ओलंपिक आयोजकों ने डाओ का बचाव किया

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Image caption भोपाल के लोग डाओ को प्रायोजक बनाने का विरोध कर रहे हैं

लंदन ओलंपिक आयोजन समिति के प्रमुख सेबेस्टियन को ने प्रायोजक के रूप में डाओ केमिकल्स को लेने के फ़ैसले का बचाव किया है.

डाओ केमिकल्स 2012 में होने वाले लंदन ओलंपिक के प्रायोजकों में से एक है. ओलंपिक स्टेडियम को पर्दानुमा स्टाइल से ढकने का काम डाओ करेगी.

लेकिन कंपनी की इस बात के लिए आलोचना हो रही है कि वो भोपाल गैस कांड से जुड़ी हुई है. भोपाल गैस कांड विश्व की सबसे बड़ी औद्योगिक दुर्घटनाओं में से एक है.

1984 में यूनियन कार्बाइड की फ़ैक्ट्री से निकली ज़हरीली गैस ने हज़ारों लोगों की जान ले ली थी और कई लोग अपाहिज हो गए थे. बाद में डाओ केमिकल्स ने यूनियन कार्बाइड को ख़रीद लिया था.

बीजिंग गए लंदन ओलंपिक आयोजन समिति के प्रमुख का कहना है कि डाओ केमिकल्स भोपाल हादसे के कई बरसों बाद यूनियन कार्बाइड से जुड़ा है.

बीजिंग में एक बैठक में हिस्सा लेने आए सेबेस्टियन को ने कहा है, “मैं उस हादसे से हुई मानवीय पीड़ा को समझता हूँ, लेकिन ये दो अलग-अलग मामले हैं. जिस केमिकल प्लांट से गैस लीक हुई थी डाओ उस फ़ैक्ट्री का मालिक़ नहीं था और न ही 1989 में वो प्लांट को चला रहे थे जब मुआवज़े को लेकर अंतिम समझौता हुआ.”

लेकिन भोपाल गैस कांड के पीड़ितों और कई पूर्व भारतीय ओलंपिक खिलाड़ियों ने लंदन ओलंपिक से डाओ के जुड़ने पर ऐतराज़ जताया है. इनकी माँग है कि कंपनी को लंदन ओलंपिक का प्रायोजक न बनाया जाए.

इस मामले पर भारत के खेल मंत्रालय ने भी भारतीय ओलंपिक संघ को एक पत्र लिखा है.ओलंपिक संघ 15 दिसंबर को होने वाली कार्यकारिणी और आम सभा में इस पर चर्चा करेगा.