बे'सहारा' हुआ बीसीसीआई

 शनिवार, 4 फ़रवरी, 2012 को 11:16 IST तक के समाचार

सहारा ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड बीसीसीआई और आईपीएल से अपना नाता तोड़ा

भारतीय क्रिकेट टीम की प्रायोजक सहारा ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड "बीसीसीआई" और इंडियन प्रीमियर लीग "आईपीएल" से अपना नाता तोड़ लिया है.

सहारा इंडिया परिवार वर्ष 2001 से लगातार टीम इंडिया का आधिकारिक प्रायोजक रहा है.

ये ख़बर आईपीएल ऑक्शन से कुछ ही देर पहले ही आई है जिसमें लगभग 140 राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की बोली लगने वाली थी.

सहारा इंडिया ने बीसीसीआई से अनुरोध किया कि आईपीएल टीम पुणे वॉरियर्स को किसी और को दे दिया जाए. सहारा ने वर्ष 2010 में पुणे वॉरियर्स की फ्रेंजाइजी 1702 करोड़ रूपए में खरीदी थी.

लेकिन सबसे बड़ा फ़ैसला भारतीय क्रिकेट टीम के प्रायोजक से हटना है. सहारा इंडिया परिवार वर्ष 2001 से लगातार टीम इंडिया का आधिकारिक प्रायोजक रहा है.

जवाब में बीसीसीआई ने भी एक विज्ञपति में कहा, ''हमें पता चला है कि सहारा ने एक बयान में भारतीय क्रिकेट और आईपीएल से हटने की इच्छा जताई है. हम सहारा से इस मामले पर बातचीत करेंगे और उनका मत जानेंगे. पिछले दिनों सहारा चाहती थी कि हम उनके लिए नियमों में परिवर्तन करे, लेकिन ये संभव नहीं है.''

बीसीसीआई की ओर से जारी बयान में कहा गया, ''सहारा चाहे तो बोली लगने की प्रक्रिया के बाद खिलाड़ी बदल सकता है. छह फरवरी को ट्रेडिंग विंडो फिर खुलेगी तब सहारा को एक और मौका मिलेगा.''

आर्थिक झटका

वर्ष 2010 में सहारा इंडिया परिवार ने आख़िरी बार तीन साल के लिए 400 करोड़ रूपए की बोली लगाकर क्रिकेट टीम की स्पॉन्सरशिप ली थी.

सहारा का बयान

"प्रायोजक के रूप में 11 वर्ष की यात्रा के बाद हम निश्चित तौर पर कह सकते हैं कि क्रिकेट काफी धनाड्य हो गया है. कई धनी लोग मज़बूत इच्छा के साथ क्रिकेट का समर्थन का हौसला बढ़ाने के लिए मौजूद हैं. इसलिए हम पूरी मानसिक शांति के साथ भारी मन से बीसीसीआई के अंतर्गत आने वाले क्रिकेट से हट रहे हैं."

सहारा के इस कदम को बीसीसीआई के लिए आर्थिक झटका माना जा रहा है.

सहारा की ओर से जारी बयान में कहा गया है, 'हम बीसीसीआई के अधीन आने वाले सभी तरह के क्रिकेट से हट रहे हैं.'

सहारा इंडिया ने एक बयान में कहा, ''प्रायोजक के रूप में 11 वर्ष की यात्रा के बाद हम निश्चित तौर पर कह सकते हैं कि क्रिकेट काफी धनाड्य हो गया है. कई धनी लोग मज़बूत इच्छा के साथ क्रिकेट का समर्थन का हौसला बढ़ाने के लिए मौजूद हैं. इसलिए हम पूरी मानसिक शांति के साथ भारी मन से बीसीसीआई के अंतर्गत आने वाले क्रिकेट से हट रहे हैं.''

बयान के मुताबिक, ''इस प्रायोजन को शुरू करना हमारा भावनात्मक फैसला था, लेकिन हमारी भावनाओं को कभी नहीं सराहा गया और कई मौकों पर हमारे निवेदन पर कोई विचार नहीं किया गया.''

