फ़्लेचर का स्वागत होगा चुनौतियों से

डंकन फ़्लेचर इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption डंकन फ़्लेचर के साथ ही इंग्लैंड की टीम ने 2005 में ऐशेज़ शृंखला जीती थी

क्रिकेट कोचिंग की दुनिया में आज की तारीख़ में सबसे दबाव वाला पद भारतीय टीम के कोच का है और 62 वर्षीय डंकन फ़्लेचर एक अरब से ज़्यादा लोगों की उम्मीदों के बीच विश्व विजेता टीम और नंबर एक टेस्ट टीम की ये भूमिका सँभालने जा रहे हैं.

इंग्लैंड की टीम को 2005 में ऑस्ट्रेलिया पर ऐशेज़ शृंखला में 2-1 से मिली जीत के नायक फ़्लेचर की पहली प्रमुख चुनौती भारत का इंग्लैंड दौरा ही होगी.

ज़िम्बाब्वे के ऑलराउंडर फ़्लेचर के नाम बतौर क्रिकेटर सिर्फ़ छह वनडे मैच हैं और 1983 के क्रिकेट विश्व कप में उनकी अगुआई में टीम ने ऑस्ट्रेलिया पर चर्चित जीत हासिल की थी.

उस मैच में फ़्लेचर ने सर्वाधिक 69 रन बनाए थे जिसके बाद ऑस्ट्रेलिया 239 रनों का पीछा करते हुए 13 रनों से हार गया था.

मगर इसके बाद उन्हें क्रिकेट जगत में असली पहचान कोच के रूप में ही मिली. जब फ़्लेचर ने 1999 में इंग्लैंड क्रिकेट के कोच की भूमिका सँभाली तो वह इंग्लैंड के पहले विदेशी कोच बने.

इसके बाद उन्होंने नासिर हुसैन और माइकल वॉन की कप्तानी वाली इंग्लैंड की टीम के साथ तालमेल बैठाकर काम किया.

इंग्लैंड की टीम टेस्ट रैंकिंग में जहाँ सबसे नीचे थी तो उसे वहाँ से उठाकर वह तीसरे नंबर तक लाए, हालाँकि उनके इंग्लैंड के कार्यकाल का एक धब्बा वनडे में टीम का बुरा प्रदर्शन माना जाता है.

मीडिया से रिश्ते

वॉन की कप्तानी में टीम को ऐशेज़ में ऑस्ट्रेलिया पर 2005 में जीत मिली थी और माना जाता है कि दोनों की आपसी समझ और तालमेल काफ़ी अच्छा था.

फ़्लेचर के भारतीय कोच की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए माइकल वॉन ने सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर लिखा, "डंकन हर तरह की प्रतिभा के साथ अच्छा काम करेंगे हालाँकि उनकी सबसे बड़ी चुनौती मीडिया की ओर से होगी... वह कभी भी ये नहीं समझ पाए हैं कि ये कैसे काम करता है."

इमेज कॉपीरइट PA
Image caption माइकल वॉन की कप्तानी में इंग्लैंड ने ऐशेज़ शृंखला 2005 में जीती

वॉन को ये भी लगता है कि भारतीय क्रिकेट कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के साथ फ़्लेचर का तालमेल अच्छा बैठेगा.

मगर वॉन की मीडिया वाली बात में काफ़ी दम है क्योंकि भारत का मीडिया हर मैच में भारतीय प्रदर्शन को लेकर खिलाड़ियों और कोच पर अपना फै़सला सुनाने के लिए जाना जाता है.

भारतीय कप्तान धोनी के साथ मीडिया के रिश्ते विश्व कप के दौरान कोई मधुर नहीं थे और इसी को देखते हुए माना जा रहा है कि फ़्लेचर को भी मीडिया की ओर से कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.

आगामी चुनौती

फ़्लेचर ने इंग्लैंड को वेस्टइंडीज़ में 36 साल बाद जीत दिलाई थी और फिर न्यूज़ीलैंड के विरुद्ध भी इंग्लैंड ने जीत का स्वाद चखा. इतना ही नहीं उनके साथ इंग्लैंड ने दक्षिण अफ़्रीका को भी 2-1 से हराया.

मगर वनडे में इंग्लैंड के बुरे फ़ॉर्म के चलते उनकी आलोचना हुई और 2007 के विश्व कप से इंग्लैंड के बाहर होने के बाद फ़्लेचर ने इंग्लैंड के साथ आठ वर्ष का अपना कार्यकाल समाप्त किया.

इमेज कॉपीरइट AP
Image caption गैरी कर्स्टन के साथ भारतीय टीम टेस्ट में नंबर एक टीम बनी और विश्व कप भी जीता

उनकी परेशानियाँ भारतीय टीम की मौजूदा स्थिति भी बढ़ा सकती है. टेस्ट में भारत नंबर एक टीम है और फ़्लेचर की चुनौती उसे वहाँ बरक़रार रखना होगा.

वनडे में भारतीय टीम मौजूदा विश्व चैंपियन है और रैंकिंग में दूसरे नंबर पर है.

भारत को अब कई विदेशी दौरे करने हैं और भारत का विदेशी धरती पर प्रदर्शन अपने यहाँ के मुक़ाबले कमज़ोर रहता आया है. ऐसे में फ़्लेचर को भारत के वहाँ प्रदर्शनों पर पैनी निगाह रखनी होगी.

भारत को वेस्टइंडीज़ दौरे के बाद इंग्लैंड के दौरे पर जाना है और फिर वर्ष के अंत में ऑस्ट्रेलियाई दौरा भी प्रस्तावित है, यानी भारत की कड़ी परीक्षा आने वाली है.

इसके अलावा भारत का पूरा कैलेंडर काफ़ी व्यस्त है जिसकी वजह से दो सिरीज़ के बीच में उन्हें टीम के साथ किसी तरह के अभ्यास शिविर का भी कोई बड़ा मौक़ा शायद ही हाथ लगे.

भारतीय टीम में कई बड़े खिलाड़ी हैं और गैरी कर्स्टन ने ख़ुद को पृष्ठभूमि में रखते हुए उन खिलाड़ियों के साथ काम किया. ऐसे में डंकन फ़्लेचर का रुख़ देखने वाला होगा और गैरी कर्स्टन के साथ उनकी तुलना भी शायद होती ही रहेगी.

संबंधित समाचार