'रन मशीन'हैं युवराज सिंह

Image caption बाएं हाथ के बल्लेबाज़ युवराज सिंह भारतीय टीम के अच्छे क्षेत्ररक्षकों में भी गिने जाते हैं

अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाज़ी से क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीतने वाले खिलाड़ी युवराज सिंह की ओर लोगों का ध्यान वर्ष 1999 में पहली बार तब गया जब उन्होंने अंडर-19 पंजाब क्रिकेट टीम की ओर से खेलते हुए कूच-बिहार ट्रॉफ़ी के फ़ाइनल मुक़ाबले में बिहार के ख़िलाफ़ जमशेदपुर में 358 रन बना डाले.

इसके बाद चयनकर्ताओं की नज़र में आए युवराज सिंह को श्रीलंका में जनवरी 2000 में आयोजित अंडर-19 वर्ल्ड कप में खेलने का मौक़ा मिला जहां मोहम्मद कैफ़ की कप्तानी में भारत ने टूर्नामेंट जीता था.

अंतरराष्ट्रीय मैचों में पदार्पण

आईसीसी नॉक-आउट ट्रॉफ़ी के दौरान वर्ष 2000 में कीनिया के ख़िलाफ़ एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों में पदार्पण करने वाले युवराज ने ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध अपने दूसरे अंतरराष्ट्रीय मैच में ही 82 गेंदों में 84 रन की धमाकेदारी पारी खेली.

इस मैच में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के ग्लेन मैक्ग्रा, ब्रेट ली और जेसन गिलेस्पी जैसे धुरंधर गेंदबाज़ों की धज्जिया उड़ाई थीं.

अंतरराष्ट्रीय मैचों में युवराज सिंह ने अपनी पहला शतक वर्ष 2003 में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ जड़ा. इसके बाद जिम्बाब्वे और ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ भी शतक लगाए. उन्होंने सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर 119 गेंदों में 139 रन बनाए.

इंडियन ऑयल कप 2005 में मोहम्मद कैफ़ के साथ वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ शतकीय पारी खेलने के बाद युवराज सिंह भारतीय टीम के नए कोच ग्रेग चैपल के साथ खटपट के कारण सुर्खियों में रहे.

युवराज सिंह ने साल 2005 और 2006 में एकदिवसीय मैचों में ज़ोरदार प्रदर्शन करते हुए दक्षिण अफ़्रीका, पाकिस्तान और इंग्लैंड के ख़िलाफ़ लगातार तीन श्रृंखलाओं में मेन ऑफ़ द सीरीज़ का ख़िताब अपने नाम किया.

इन श्रृंखलाओं के 15 मैचों में उन्होंने तीन शतक और चार अर्धशतक लगाकर आईसीसी की एकदिवसीय मैचों में चोटी के दस बल्लेबाज़ों में अपनी जगह बनाई.

चोटिल होने की वजह से वर्ष 2007 के क्रिकेट विश्व कप में युवराज सिंह के ना खेल पाने की अटकलों के बीच उन्होंने तेज़ी से वापसी ज़रूर की लेकिन इस बार वे बरमूडा के ख़िलाफ़ एकमात्र अर्धशतक लगाने के अलावा अपने बल्ले से कोई क़माल नहीं दिखा पाए.

सितम्बर 2007 में राहुल द्रविड के हटने के बाद महेंद्र सिंह धोनी को कप्तानी मिलने पर युवराज सिंह को उपकप्तानी करने का मौक़ा मिला.

छह गेंदों पर छह छक्के

Image caption एकदिवसीय मैचों के साथ ही 20-20 मैचों में भी युवराज सिंह का बल्ला ख़ूब चला

नवंबर 2008 में उन्होंने राजकोट में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ 78 गेंदों पर 138 रन बनाए और नाबाद रहे. उन्होंने 64 गेंदों पर शतक बनाया था जो उस समय किसी भी भारतीय खिलाड़ी के द्वारा सबसे तेज़ी से बनाया दूसरा शतक था.

वर्ष 2011 के क्रिकेट विश्वकप में युवराज सिंह ने आयरलैंड के पांच विकेट चटकाए और ऐसा करने वाले वे पहले खिलाड़ी बने.

विश्वकप में उन्होंने कुल 362 रन बनाए और 15 विकेट चटकाए, जिसकी बदौलत उन्हें मेन ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया.

एकदिवसीय मैचों के साथ ही 20-20 मैचों में भी युवराज सिंह का बल्ला ख़ूब चला. उन्होंने आईसीसी के पहले 20-20 विश्वकप में डर्बन में एक ओवर में छह छक्के जड़े थे.

इसके साथ ही सबसे कम गेंदों में अर्धशतक पूरा करने का कीर्तिमान भी उनके नाम दर्ज़ हो गया.

ऑस्ट्रेलिया के ब्रेट ली की गेंद पर उन्होंने सबसे लम्बा छक्का भी जड़ा था.

बेहतरीन क्षेत्ररक्षक

आईपीएल की बारी आई तो युवराज सिंह एक बार फिर चमके. आईपीएल के पहले दो संस्करणों में उन्हें किंग्स इलेवन पंजाब टीम की कमान संभाली.

ऐसा नहीं है कि युवराज सिंह सिर्फ़ बल्लेबाज़ी ही करते हैं. वर्ष 2009 में आईपीएल मैचों में दो बार ऐसे मौक़े आए जब उन्होंने विरोधी टीम के तीन खिलाड़ियों को लगातार आउट करके हैट्रिक लगाई.

वर्ष 2011 में आईपीएल के लिए पुणे वॉरियर्स नामक नई टीम बनी तो युवराज सिंह को ना केवल इस टीम में जगह मिली बल्कि उन्हें कप्तान भी बनाया गया.

बाएं हाथ के बल्लेबाज़ युवराज भारतीय टीम के अच्छे क्षेत्ररक्षकों में भी गिने जाते हैं. टेस्ट मैचों में भी उनके प्रदर्शन को सराहा गया है.

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