सचिन, द्रविड़ और लक्ष्मण का विकल्प

राहुल द्रविड़ और सचिन तेंदुलकर इमेज कॉपीरइट Getty

भारतीय क्रिकेट में इस समय तीन स्तंभ हैं. सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण. इन नाम आते ही दुनियाभर को ये अहसास हो जाता है कि भारतीय क्रिकेट कितना धनाढ्य है.

लेकिन ये अहसास होते ही भारतीय क्रिकेट प्रेमियों की बेचैनी बढ़ जाती है कि जब ये तीनों क्रिकेट की दुनिया को अलविदा कहेंगे तो क्या होगा....क्या भारतीय क्रिकेट इसके लिए तैयार है. क्या युवा खिलाड़ी इन चुनौतियों को पार पाने का माद्दा रखते हैं.

इन दिनों भारतीय क्रिकेट प्रयोग के दौर से गुज़र रहा है. आईपीएल के कारण भी कई नए चेहरों ने भारतीय क्रिकेट टीम में दस्तक दी है और कई को मौक़े भी मिल रहे हैं. लेकिन इन युवा खिलाड़ियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है, लगातार अच्छा प्रदर्शन.

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व स्पिनर युवा खिलाड़ियों की चुनौतियों का खाका कुछ यूँ खींचते हैं.

मनिंदर सिंह कहते हैं, "सबसे बड़ी चुनौती ये है कि आप दबाव को किस तरह हैंडल करते हैं. एक सबसे ख़ास बात ये है कि हमारे यहाँ बहुत जल्दी हीरो बन जाते हैं खिलाड़ी. एक उदारहण सुरेश रैना का और दूसरा उदाहरण युवराज सिंह का. इन्होंने दो-तीन मैचों में अच्छा किया. ये इतने बड़े हीरो बन गए कि फिर उन्होंने ज़्यादा ध्यान देने की कोशिश नहीं की क्रिकेट के ऊपर. अन्यथा इन दोनों में माद्दा था और है भी कि ये दोनों टेस्ट मैच भी खेल सकते हैं. लेकिन इन दोनों ने कहीं न कहीं इस पर काम नहीं किया. बोर्ड को चाहिए कि वो नई प्रतिभाओं के साथ अच्छी तरह से हैंडल करे. उन्हें बताए कि उनसे क्या अपेक्षाएँ हैं. कहीं टैलेंट खो न जाए."

प्रतिस्पर्धा

बीसीसीआई के उपाध्यक्ष निरंजन शाह ये तो मानते हैं कि प्रतिस्पर्धा तगड़ी है. लेकिन ऐसा भी नहीं कि टीम में इनकी वापसी नहीं हो सकती.

निरंजन शाह कहते हैं, "इतनी प्रतिभा है, तो प्रतिद्वंद्विता भी है. खिलाड़ियों को जो भी मौक़ा मिलता है, उसे हाथों-हाथ लेना चाहिए. अगर रणजी ट्रॉफ़ी और घरेलू क्रिकेट में उनका प्रदर्शन अच्छा रहा तो उनके टीम में वापस आने की भी पूरी संभावना रहती है."

युवा खिलाड़ियों के वापस आने की संभावना तो रहती है. लेकिन ज़्यादातर अवसर उन्हें सीनियर खिलाड़ियों के घायल होने के कारण मिल रहे हैं. मदन लाल इससे इनकार करते हैं और कहते हैं कि अब तो प्रदर्शन ही एकमात्र रास्ता होगा.

मदन लाल कहते हैं, "ऐसा नहीं होगा. अगर उन्होंने अच्छा किया तो वो बाहर नहीं जाएँगे. अगर युवराज अच्छा करेंगे तभी उन्हें टीम में जगह मिलेगी. आपको घरेलू क्रिकेट में अच्छा करना पड़ेगा. अगर रोहित और विराट अच्छा करेंगे तो ये टीम से बाहर जाने वाले नहीं हैं."

टीम में स्थायी जगह बनाने के रास्ते में आईपीएल ने भी इन युवा खिलाड़ियों के सामने एक चुनौती खड़ी कर दी है. आईपीएल के आधार पर राष्ट्रीय टीम में जगह पाने वाले खिलाड़ियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और मुश्किल ये है कि जानकार ऐसे खिलाड़ियों को लंबी रेस का घोड़ा नहीं मान रहे हैं.

