फ़ीफ़ा के अधिकारियों पर आचार संबंधी आरोप

जैक वार्नर और मोहम्मद बिन हम्माम इमेज कॉपीरइट AP
Image caption फ़ीफ़ा चार अधिकारियों के ख़िलाफ़ लगे आरोपों की जांच कर रही है

फ़ुटबॉल की अंतरराष्ट्रीय संचालन संस्था 'फ़ीफ़ा' अपने उपाध्यक्ष जैक वार्नर और अध्यक्ष पद के उम्मीदवार मोहम्मद बिन हम्माम सहित चार अधिकारियों के ख़िलाफ़ लगे आरोंपों की जांच कर रही है.

दूसरे दो अधिकारी कैरिबियन फ़ुटबॉल संघ की डैबी मिंगुएल और जेसन सिल्वेस्टर हैं.

ये आरोप कार्यकारी समिति के एक सदस्य चक ब्लेज़र ने लगाए हैं.

उनका दावा है कि हम्माम और वार्नर द्वारा बुलाई गई एक बैठक में फ़ीफ़ा की आचार संहिता का उल्लंघन हुआ.

ये बैठक 10 और 11 मई को फ़ीफ़ा के अध्यक्ष के चुनाव के संबंध में बुलाई गई थी जो 1 जून को होना है.

एशियन फ़ुटबॉल संघ के अध्यक्ष मोहम्मद बिन हम्माम मौजूदा अध्यक्ष सेप ब्लेटर के ख़िलाफ़ खड़े हो रहे हैं.

अधिकारियों की पेशी

इन चारों अधिकारियों को 29 मई को फ़ीफ़ा की आचार समिति की सुनवाई में बुलाया गया है.

फ़ीफ़ा ने घोषणा की है कि इस समिति के प्रमुख क्लॉडियो सल्सर सुनवाई में शामिल नहीं होंगे क्योंकि वो सेप ब्लेटर की तरह स्विट्ज़रलैंड के नागरिक हैं.

समिति के उपाध्यक्ष पेट्रस दामासेब इस सुनवाई की अध्यक्षता करेंगे.

फ़ीफ़ा के बयान में कहा गया है कि 24 मई को चक ब्लेज़र ने फ़ीफ़ा के महासचिव जेरोम वाल्क को लिखा कि अधिकारियों ने फ़ीफ़ा की आचार संहिता का उल्लंघन किया.

"इस रिपोर्ट में विशेष रूप से कैरिबियन फ़ुटबॉल यूनियन की एक विशेष बैठक का ज़िक्र है जिसे फ़ीफ़ा के उपाध्यक्ष जैक ए वार्नर और फ़ीफ़ा की कार्यकारी समिति के सदस्य मोहम्मद बिन हम्माम ने संयुक्त रूप से आयोजित किया और जो 10 और 11 मई 2011 को हुई".

इस रिपोर्ट में दर्ज आरोपों को देखते हुए जिनमें रिश्वत के भी आरोप हैं फ़ीफ़ा के महासचिव जेरोम वाल्क ने फ़ीफ़ा की आचार संहिता की धारा 16 का पालन करते हुए आचार समिति से आग्रह किया है कि वो सुनवाई शुरु करे.

इन आरोपों के बाद हम्माम की उम्मीदवारी को गहरा नुकसान होगा.

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