भारतीय क्रिकेट का बंटाधार?

बीसीसीआई अध्यक्ष शशांक मनोहर
Image caption भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड हाल की घटनाओं के से सवालों के घेरे में है

इंडियन प्रीमियर लीग का एक और संस्करण समाप्त हो गया है. चेन्नई सुपर किंग्स को लगातार दूसरा ख़िताब मिला. लेकिन डेढ़ महीने से भी ज़्यादा समय तक चली इस प्रतियोगिता ने कई सवाल भी उठाए हैं.

दर्शकों की रुचि और टीआरपी से भी ज़्यादा अहम सवाल क्रिकेट और क्रिकेटरों को लेकर है. ये सच है कि आईपीएल ने कई उभरती हुई प्रतिभाओं को नाम के साथ-साथ दाम भी दिया है.

लेकिन बड़े परिदृश्य में देखें तो जिस तरह बड़े खिलाड़ियों की दुर्दशा हो रही है, उससे चिंताएँ दिनों-दिन बढ़ती जा रही है. राष्ट्र बड़ा या आईपीएल इस पर भी बहस चलती रहेगी और इसका भी जवाब खिलाड़ियों के साथ-साथ दंभी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को देना होगा.

कड़वा सच और क्रिकेटरों की चमक

लेकिन फ़िलहाल तो ये सवाल ही क्रिकेट प्रेमियों को काट खाए जा रहा है कि इस चकमदार क्रिकेट के पीछे का कड़वा सच कहीं चमकदार क्रिकेटरों की चमक फीकी तो नहीं कर देगा.

वर्षों से यह सवाल उठते रहे हैं. लेकिन इसका कोई ठोस हल तलाशने की बजाए बोर्ड जब कमाई से अपनी गठरी भरने पर उतारू हो तो क्या कहा जा सकता है.

गौतम गंभीर कितने समय से घायल थे, क्या कोलकाता नाइट राइडर्स ने उनकी चोट छिपाई या बोर्ड को सब कुछ पता था. क्रिकेट प्रेमियों को इसमें कोई रुचि नहीं. उन्हें तो सिर्फ़ ये जानना है कि आईपीएल में आख़िर तक खेलने वाले गंभीर ने टीम की कप्तानी करने का सुनहरा मौक़ा क्यों गँवा दिया.

वीरेंदर सहवाग के साथ ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि आईपीएल के दौरान या तुरंत बाद उन्हें अपने इलाज के लिए विदेश का रुख़ करना पड़ा हो. सचिन वनडे के साथ-साथ टेस्ट सिरीज़ से भी हट गए हैं, तो ऐन मौक़े पर युवराज का टीम से हटना भी सवाल खड़े कर रहा है.

तर्क दिया जा रहा है कि युवराज भी बीमार हैं लेकिन इस बीमारी की ख़बर इतनी देर से क्यों आई. क्या यहाँ पर भी दाल में कुछ काला है. क्या युवराज को सुरेश रैना की कप्तानी में खेलना मंज़ूर नहीं था?

ये सवाल हम पहले भी उठा चुके हैं कि बोर्ड ने किस तरह कप्तानी के मामले में अपना दंभ दिखाते हुए एक बेहतरीन खिलाड़ी को उसकी औकात दिखाने की कोशिश की थी. क्या युवराज इससे निराश हैं या फिर उनकी भी बीमारी की बात बोर्ड ने छिपाई.

दोनों ही स्थितियों में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड सवालों के घेरे में है. विश्व कप के ठीक बाद ऑस्ट्रेलिया की टीम ने बांग्लादेश का दौरा किया था, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट बोर्ड ने अपने स्टार खिलाड़ियों को आराम देने की बजाए उन्हें बांग्लादेश के दौरे पर भेजा.

ऐतिहासिक जीत के बाद बंटाधार?

इस टीम में कई ऐसे खिलाड़ी थे, जो आईपीएल का हिस्सा थे. लेकिन उन्होंने पहले बांग्लादेश का दौरा पूरा किया और फिर आईपीएल से जुड़े. श्रीलंका के मामले में उनके खिलाड़ियों ने जो भी फ़ैसला किया हो, भारतीय बोर्ड को बीच में नहीं पड़ना चाहिए था.

लेकिन अपना दम दिखाने के लिए बोर्ड ने वहाँ भी दादागिरी की. नतीजा एक समय ऐसा लगा कि रिश्ते ही बिगड़ जाएँगे.

भारत ने हाल ही में 28 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद विश्व कप का ख़िताब अपने नाम किया है. क्रिकेट प्रेमियों ने दशकों तक इस दिन का इंतज़ार किया है. लेकिन लगता है कि कुछ ही महीनों के अंदर भारतीय टीम का बंटाधार हो गया है और ये अपने धनाढ्य और दंभी बोर्ड की देन है.

संबंधित समाचार