'कड़ा विरोध, लेकिन ओलंपिक का बहिष्कार नहीं'

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Image caption भोपाल गैस पीड़ितों ने 11 हज़ार हस्ताक्षरों के एक ज्ञापन के साथ डाओ केमिकल्स को ओलंपिक का प्रायोजक बनाए जाने का विरोध किया है

भारतीय ओलंपिक संघ ने कहा है कि वह भोपाल गैस त्रासदी के लिए ज़िम्मेदार डाओ केमिकल्स को लंदन ओलंपिक का प्रायोजक बनाए जाने का 'कड़ा विरोध' करेगा लेकिन ओलंपिक का बहिष्कार नहीं करेगा.

डाओ केमिकल्स के मुद्दे पर क़रीब तीन घंटे चली बैठक के बाद ओलंपिक संघ ने कहा है कि उसके कई सदस्य ओलंपिक का बहिष्कार किए जाने के पक्ष में नहीं हैं.

दुनिया के कई संगठनों और कई नामचीन व्यक्तियों ने डाओ केमिकल्स को लंदन ओलंपिक का प्रायोजक बनाए जाने का विरोध किया है.

इसे लेकर भारतीय ओलंपिक संघ पर भी दबाव है कि वह विरोध स्वरूप आयोजन का बहिष्कार करे.

वर्ष 1984 में भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड संयंत्र में ज़हरीली गैस रिसने से हज़ारों लोगों की मौत हो गई थी और दसियों हज़ार इससे बुरी तरह से प्रभावित हुए थे.

डाओ केमिकल्स ने बाद में इस कंपनी को ख़रीद लिया था और उस पर आरोप है कि वह इस त्रासदी के लिए ज़िम्मेदारी लेते हुए पर्याप्त मुआवज़ा भी नहीं दे रहा है.

सर्वसम्मत निर्णय

भारतीय ओलंपिक संघ की आमसभा की बैठक के बाद अध्यक्ष विजय कुमार मल्होत्रा ने कहा, "सभी राष्ट्रीय खेल परिषदों और राज्य ओलंपिक संघों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया है कि लंदन ओलंपिक के आयोजकों के समक्ष कड़ा विरोध किया जाए और मांग की जाए कि डाओ केमिकल्स को प्रायोजकों की सूची से हटाया किया जाए."

उन्होंने कहा, "भोपाल गैस त्रासदी में हज़ारों लोग मारे गए थे. ओलंपिक भाईचारे, दोस्ती और मानवीय मूल्यों का प्रतीक होता है और ये अनैतिक और अस्वीकार्य है और ओलंपिक के सिद्धांतों के ख़िलाफ़ है कि ऐसी बदनाम कंपनी ओलंपिक खेलों से जुड़ी हुई हो."

मल्होत्रा ने ओलंपिक के आयोजन समिति के चेयरमैन सेबेस्टियन को के इस तर्क का भी विरोध किया कि डाओ केमिकल्स ने भोपाल के संयंत्र को हादसे के 17 साल बाद ख़रीदा था.

उनका कहना था कि इसके बादजूद डाओ पर त्रासदी की ज़िम्मेदारी है. उन्होंने कहा, "हालांकि त्रासदी के बहुत वर्षों बाद डाओ केमिकल्स ने कंपनी को ख़रीदा था लेकिन मामला अभी भी चल रहा है और मुआवज़े का भुगतान अभी भी पूरा नहीं हुआ है. इसकी ज़िम्मेदारी अभी भी कंपनी पर है."

यह पूछे जाने पर कि क्या वे ओलंपिक का बहिष्कार करेंगे, उन्होंने कहा, "हमने बहिष्कार करने के बारे में कोई चर्चा नहीं की, यह निर्णय सरकार ही ले सकती है."

ओलंपिक संघ के अध्यक्ष का कहना था, "हम सरकार को लिखेंगे कि ये संवेदनशील मुद्दा है और सरकार बताए कि वह इस पर क्या करने जा रही है."

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Image caption डाओ केमिकल्स का दुनिया भर में विरोध हुआ है

उनका कहना था कि ये सुझाव दिए गए हैं कि सदस्य लंदन में विरोध प्रदर्शन करें या खिलाड़ी खेल के दौरान बाँह पर काली पट्टी बाँध कर विरोध प्रदर्शन करें लेकिन कुछ अन्य लोगों का कहना था कि बहिष्कार करना खिलाड़ियों के हित में नहीं होगा.

विजय कुमार मल्होत्रा भारतीय जनता पार्टी के सदस्य भी हैं और उन्होंने इस बात पर आश्चर्य जताया कि ओलंपिक के बहिष्कार को लेकर सरकार कोई निर्णय लेने की जगह यह ज़िम्मेदारी ओलंपिक संघ पर क्यों छोड़ रही है.

उनका कहना था कि इस बारे में अंतिम निर्णय सरकार ही ले सकती है.

उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान कई सदस्यों ने इस पर भी आश्चर्य जताया कि सरकार डाओ केमिकल्स पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है, जो भारत में बाक़ायदा एक कार्यालय चला रही है.

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