पाक खिलाड़ियों की सज़ा का स्वागत

 गुरुवार, 3 नवंबर, 2011 को 21:05 IST तक के समाचार

इन खिलाड़ियों पर प्रतिबंध भी लगाया गया था

पाकिस्तान क्रिकेट खिलाड़ी सलमान बट, मोहम्मद आसिफ़ और मोहम्मद आमिर को 'स्पॉट फ़िक्सिंग' के मामले में जेल की सज़ा का पाकिस्तान के पूर्व खिलाड़ियों औऱ अधिकारियों नें स्वागत किया है.

ये लोग मानते हैं कि अगर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड सही वक्त पर कदम उठा लेता तो ऐसी नौबत शायद नही आती.

लंदन की एक अदालत नें पूर्व कप्तान सलमान बट को दो साल छह महीने जेल की सज़ा सुनाई है. तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद आसिफ़ को एक साल की कैद हुई है. वहीं मोहम्मद आमिर को छह महीने की सज़ा सुनाई गई है

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष आरिफ़ अब्बासी का कहना है कि यह वाजिब फ़ैसला है.

उन्होंने कहा, "यह अपराध और सज़ा का मामला है. इन्होंने कानून को धोखा दिया है जो कि एक गुनाह है. इस जुर्म कें बाद उन्हे पता होना चाहिए कि जेल की सज़ा होगी."

कदम उठाने में देरी

"गलती वहीं से शुरु हुई जब पीसीबी ने कोई एक्शन नहीं लिया. उन्होंने पहले माना नहीं कि हालात खराब है, और फिर कोई कार्रवाई नहीं की और बाद में दूसरों को चैलेंज करना शुरु कर दिया. इससे हमारी समर्थता पर सवाल खड़े हो गए कि हम कोई कदम नहीं उठा सकते या ऐसा करना नहीं चाहते"

रमीज़ राजा, पूर्व पाकिस्तान क्रिकेट कप्तान

वहीं पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और ओपनर रमीज़ राजा नें कहा है कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को काफ़ी पहले हरकत में आ जाना चाहिए था.

राजा कहते हैं, "अगर में प्रशासन में होता तो सिर्फ शक की बुनियाद पर इन खिलाड़ियों को दरकिनार कर देता और फिर इसकी जांच करवाता."

पाकिस्तान के पूर्व ओपनर कहते हैं कि कोई कदम उठाने में पीसीबी की देरी से पाकिस्तान क्रिकेट को नुकसान पंहुचा हैं.

वो कहते हैं, "गलती वहीं से शुरु हुई जब पीसीबी ने कोई एक्शन नहीं लिया. उन्होंने पहले माना नहीं कि हालात खराब है, और फिर कोई कार्रवाई नहीं की और बाद में दूसरों को चैलेंज करना शुरु कर दिया. इससे हमारी समर्थता पर सवाल खड़े हो गए कि हम कोई कदम नहीं उठा सकते या ऐसा करना नहीं चाहते. आखिर में आईसीसी को एक्शन लेना पड़ा जिससे और भी हमारी क्रिकेट परेशानी में पड़ गई."

सज़ा नाकाफ़ी

"हमारे क्रिकेट बोर्ड और दूसरे बोर्ड में ये फर्क है कि दूसरे बोर्ड तुरंत ऐसे खिलाड़ियों को चुनना छोड़ देते हैं या बहुत कड़ी सज़ा देते हैं. हमारे यहां ये चीज़ गायब है. हमारे यहां चोरों को शरण मिलती है. "

आरिफ़ अब्बासी, पूर्व पीसीबी अध्यक्ष

खिलाड़ियों को अलग अलग सज़ा मिली है. अब्बासी मानते हैं कि मोहम्मद आमिर को कम सज़ा हुई क्योंकि उन्होंने अपना जुर्म कबूल लिया था जिससे अदालत का वक्त खराब नहीं हुआ. लेकिन वो ये भी मानते हैं कि यह सज़ा नाकाफ़ी है.

उन्होंने कहा, "सज़ा और ज्यादा होना चाहिए था. हमारे क्रिकेट बोर्ड और दूसरे बोर्ड में ये फर्क है कि दूसरे बोर्ड तुरंत ऐसे खिलाड़ियों को चुनना छोड़ देते हैं या बहुत कड़ी सज़ा देते हैं. हमारे यहां ये चीज़ गायब हैं. हमारे यहां चोरों को शरण मिलती है. टीम के ये तीन ऐसे खिलाड़ी जिसे अंग्रेज़ी में कहते हैं "टिप ऑफ़ आइसबर्ग' है."

अब्बासी यह भी मानते हैं कि इस फ़ैसले भर से फिक्सिंग पर लगाम नहीं लगाया जा सकता. वो कहते हैं, "यह आगे भी जारी रहेगा, शायद थोड़ा बहुत कम हो जाए. यह एक ऐसी चीज़ है जिसे सिर्फ़ प्रशासकीय कदम से काबू में नहीं लाया जा सकता."

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