क्या है फ़ॉर्मूला वन-भाग 2

 शुक्रवार, 28 अक्तूबर, 2011 को 11:20 IST तक के समाचार

जितनी शोहरत, जितना शोर, जितना ग्लमैर क्रिकेट में भारत का है, कुछ वैसी ही चर्चा आजकल फ़ार्मूला वन की हो रही है. भारत पहली बार फ़ॉर्मूला वन आयोजित कर रहा है. इसके लिए दिल्ली के पास नोएडा में विशेष ट्रैक बनाया गया है. नाम है बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट.

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बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट

ये ट्रैक अंतरराष्ट्रीय स्तर का है और आधुनिक तकनीक से बना है. इसकी सर्किट लंबाई है 5.14 किलोमीटर और इसमें ड्राइवरों के लिए 16 अलग तरह के मोड़ हैं. कुछ मोड़ आसान हैं, तो कुछ मुश्किल. ये ट्रैक 875 एकड़ पर बना है.

बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट को निजी कंपनी जेपी स्पोर्ट्स इंटरनेशनल ने बनवाया है. ट्रैक का डिज़ाइन तैयार किया है मशहूर जर्मन आर्किटेक्ट हरमैन ने. यहाँ करीब डेढ़ लाख दर्शकों के बैठने की जगह है. इसकी गिनती दुनिया के सबसे बढ़िया ट्रेक में की जा रही है.

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टीमें

कुल 12 टीमें फ़ॉर्मूला वन में हिस्सा ले रही हैं जिसमें रेड बुल, मक्लेरन, फ़रारी, मर्सिडीज़, टीम लोटस, रेनॉ, साउबर, वर्जिन, विलियम्स जैसी टीमें हैं. इस समय अंक तालिका में रेड बुल रेसिंग टीम सबसे आगे हैं और टीम के सबेस्टियन वेटल विश्व चैंपियन हैं.

भारतीय टीम

फ़ॉर्मूला वन में एक भारतीय टीम भी है नाम है सहारा फ़ोर्स इंडिया. तीन साल पहले भारत के उद्योगपति विजय मालया ने फ़ोर्स इंडिया टीम लॉन्च की थी. अब इसमें सहारा कंपनी भी साझीदार बन गई है. इसमें दो ड्राइवर हैं दोनों विदेशी हैं- जर्मनी के आड्रियान सुटिल और स्टॉकलैंड के पॉल ड रेस्टा. रैंकिंग में ये टीम छठे नंबर पर है.

भारतीय रेसर

नोएडा में होने वाली फ़ॉर्मूला वन रेस में केवल एक भारतीय रेसर होंगे- नारायण कार्तिकेन. वे स्पेन की टीम का हिस्सा हैं जिसका नाम है हिस्पैनिया रेसिंग टीम.

भारत के करुण चंडोक से भी उम्मीद की जा रही थी कि वे भारतीय ग्रां प्री में उतर पाएँगे. वे टीम लोट्स का हिस्सा हैं. लेकिन उन्हें रविवार को होने वाली रेस में टीम का हिस्सा नहीं बनाया गया है.

पोल पोज़िशन

रविवार को नोएडा में फ़ॉर्मूला वन की मुख्य रेस दोपहर तीन बजे से होगी. ड्राइवर को कुल 60 चक्कर लगाने होंगे. एक चक्कर को एक लैप कहा जाता है. इस रेस में ट्रैक पर कौन सबसे आगे खड़ा होगा उसके लिए एक दिन पहले शनिवार को क्वालिफ़ाइंग दौर है.

क्वालीफ़ाइंग में हर खिलाड़ी अकेले-अकेले ट्रैक पर जाएगा और अपना टाइम रिकॉर्ड करेगा. जो सबसे कम वक़्त में रेस ख़त्म करेगा वो ग्रिड में मुख्य रेस वाले दिन सबसे आगे खड़ा होगा. इस आगे वाली जगह को पोल पोशिज़न कहा जाता है.

ग्रैंडस्टैंड और पिट स्टॉप

अब जानते हैं कि अगर फ़ॉर्मूला वन देखना हो तो आपकी अपनी जेब कितनी खाली करनी होगी. फ़ॉर्मूला वन देखने की सबसे सस्ती टिकट है 2500 रुपए. ग्रैंडस्टैंड की टिकट चाहिए तो लगेंगे 35 हज़ार. .

लगे हाथ ये भी जान लेते हैं कि ग्रैंडस्टैंट और पिट स्टॉप क्या होते हैं.पिट स्टॉप यानी वो जगह जहाँ ड्राइवर रेस के दौरान दोबारा ईंधन भरने या टायर बदलने के लिए रुकते हैं. पिट स्टॉप के सामने से यानी ग्रैंडस्टैंड से रेस का नज़ारा अच्छा दिखता है, इसलिए यहाँ का दाम भी अधिक है. इस ट्रैक को बनाने में लगभग 10 अरब डॉलर खर्च हुए हैं.

कुछ लोग इसे पैसे की बर्बादी बता रहे हैं तो कुछ के लिए ये रोमांच और स्पीड के उस खेल को देखने का मौका है जो अब तक विदेशों में ही होता है...अगर आप उन लोगों में से हैं जो रफ़्तार के दीवाने हैं...तो दिल थाम के बैठिए और इंतज़ार कीजिए 30 अक्तूबर का...

ये फ़ॉर्मूला वन ट्रैक का चित्र है. साभार फ़ॉर्मला वन बेवसाइट

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