संकट में नहीं है फुटबॉल: फीफा अध्यक्ष

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Image caption सेप ब्लैटर पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे लेकिन उन्हें क्लीन चिट मिल गई

फीफा के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद संगठन के अध्यक्ष सेप ब्लैटर ने कहा है कि फीफा पर कोई संकट नहीं है.

ब्लैटर का कहना था, ‘‘ फुटबॉल संकट में नहीं है. बस कुछ दिक्कतें हैं.’’

फीफा के अध्यक्ष पद के लिए बुधवार को चुनाव होने हैं और इससे पहले अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं. अब बुधवार को हो रहे चुनावों में ब्लैटर एकमात्र उम्मीदवार हैं.

ब्लैटर ने ब्रितानी और कई अन्य सरकारों के इस सुझाव को भी ख़ारिज़ कर दिया है कि बुधवार को होने वाले चुनावों को रोक दिया जाए.

उनका कहना था, ‘‘ अगर सरकार को हस्तक्षेप करना पडा तो सचमुच कोई गड़बड़ है. मुझे लगता है कि फीफा इतनी मज़बूत है कि अपनी समस्याओं से फीफा के भीतर ही निपटा जा सके.’’

उल्लेखनीय है कि फीफा की एथिक्स कमिटी ने जांच के बाद एशियन फुटबॉल के प्रमुख हम्माम और कैरेबियाई फुटबॉल के जैक वार्नर को निलंबित कर दिया था. इन दोनों पर हम्माम को अध्यक्ष बनाने के लिए घूस देने के आरोप थे जिसकी जांच चल रही है.

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Image caption वाल्के की ईमेल के अनुसार कतर ने पैसे देकर 2022 का विश्व कप का आयोजन अपने पक्ष में किया था

इस घटना के बाद सोमवार को दिन में फीफा के महासचिव जेरोम वाल्के का ईमेल सामने आया जिसके अनुसार एशियाई फुटबॉल संघ के मोहम्मद बिन हम्माम ने 2022 में कतर में विश्व कप के आयोजन के लिए पैसे देकर वोट खरीदे थे.

हम्माम भी फीफा की कार्यकारी समिति के सदस्य थे लेकिन अब निलंबित हैं और उनके ख़िलाफ़ जांच चल रही है.

यह ईमेल फीफा के उपाध्यक्ष और घूस के आरोपों की जांच का सामना कर रहे जैक वार्नर ने जारी किया था.

हालांकि वाल्के का कहना था कि उनके निजी ईमेल का यह अर्थ नहीं लगाया जाना चाहिए. कतर ने भी इन आरोपों का खंडन किया है कि उन्होंने विश्व कप के आयोजन के लिए किसी को पैसे देकर वोट जुटाए हैं.

विवाद ही विवाद

घूस लेने के आरोपों के मामले में ब्लैटर पर भी आरोप था कि उन्हें इस बात की जानकारी थी लेकिन एथिक्स कमिटी की जांच में उन्हें क्लीन चिट मिल गई थी.

एथिक्स कमिटी की जांच से पहले ही मोहम्म बिन हम्माम ने रविवार को ही अध्यक्ष पद की दौड़ से अपना नाम वापस ले लिया था.

Image caption घूस लेने के आरोपों में हम्माम और वार्नर को कार्यकारी समिति से निलंबित कर दिया गया है.

इस बीच फुटबॉल एसोसिएशन यानी एफ के पूर्व चेयरमैन लॉर्ड ट्राइसमैन ने आरोपों की स्वतंत्र जांच के एक रिपोर्ट आई जिसमें फीफा की कार्यकारी समिति के चार सदस्यों को निर्दोष करार दिया गया है.

ब्लैटर ने ज्यूरिख में ये रिपोर्ट जारी करते हुए कहा, ‘‘ कार्यकारी समिति को रिपोर्ट मिली है और हमें बताते हुए हर्ष हो रहा है कि लॉर्ड ट्राइसमैन ने हाउस ऑफ कामंस में जो आरोप लगाए थे वो सही साबित नहीं हुए हैं.’’

फीफा की स्थिति पर ब्रिटेन के खेल मंत्री ने नाखुशी ज़ाहिर करते हुए कहा है कि ऐसी स्थिति में अध्यक्ष पद के चुनाव नहीं होने चाहिए जब दोनों ही उम्मीदवारों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं.

ब्लैटर का कहना था कि फीफा की चुनाव प्रक्रिया में अगर कोई बदलाव होना है तो वो फीफा के सदस्य करेंगे और इसमें सरकारों का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए.

उनका कहना था, ‘‘ चुनाव संबंधी कोई भी बदलाव बाहरी ताकतें नहीं करेंगी. कार्यकारी समिति भी नहीं करेगी. कांग्रेस इस बात का फैसला करेगी.’’

सेप ब्लैटर पर भी कई आरोप हैं लेकिन ज्यूरिख में संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने खुद पर लगे आरोपों के बारे में पूछे गए सवालों का सीधा जवाब नहीं दिया.

कंपनियों की चिंता

फीफा को वित्तीय समर्थन देने वाली दो बड़ी कंपनियों कोका कोला और एडिडैस ने भी संगठन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर चिंता व्यक्त की है.

कोका कोला ने बयान जारी कर कहा है कि इस तरह के आरोप ‘‘चिंता पैदा करने वाले और खेल के लिए घातक’’ हैं. हालांकि बयान में ये भी उम्मीद जताई गई है कि स्थिति को जल्दी ही ठीक से संभाल लिया जाएगा.

एडिडैस ने भी पूरे मामले में बयान दिया है और कहा है कि फीफा को मिल रहा नकारात्मक प्रचार न तो फीफा के हक में है न ही फुटबॉल के और न ही फीफा से जुड़े संगठनों के फ़ायदे में.

फीफा को हर वर्ष अपने इन प्रायोजकों से लाखों डॉलर की राशि मिलती है.

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