हार की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी मेरी - धोनी

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Image caption पर्थ टेस्ट मैच के बाद भारतीय कप्तान धोनी और ऑस्ट्रेलिया के कप्तान माइकल क्लार्क बात करते हुए

भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने सिरीज़ में हार की ज़िम्मेदारी अपने सर पर ली है.

उन्होंने कहा है कि वो सबसे बड़े दोषी हैं और भारतीय क्रिकेट इस वक्त अपने सबसे बुरे दौर से गुज़र रहा है.

पर्थ टेस्ट मैच की हार से भारत ने सिरीज़ में लगातार तीसरा टेस्ट मैच गंवा दिया है. धोनी के लिए इसलिय ये और भी शर्मनाक है कि ये लगातार दूसरी बार है जब टीम को पारी की हार का सामना करना पड़ा है.

इस बीच आईसीसी ने भारतीय कप्तान धोनी को धीमी गति से गेंदबाज़ी (स्लो ओवर रेट) करने का ज़िम्मेदार क़रार देते हुए उनपर एक मैच की पाबंदी लगा दी है.

धोनी अब एडिलेड में खेले जाने वाला सिरीज़ का चौथा और अंतिम टेस्ट नहीं खेल सकेंगे.

मैच के बाद संवाददाता सम्मेलन में धोनी ने माना कि भारतीय क्रिकेट बुरे दौर से गुज़र रहा है और कप्तान के तौर पर सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी उनकी बनती है.

उन्होंने कहा, "मुझे सबसे पहले ख़ुद को ज़िम्मेदार मानना होगा. मैं इस टीम का कप्तान हूं और सबसे पहले मेरी ज़िम्मेदारी बनती है."

साल 2011 में विश्व कप जीतने के बाद भारतीय टीम का प्रदर्शन लगातार गिर रहा है. इससे पहले इंग्लैंड में भारत को 4-0 से हार मिली थी, और इन तीन हार को मिलाकर भारतीय टीम का विदेशी धरती पर रिकॉर्ड 0-7 हो जाता है जो किसी भी टीम के लिए बेहद शर्मनाक है.

धोनी का कहना है कि इन सभी मैचों में भारतीय बल्लेबाज़ी का न चल पाना सबसे बड़ा रोड़ा है. इन मैचों में सिर्फ़ एक बार टीम 350 से उपर किसी पारी में बना सकी है.

उन्होंने कहा, "ये सबसे ख़राब वक़्त में से एक है. इंग्लैंड और यहां भी हमने ज़्यादा रन नहीं बनाए हैं. इंग्लैंड में हमारे सभी गेंदबाज़ फ़िट नहीं थे, लेकिन यहां हमने ख़राब गेंदबाज़ी नहीं की है और वो हमारे लिए चिंता का विषय नहीं है. लेकिन बैटिंग का लगातार फ़्लॉप होना सबसे बड़ी चिंता है."

वहीं टीम के अनुभवी बल्लेबाज़ों पर भी काफ़ी दबाव है और उनके रिटायरमेंट की बात ज़ोर पकड़ने लगी है. वीवीएस लक्ष्मण क्रीज़ पर वक़्त नहीं बिता पा रहे हैं और राहुल द्रविड़ लगातार बोल्ड आउट हो रहे हैं. पिछले दस में आठ बार राहुल बोल्ड हुऐ हैं.

सीनियर बल्लेबाज़

क्या सीनियर बल्लेबाज़ों को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहना चाहिए, इसपर धोनी ने कहा कि फ़ैसला सोच समझ कर लेना पड़ेगा.

उन्होंने कहा, "इस मामले में खिलाड़ी और बीसीसीआई को साथ मिलकर फ़ैसला लेना होगा. टीम के हित में जो सबसे अच्छा है वो करना होगा. टीम में युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का सही मिश्रण ज़रूरी है."

वहीं ऑस्ट्रेलिया के कप्तान माइकल क्लार्क ने कहा कि उनके गेंदबाज़ों को जीत का श्रेय देना चाहिए.

उन्होंने कहा, "इस मैच में बल्लेबाज़ी आसान नहीं थी लेकिन जिस तरह वॉर्नर और कॉवन ने बल्लेबाज़ी की उससे हमें बहत फ़ायदा हुआ. साथ ही पूरी सिरीज़ मे हमारे गेंदबाज़ों ने बेहतरीन लाइन और लेंथ पर बॉलिंग की है और बल्लेबाज़ों को कई छूट नहीं दी जिससे हमें लगातार विकेट मिलते रहे."

धोनी का कहना है कि भारत को देश के बाहर भी जीतना सीखना होगा. लेकिन जिस आसानी से भारतीय टीम हार रही है, धोनी को भी मालूम है कि उनके पास समय कम है.

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