लोकप्रिय हो रहा महिला क्रिकेट

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Image caption बांग्लादेश में अब महिलाओं में भी क्रिकेट मैच देखने की रुचि बढ़ी है.

महिला क्रिकेट विश्व कप क्वालिफ़ाइंग मैच के लिए हाल ही में कई मुक़ाबले हुए हैं. 2013 में दर्शक फ़ाइनल मैच का भी लुत्फ़ उठाएंगें.

लेकिन इन मैचों की एक ख़ास बात ये रही है कि इसने कुछ ऐसे देशों को एक साथ लाकर खड़ा कर दिया है, जिन्हें क्रिकेट के लिए बिरले ही जाना जाता था.

बांग्लादेश में विश्व कप क्वालिफ़ाइंग मैच के लिए 10 टीमों के बीच टक्कर हुई.

क्वालिफ़ाइंग राउंड के फ़ाइनल मुक़ाबले में वेस्टइंडीज़ ने पाकिस्तान को 130 रनों से शिकस्त दी. ये मैच मीरपुर के शेर-ए-बांग्ला नेशनल स्टेडियम में खेला गया.

महिला विश्व कप क्वालिफ़ायर मैच में बांग्लादेश की टीम ने आयरलैंड को 82 रनों से हरा कर पाँचवाँ स्थान हासिल किया.

वहीं नीदरलैंड और अमरीका की महिला क्रिकेट टीम के बीच हुए मुक़ाबले में डच टीम ने 126 रनों से जीत हासिल की और उसे सातवाँ स्थान मिला.

नज़रिए में बदलाव

इन मैचों में आकर्षित करने वाली बात ये रही कि यहाँ उन देशों की महिलाओं ने क्रिकेट मैच में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया, जहाँ क्रिकेट शायद ही खेला जाता है.

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Image caption जापान में अब महिलाओं में क्रिकेट की लोकप्रियता बढ़ी है

ऐसी ही एक टीम थी जापान. वहाँ क्रिकेट के लिए उपयुक्त मैदान भी नहीं है लेकिन वहाँ भी अब क्रिकेट का जादू छाने लगा है.

जापान ने ज़िम्बाब्वे की टीम को कड़ी टक्कर देते हुए छह रनों से क्वालिफ़ायर मैच जीत लिया.

जापान की टीम में ऑल राउंडर मरिको यममोटो देश में क्रिकेट के बढ़ते प्रचलन पर कहती हैं, ''ये अब भी हमारे यहाँ छोटा खेल है. लेकिन कई लड़कियाँ यूनिवर्सिटी स्तर पर क्रिकेट खेलती हैं. क्रिकेट महिलाओं में काफ़ी लोकप्रिय है. हम ये उम्मीद करते हैं कि हमें मिली जीत से हमारे देश में क्रिकेट को बढ़ावा मिलेगा.''

टेलीविज़न और इंटरनेट ने महिला क्रिकेट को वैश्विक बनाने में एक बड़ी भूमिका निभाई है.

क्रिकेट अधिकारियों का कहना है कि 90 से ज़्यादा देशों में आपको किसी न किसी प्रकार में महिला क्रिकेट टीम मिल जाएंगी. लेकिन महिला क्रिकेट मैच को बेचना इतना आसान नहीं है. अमीर देशों की टीमों को भी इन मैचों के लिए प्रायोजक नहीं मिलते हैं.

अमीरीकी टीम की क्रिकेट ख़िलाड़ी एरिका रेंडलर का कहना है, ''हमने फंड इकट्ठा करने की कोशिश की है. हमारी स्थानीय टीम ने कुछ घर में बने खाद्य सामानों को बेचा भी है. कुछ फंड जुटाने का काम क्लब के लोग भी कर रहे हैं. इसलिए ये अभी छोटे स्तर पर ही फंड को जुटाने वाली संस्था है. हम ये उम्मीद कर रहे है कि हमें कोई भारी सहायता राशि देने वाला मिल जाए.''

जहाँ ये खेल नई ऊँचाइयाँ छू रहा है, वहीं नई-नई मुश्किलों का सामना भी कर रहा है.

बांग्लादेश क्रिकेट टीम की कप्तान सलमा ख़ातुन कहती हैं, ''हमारे देश में अगर लड़कियाँ क्रिकेट खेलना चाहती हैं, तो उन्हें परिवार और समाज से कुछ बंदिशों का सामना करना पड़ता है. उनको लगता है कि ये पुरुषों का खेल है. ये एक मुस्लिम देश है. यहाँ अभ्यास के दौरान शॉर्ट या शॉर्ट स्लीव पहनने पर रोक है. लेकिन अब क्रिकेट लोकप्रिय हो रहा है और मैच को देखने आने वालों में महिलाओं की संख्या बढ़ी है.''

क्रिकेट पुरुषों का खेल माना जाता था और महिलाओं को इस धारणा को बदलने में समय लगा है. लेकिन इसका भविष्य सुनहरा दिखाई देता है.

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