क्लेनबुटेरोल पर वाडा की बैठक में चर्चा

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Image caption वाडा अधिकारी क्लेनबुटेरोल पर प्रतिबंध में कुछ ढील देने पर विचार कर सकते हैं

वर्ल्ड एंटी-डोपिंग एजेंसी यानि वाडा एक विवादास्पद नियम के बारे में चर्चा करने वाली है.

वाडा के अधिकारी स्विटज़रलैंड में क्लेनबुटेरोल नाम की ड्रग पर लगे प्रतिबंध में कुछ ढील देने पर विचार विचार कर सकते हैं. इस ड्रग को एथलीट अपनी मांसपेशियों को मज़बूत करने के लिए करते हैं.

कुछ एथलीटों का कहना है कि गोमांस खाने के बाद उन्हें इस ड्रग के टेस्ट में पॉज़िटिव पाया गया है.

क्लेनबुटेरोल एक शक्तिशाली दवाई है जिसे दमा के मरीज़ों को दिया जाता है लेकिन इसे शरीर की वसा कम करने और मांसपेशियों को सुदृढ़ करने के लिए भी किया जाता है.

इसके अलावा चीन और मैक्सिको में किसान इसका प्रयोग अपने मवेशियों के लिए भी करते हैं. इसी वजह से वाडा पर इस दवाई पर लगे प्रतिबंध में ढील देने के लिए दबाव बनाया जाता रहा है.

कोंटाडोर का मामला

पिछले साल साईकिलिंग की दुनिया के सबसे बड़े टूर्नामेंट टूअर डे फ़्रांस को विजेता अल्बर्टो कोंटाडोर को क्लेनबुटेरोल की सेवन का दोषी पाया गया था.

कोंटाडोर ने अपने बचाव में कहा था कि उन्होंने गोमांस खाया है और इसकी वजह से उनका टेस्ट पॉज़िटिव आया है.

स्पेन की साईकिलिंग फ़ेडरेशन ने कोंटाडोर के तर्क को स्वीकार कर लिया था लेकिन वाडा ने इस निर्णय के ख़िलाफ़ अपील की थी. अब ये मामला कोर्ट ऑफ़ आर्बिट्रेशन इन स्पोर्ट के सामने है और इसकी सुनवाई नवंबर में होने वाली है.

कुछ वैज्ञानिकों का भी मानना है कि वाडा को अपने नियमों में कुछ ढिलाई बरतनी चाहिए.

लंदन के किंग्स कॉलेज के प्रोफ़ेसर डेविन कोवान कहते हैं, “मेरे ख़्याल से कुछ ढिलाई देने से टेस्ट के नतीज़ों में कुछ एकरुपता ज़रुर आएगी. लेकिन टेस्ट की संवेदनशीलता प्रभावित नहीं होनी चाहिए. ”

वैज्ञानिकों का मत है कि शरीर में ड्रग की मात्रा को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता.

मिसाल की तौर साईकिलिस्ट अल्बर्टो कोंटाडोर के शरीर में महज़ 50 पिकोग्राम क्लेनबुटेरोल पाई गई थी. एक करोड़ पिकोग्राम से एक ग्राम बनता है. मतलब इतनी कम मात्रा कि जिससे शायद है खिलाड़ी को कोई फ़ायदा हुआ हो.

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