हॉकी छोड़कर अमरीका जा रहे थे सरदार

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Image caption सरदारा सिंह ओलंपिक क्वालिफायर के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बने

भारतीय हॉकी टीम के लिए ओलंपिक का टिकट कटवाने वाले सरदार सिंह हॉकी छोड़ अमरीका में बसना चाहते थे.

बीबीसी से खास बातचीत में सरदार ने बताया कि एक बार टीम में चुने जाने के बाद आखिरी वक्त बाहर होने पर वो इतने हताश हो गए थे कि उनका इरादा हॉकी छोड़कर विदेश में बसने का हो गया था.

साथ ही सरदार अपना मनोबल बढ़ाने के लिए मैच से पहले मैराडोना के बेहतरीन गोल का वीडियो देखते हैं और उससे प्रेरणा लेते हैं.

हाल ही में दिल्ली में संपन्न हुए ओलंपिक क्वालिफायर में सरदार सिंह 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' चुने गए थे.

ओलंपिक क्वालिफायर में भारतीय टीम ने जीत का सेहरा पहना था और इस सफलता के मुख्य हीरो थे मिडफिल्डर सरदार सिंह. इस जीत के बाद भारतीय हॉकी टीम से प्रशंसकों की उम्मीदें बढ़ गई हैं.

खासकर सरदार सिंह को भारतीय टीम के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियो में एक माना जाता है. वह अकेले भारतीय खिलाड़ी हैं जिन्हें दो बार विश्व एकादश में चुना जा चुका है.

लेकिन ऐसा शायद संभव नहीं होता अगर अपने करियर की उस दोराहे पर सरदार ने हॉकी को अलविदा कह दिया होता.

हताशा

ये वाक्या वर्ष 2004 का है जब सरदार सिंह का चयन जूनियर हॉकी कैंप में हुआ था. कैंप में सरदार का प्रदर्शन बढ़िया रहा और उन्हें पोलेंड में खेले जाने वाले एक टूर्नामेंट के लिए चुन भी लिया गया.

सरदार का वीजा भी लग गया और उनकी किट भी मिल गई, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय उड़ान भरने से ठीक पहले उन्हें बताया गया कि उनका नाम अब टीम में नहीं है.

जाहिर है तब हॉकी के इस युवा सरदार का दिल टूट गया था.

"मैने कहा ओके नो प्रॉब्लम! मैं वापस अपने गांव आया और योजना बनाई कि अमरीका जाउंगा, कुछ काम-वाम करूंगा औऱ वहीं बस जाउंगा," सरदार उस पल को याद करके बताते हैं.

सरदार का हॉकी छोड़ना न सिर्फ भारत के लिए बल्कि विश्व हॉकी के लिए भी नुकसान होता क्योंकि सरदार की गिनती आजकल दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में होती है. सरदार जूनियर हॉकी खेलते रहे, धीरे धीरे सीनियर टीम में भी आए और आज भारतीय मिडफील्ड की रीढ़ बन गए हैं.

मैराडोना के गोल बढ़ाते हैं हौसला

हॉकी के जादूगर अपना हौसला बढ़ाने के लिए फुटबॉल का सहारा लेते हैं. सरदार सिंह डिएगो मैराडोना के बड़े फै़न हैं और मैच से पहले उनका वीडियो देखते हैं.

सरदार ने बीबीसी से कहा, "मैं मैच में जाने से पहले मैराडोना का वीडियो देखता हूं जिसमें उनके बेस्ट गोल होते हैं. उनसे मुझे प्रेरणा मिलती है."

आने वाले दिनों में भारतीय टीम चार अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट खेलेंगी जिसमें भारतीय टीम लंदन ओलंपिक के लिए तैयारी करने का मौका मिलेगा. सरदार मानते हैं कि परीक्षा की असली घड़ी अब आई है और प्रशंसको की उम्मीदों पर खरा उतरना उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती है.

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