बीसीसीआई ज़िम्‍मेदार

तकरार की वजहें

  • 2008 में आईपीएल में प्रवेश को सिर्फ़ एक छोटे से तकनीकी आधार पर अयोग्य करार दिया गया
  • आईपीएल के लिए टीम की ख़रीददारी के दौरान 94 मैच और 10 टीमों के हिसाब से पैसा लिया गया, लेकिन सिर्फ 74 मैच खेले गए.
  • विश्व कप के दौरान खिलाड़ियों के शर्ट पर सहारा का लोगो नहीं इस्तेमाल किया गया, क्योंकि ये दक्षिण अफ्रीका की सहारा एयरलाइन्स से सहारा का लोगो से मिलता जुलता था.
  • सहारा युवराज की जगह पर सौरव गांगुली को पुणे टीम में रखना चाहता था लेकिन बोर्ड ने नियमों का हवाला करते हुए ऐसा करने से मना कर दिया.

सहारा ने रिश्‍ता टूटने के लिए बीसीसीआई को ज़िम्‍मेदार ठहराया है.

सहारा का कहना है कि 2008 में उन्होंने आईपीएल में प्रवेश किया था लेकिन उन्हें सिर्फ़ एक छोटे से तकनीकी आधार पर अयोग्य करार दिया गया.

सहारा परिवार के मुखिया सुब्रतो राय ने कहा, ''हमने कहा था कि अगर एक या दो टीम कमज़ोर रहा तो टूर्नामेंट पर इसका बुरा असर पड़ेगा, टीमों में बराबरी होनी चाहिए. नए टीमों को कुछ तो फ़ायदा देना चाहिए, कम से कम अधिक विदेशी खिलाड़ी खिलाने का ही अधिकार दे देना चाहिए. लेकिन हमारी सुनी नहीं गई. मै किसी को दोश नहीं देना चाहता.''

उन्होंने आगे कहा, ''मै खिलाड़ियों को लेकर चिंतित हूँ और चाहता हूँ कि हमारे आईपीएल से जाने के बाद भी हमारे खिलाड़ी खेलें इसलिए हमने अनुरोध किया है कि खिलाड़ियों को किसी और इच्छुक कोर्पोरेट को दे दिया जाए.''

पिछले साल आईपीएल के लिए टीम की ख़रीददारी के दौरान 94 मैच और 10 टीमों के हिसाब से पैसा लिया गया, लेकिन सिर्फ 74 मैच खेले गए, जिससे सहारा को नुकसान हुआ. बोर्ड ने नुकसान हुए पैसों को वापस नहीं किया.

दक्षिण अफ्रीका में विश्व कप आयोजन के दौरान खिलाड़ियों के शर्ट पर सहारा का लोगो नहीं इस्तेमाल किया गया, क्योंकि ये दक्षिण अफ्रीका की सहारा एयरलाइन्स से सहारा का लोगो से मिलता जुलता था.

इस हिसाब से सहारा को दो मैच के लिए फीस नहीं देनी थी, लेकिन इस सबके बावजूद सहारा ने दोनों मैचों के लिए खिलाड़ियों को पूरी रकम अदा की.

सहारा ने वर्ल्‍ड कप की जीत में हीरो रहे युवराज सिंह के प्रति सहानुभूति नहीं दिखाने के लिए बीसीसीआई की आलोचना की है.

युवराज सिंह का मामला

युवराज सिंह के मामले पर सहारा का कहना था, 'युवराज का अभी इलाज चल रहा है. हमने बीसीसीआई से अनुरोध किया था कि हम युवराज की जगह पर सौरव गांगुली को पुणे टीम में रखना चाहते हैं लेकिन बोर्ड ने नियमों का हवाला करते हुए ऐसा करने से मना कर दिया. हमें ऐसा लग रहा है कि हमारे साथ धोखा हुआ है, इसलिए हमने बोर्ड से रिश्‍ता तोड़ने का फैसला किया.'

कंपनी का कहना कि वो बीसीसीआई से कोई टकराव नहीं मोल लेना चाहती है, इसलिए वह बोर्ड से रिश्‍ते ख़त्‍म कर रही है.

सहारा की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि अब वो देश में खेलों को बढ़ावा देने के लिए 20 केंद्रों की स्थापना करेगी.

सहारा के मुताबिक कंपनी हर साल दस करोड़ रुपए ऐसे खेलों और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने में लगाएगी जो पीछे छूट गए हैं.

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