डाउ के खिलाफ सरकार ने आईओसी को लिखा पत्र

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Image caption सोमवार को पांच संस्थाओं ने डाउ को ओलंपिक खेलों का प्रायोजक बनाने के ख़िलाफ़ दिल्ली में प्रदर्शन किया.

डाउ कैमिकल्स को लंदन ओलंपिक खेलों का प्रायोजक बनाए जाने के विरोध में केंद्र सरकार ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति यानि आईओसी को चिट्ठी लिखी है.

इस पत्र में साफ़ तौर पर कहा गया है कि डाउ कैमिकल्स को ओलंपिक खेलों का प्रायोजक ना बनाया जाए.

इससे पहले भारतीय ओलंपिक संघ तो आईओसी से अपना विरोध कई बार जता चुका है लेकिन सरकार की तरफ़ से ये पहला पत्र है.

इस पत्र में लिखा है, “भारत सरकार अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ से डाउ कैमिकल्स के प्रायोजन को तुरंत रद्द करने के लिए क़दम उठाने की गुज़ारिश करती है. इससे ओलंपिक आंदोलन के आदर्शों को बल मिलेगा साथ ही लाखों लोगों को संतोष मिलेगा. ”

पत्र में दुख जताया गया है कि डाउ कैमिकल्स को प्रायोजन से ना हटाकर अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ ने पूर्व ओलंपिक खिलाड़ियों समेत कई पक्षों की भावनाओं का सम्मान नहीं किया है.

गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ ने 16 जुलाई 2010 को डाउ के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे जिसके अनुसार डाउ अब वर्ष 2020 तक आधिकारिक विश्वव्यापी ओलंपिक पार्टनर बन गया है.

भारत में जुलाई 2010 के बाद से ही इस फैसले के ख़िलाफ़ आवाज़ें उठती रही हैं.

भारत में विरोध

इसी मुद्दे को लेकर सोमवार को दिल्ली में भोपाल गैस पीड़ितों के लिए काम कर रही पांच संस्थाओं ने खेल मंत्रालय के बाहर धरना दिया.

साथ ही इन संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने दिल्ली स्थित ब्रितानी उच्चायोग को भी एक ज्ञापन सौंपा है.

इन्हीं संस्थाओं में से एक भोपाल ग्रुप फॉर इंफ़ोर्मेशन ऐंड एक्शन से जुड़ीं रचना ढींगरा ने कहा कि उन्हें केंद्रीय खेल मंत्री अजय माकन ने स्पष्ट रूप से बताया है कि डाउ को ओलंपिक खेलों से हटाए जाने का मुद्दा अब भी उठाया जा रहा है.

रचना ढींगरा के मुताबिक उन्हें खेल मंत्री ने बताया कि ‘अगर आईओसी नहीं सुनेगी तो भारत सरकार बहिष्कार की तरफ़ रुख़ अपना सकती हैं.’

ब्रितानी उच्चायोग को ज्ञापन

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Image caption भोपाल गैस पीड़ितों के लिए काम करने वाली संस्थाओं ने दिल्ली में ब्रितानी उच्चायोग को भी एक ज्ञापन दिया.

इन संस्थाओं ने 21 हज़ार लोगों द्वारा हस्ताक्षरित एक ज्ञापन दिल्ली स्थित ब्रितानी उच्चोयोग को दिया है.

रचना ढींगरा ने ज्ञापन के बारे में बताया, “ज्ञापन में हमने लिखा है कि ब्रितानी सरकार भी डाउ कैमिकल्स की के स्टैंड को ही दोहरा रही है और तथ्यों की गलतबयानी कर रही है. ब्रितानी सरकार को चाहिए की वो दोनों पक्षों को सुनने का बाद भी फैसला करे.”

ये संस्थाएं आगे भी ओलंपिक खेलों में डाउ के बहिष्कार की मांग करने के लिए क़दम उठाने जा रही हैं.

ये संस्थाएं अब भारतीय सांसदों में भी अपने अभियान के लिए समर्थन जुटाने का प्रयास करेंगे.

साथ ही अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक खिलाड़ियों से भी अनुरोध किया जाएगा कि अगर डाउ खेलों का प्रायोजक बना रहा तो वे किसी विरोध चिन्ह के साथ ओलंपिक खेलों में शामिल हों.

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