मुंबई मिरर के स्पोर्ट्स एडिटर कुणाल प्रधान कहते हैं, "आईपीएल के कारण हर खिलाड़ी ये सोचने लगा है कि वो कभी भी टीम में जगह बना सकता है. खिलाड़ियों को लगता है कि आईपीएल में अगर वो दो-तीन अच्छा प्रदर्शन कर लें, तो उन्हें टीम में सीधा टिकट मिल सकता है. बीसीसीआई ने क्रिकेट का ऐसा रूप विकसित कर दिया है, जो क्रिकेट के बाक़ी रूपों से आसान है. अगर टेस्ट क्रिकेट में आपको जगह बना कर रखनी है, तो आपको लगातार अच्छा प्रदर्शन करना होगा और आपमें सुधार दिखनी चाहिए. आईपीएल में आप अच्छा किया, आपका चांस है. लेकिन आईपीएल में 50 खिलाड़ी ऐसे भी हैं, जिनका बराबर चांस है."

योजना

लेकिन इन खिलाड़ियों को अगर लंबी रेस का घोड़ा बनना है तो क्रिकेट के तीनों रूपों में अपने आप को साबित करना. इसके लिए शारीरिक और मानसिक रूप से मज़बूत होना होगा.

अब सवाल वो, जिस पर पूरी दुनिया की नज़र है. और वो ये कि सचिन, द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण के टीम से जाने की स्थिति में भारतीय टीम का बैक-अप प्लान क्या है.

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Image caption लक्ष्मण और सचिन तेंदुलकर का स्थान कौन लेगा?

निरंजन शाह इस कठिन सवाल का आसान जवाब देते हैं. कहते हैं, "धीरे-धीरे हो रहा है. रोहित शर्मा, विराट कोहली है और चेतेश्वर पुजारा भी हैं. वे उनकी जगह ले सकते हैं. इन तीनों खिलाड़ियों ने भारतीय क्रिकेट को बहुत कुछ दिया है. कभी न कभी तो इन तीनों को जाना ही पड़ेगा और मुझे लगता है कि इन तीनों का विकल्प हमारे पास है."

लेकिन ये सवाल इतना आसान नहीं है. दरअसल आवश्यकता संयम की है और सोच की भी. सिर्फ़ संयम रखने से कुछ नहीं होगा. योजना भी बनानी होगी...

कुणाल प्रधान की बात में काफ़ी दम नज़र आता है. वे कहते हैं, "कुणाल प्रधान- बहुत समय से हमें पता है कि वे जाएँगे तो इकट्ठा जाएँगे. जैसा ऑस्ट्रेलिया में हुआ है. हमें पूरा बैक-अप प्लान बनाना चाहिए. बोर्ड को खिलाड़ियों को इस तरह तैयार करना चाहिए कि वे बैक अप बन पाएँ."

क्रिकेटर आकाश चोपड़ा भी मानते हैं कि एकाएक इन बड़े खिलाड़ियों की जगह लेना नामुमकिन है.

कहते हैं, "ये बहुत बड़े क्रिकेटर रहे हैं. कोई खिलाड़ी एकाएक आकर उनकी कमी पूरी करेगा, ऐसा सोचना अनुचित है. बहुत लंबा समय लगता है वहाँ तक पहुँचने में. जब ये खिलाड़ी भी आए थे तो इन्हें भी समय लगेगा. हमें थोड़ा संयम रखना पड़ेगा. प्रतिभा की कमी नहीं."

लब्बोलुआब ये कि क्रिकेट प्रबंधन हड़बड़ी में युवा खिलाड़ियों पर ज़्यादा बोझ न डाले और न ही आईपीएल की धमाचौकड़ी को राष्ट्रीय टीम में आने का आधार बनाए. सब मानते हैं कि युवा खिलाड़ियों में प्रतिभा है. लेकिन सचिन, द्रविड़ और लक्ष्मण बनना है तो मैदान में अपने प्रदर्शन से इतिहास रचना होगा.

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