भारतीय हॉकी की ताकतवर त्रिमूर्ति

भारतीय हॉकी टीम में खेलने के लिए एक युवा को चुना जाता है. ये उस खिलाड़ी की ज़िंदगी का सबसे बड़ा दिन था. दो दिन बाद भारतीय टीम को पोलैंड रवाना होता है, उस खिलाड़ी को टीम की जर्सी और किट मिल जाती है.

लेकिन जैसे ही टीम बैंगलौर से दिल्ली होते हुए पोलैंड जाने के लिए तैयार होती है. उस खिलाड़ी को बताया जाता है कि वो टीम में शामिल नहीं है बल्कि उसके स्थान पर किसी दूसरे खिलाड़ी का नाम होता है.

जिस खिलाड़ी को ये झटका मिला, वो थे भारतीय सेंटर हॉफ़ सरदारा सिंह, वहीं सरदारा सिंह जिन्होंने भारत को लंदन ओलंपिक खेलों में पहुंचानें में अहम भूमिका निभाई औऱ मैन ऑफ द टूर्नामेंट रहे.

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सरदारा सिंह

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भारतीय टीम के लिए सरदारा सिंह ने 2006 में पाकिस्तान के खिलाफ़ पहला मुकाबला खेला.

सेंटर हाफ में खेलने वाले सरदारा सिंह की खासियत ये हैं कि वो मुकाबले में बड़ी तेज़ी से गेंद को आगे लेकर बढ़ते हैं और उन्हें रोक पाना विरोधियों के लिए काफ़ी मुश्किल होता है.

सरदारा सिंह भी हरियाणा से आते हैं और हरियाणा पुलिस में डीएसपी हैं.

भारत ने 2006 में सुलतान अजलान शाह हॉकी में कांस्य पदक जीता और सरदारा सिंह भारतीय टीम का हिस्सा थे. इसके अलावा 2007 में एशिया कप विजेता भारतीय टीम का हिस्सा रहे.

सरदारा सिंह कई बार कहते हैं कि वो प्रेक्टिस के दौरान टर्फ पर हर बार कुछ ज्यादा समय बिताते हैं. उनकामानना है कि अपनी कमियाँ सभी जानते है और वो उन्हें हमेशा दूर करने की कोशिश करते हैं.

भरत छेत्री

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भरत छेत्री भारतीय टीम के गोलकीपर और कप्तान हैं. लंबे समय के बाद कोई गोलकीपर भारत का कप्तान बनाया गया है. भारत के लिए भारत ने 128 मुकाबले खेले हैं

भारत की सीनियर टीम में खेलने से पहले भरत छेत्री भारत के लिए 2002 में जूनियर एशिया कप में भी खेल चुके हैं.घरेलू हॉकी में छेत्री भारतीय सेना के लिए खेलते हैं.

2008 के बीजिंग ओलंपिक के लिए क्वालिफाई ना कर पाने के बाद उन्हें टीम से निकाल दिया गया था. 2010 में उन्हें भारतीय टीम में वापस बुलाया गया.

कोच माइकल नोब्स ने ही भरत छेत्री की नेतृत्व को पहचाना. माना जाता हैं कि माइकल नोब्स की पंसद की वजह से भरत छेत्री को कप्तान बनाया गया.

भरत छेत्री ने भी बीबीसी से बातचीत में स्वीकार किया कि उन्होंने कभी उम्मीद नहीं की थी कि वो भारतीय टीम की अगुवाई करेंगे.

ढाका में हुए प्रधानमंत्री गोल्ड कप 2001 में भरत छेत्री ने भारत की ओर से पहला मुकाबला खेला.

2001 विश्व कप में छेत्री देवेश चौहान के साथ टीम के दूसरे गोलकीपर थे.

संदीप सिंह

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संदीप सिहं भारतीय हॉकी टीम के पेनल्टी कार्नर एक्सपर्ट हैं.

हरियाणा पुलिस में डीएसपी संदीप सिंह भारतीय टीम के कप्तान रह चुके हैं. संदीप हरियाणा के शाहबाद से आते हैं.

संदीप के बड़े भाई बिक्रमजीत सिंह भी हॉकी खेलते है और उन्हीं से प्रेरणा ले संदीप सिंह हॉकी में आए. बिक्रमजीत फ़िलहाल इंडियन ऑयल के लिए खेलते हैं.

संदीप ने 2004 में सुलतान अजलान शाह हॉकी टूर्नामेंट में भारत की ओर से अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में कदम रखा और 2009 में संदीप सिंह भारतीय टीम के कप्तान भी रहे.

संदीप सिंह की कप्तानी में ही 2009 में भारत ने सुलतान अजलान शाह ट्राफी जीती. ये भारत की सुलतान अजलान शाह हॉकी में 13 साल बाद पहली जीत थी.

संदीप सिंह ने ओलंपिक क्वालिफायर मुकाबलों में भी शानदार प्रदर्शन किया. छह मैंचों में संदीप सिंह ने 16 गोल किए.

संदीप सिंह भारत की ओर से अब तक 157 मुकाबले खेल चुके हैं.