राष्ट्र बड़ा या आईपीएल

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इन दिनों आईपीएल की धूम है और इसी धूम के बीच श्रीलंकाई क्रिकेटरों के आईपीएल में खेलने को लेकर दोनों देशों के क्रिकेट बोर्ड में मतभेद की ख़बरों ने भी ख़ूब सुर्ख़ियाँ बटोरीं.

आख़िरकार भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के रुतबे के आगे श्रीलंकाई क्रिकेट बोर्ड ने हथियार डाल दिए.

आईपीएल में खेल रहे श्रीलंकाई क्रिकेटरों में कुछ महत्वपूर्ण नामों पर नज़र डालिए- तिलकरत्ने दिलशान, महेला जयवर्धने, कुमार संगकारा, लसिथ मलिंगा और सूरज रंदीव.

अब श्रीलंकाई क्रिकेट बोर्ड की दुविधा देखिए. श्रीलंका को 10 मई को इंग्लैंड दौरे के लिए रवाना होना है. हर दौरे से पहले टीम प्रबंधन खिलाड़ियों के लिए प्रशिक्षण शिविर का आयोजन करता है.

हिचकिचाहट

उसके बाद वहीं से टीम दौरे पर रवाना हो जाती है. लेकिन इंग्लैंड दौरे को लेकर गंभीरता का ये आलम है कि जो भी अनुबंधित क्रिकेटर आईपीएल में खेल रहा है, शिविर में जाने से हिचक रहा है.

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Image caption संगकारा की कप्तानी में श्रीलंका विश्व कप के फ़ाइनल तक पहुँचा

पैसे का सवाल है. आईपीएल में अनुबंध की शर्ते इतनी कड़ी हैं कि खिलाड़ियों का समय से पहले जाने का मतलब है भारी भरकम पैसे गँवाना.

लेकिन सवाल भी यही है श्रीलंकाई क्रिकेट से अनुबंधित खिलाड़ियों की प्राथमिकता क्या होनी चाहिए, पैसा या फिर देश के लिए क्रिकेट खेलना.

पिछले दिनों जब श्रीलंका के खेल मंत्री ने खिलाड़ियों को कड़े निर्देश जारी किए, तो बीसीसीआई के अधिकारी कुनमुनाने लगे. उन्हें लगा जैसे श्रीलंकाई सरकार और वहाँ का क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई और भारत को चुनौती दे रहे हैं.

मीडिया के एक वर्ग में इन रिपोर्टों को ऐसे पेश किया गया, जैसे श्रीलंका ने भारत को चुनौती दे दी है. ये सही बात है कि खिलाड़ियों को आईपीएल का अनुबंध स्वीकार करते समय ये ध्यान रखना चाहिए कि भविष्य में उन्हें कहाँ दौरे पर जाना है या किस देश के ख़िलाफ़ सिरीज़ में हिस्सा लेना है.

दंभ

लेकिन बीसीसीआई के दमख़म के इस दौर में श्रीलंकाई खिलाड़ियों ने यही सोचा होगा कि समय रहते सब कुछ ठीक हो जाएगा. शायद ये बात कुछ हद तक दब भी गई है क्योंकि श्रीलंकाई बोर्ड आख़िरकार झुक गया है.

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Image caption मलिंगा ने तो टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा कर दी है

बीसीसीआई का दंभ देखिए कि राष्ट्रीय टीम के प्रति खिलाड़ियों की प्राथमिकता को स्वीकार करने के बजाए कुछ अधिकारी वादे भूल जाने की बात करने लगे.

जब से आईपीएल शुरू हुआ है, खिलाड़ियों की निष्ठा पर सवाल उठे हैं. आईपीएल के लिए हर समय खड़े रहने वाले खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम की ज़िम्मेदारी को गंभीरता से नहीं ले रहे.

इसकी सबसे बड़ी वजह है अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के कार्यक्रमों में आईपीएल का शामिल न होना. जब तक ये होता रहेगा, खिलाड़ियों की प्राथमिकता पर सवाल उठेंगे और अन्य देशों के क्रिकेट बोर्डों के साथ बीसीसीआई की तकरार बनी रहेगी.

जब आईपीएल-4 शुरू हुआ तो ऑस्ट्रेलिया की टीम बांग्लादेश दौरे पर गई थी. फिर पाकिस्तान की टीम वेस्टइंडीज़ रवाना हो गई, तो मई में श्रीलंका की टीम इंग्लैंड जा रही है. इस स्थिति में आईपीएल से मिल रहे भारी भरकम पैसे लेने वाले इन देशों के क्रिकेटरों की दुविधा क़ायम रहेगी.

इसी दुविधा का नतीजा है कि राष्ट्रीय टीम प्रबंधकों को अपने घायल होने की सूचना देकर लसिथ मलिंगा आईपीएल में खेल रहे हैं. मलिंगा के मामले में ये तर्क गले नहीं उतरता कि आईपीएल में तो सिर्फ़ चार ओवर फेंकने होते हैं.

मलिंगा का तर्क भी क्रिकेटरों को उस दुविधा को दर्शाता है, जिसमें एक तरफ़ तो आईपीएल की ओर से मिलने वाली भारी भरकम राशि है, तो दूसरी ओर राष्ट्रीय टीम के प्रति ज़िम्मेदारी. अब ये तो खिलाड़ियों को ही तय करना है. क्योंकि जिस तरह मलिंगा ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा कर दी है, उससे तो यही लगता है कि बलपूर्वक किसी को भी ज़िम्मेदारियों का अहसास नहीं कराया जा सकता.

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