदी से सीखे. ख़ैर अब वो ललित मोदी आईपीएल का हिस्सा नहीं हैं. लेकिन पाकिस्तानी खिलाड़ियों को लेकर नीति की जो विरासत वे छोड़ गए हैं, उसी पर मौजूदा प्रबंधन और बीसीसीआई चल रहा है.

किसी भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता की तरह आईपीएल में भी सभी देशों की तरह पाकिस्तानी खिलाड़ियों का हक़ बनता है. शाहिद अफ़रीदी का ये कहना कि उन्हें अछूत न समझा पाए, उनकी और बाक़ी खिलाड़ियों की पीड़ा दर्शाता है.

उम्मीद है कि बीसीसीआई बदलती परिस्थितियों के मद्देनज़र पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर अप्रत्यक्ष पाबंदी को हटाए और क्रिकेट प्रेमियों को ये मौक़ा दे कि वे पाकिस्तान के बेहतरीन क्रिकेटरों का कमाल देख सकें.

संबंधित समाचार