डाओ मामले पर नहीं झुकी ओलंपिक समिति

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Image caption डाओ केमिकल्स के खिलाफ प्रदर्शन भी हुए हैं

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने अपने रुख़ को दोहराते हुए कहा है कि वो 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के कारण लंदन ओलंपिक के प्रायोजक के रूप में डाओ केमिकल्स को नहीं हटा सकती.

खेल मंत्रालय के संयुक्त सचिव राहुल भटनागर के पत्र के जवाब में आईओसी ने कहा है कि वो भारत सरकार की चिंता को समझती है, लेकिन भोपाल गैस त्रासदी के समय डाओ केमिकल्स न प्लांट की मालिक थी और न ही वो उसे चलाती थी.

ये पत्र आईओसी के निदेशक, एनओसी रिलेशंस पेरे मिरो ने लिखी है. खेल मंत्रालय के संयुक्त सचिव राहुल भटनागर ने 24 फरवरी को आईओसी के अध्यक्ष जाक रोखे को पत्र लिखकर डाओ केमिकल्स को प्रायोजक के रूप में हटाने की मांग की थी.

इसके जवाब में पेरे मिरो ने लिखा है, "मैं 24 फरवरी 2012 को भेजे आपके पत्र के जवाब में ये पत्र लिख रहा हूँ, जिसमें आपने लंदन ओलंपिक में डाओ केमिलक्स के प्रायोजक के रूप में शामिल किए जाने पर चिंता जताई है. आईओसी ये मानती है कि 1984 की भोपाल त्रासदी भारत और दुनियाभर के लिए एक भयानक घटना थी. ओलंपिक आंदोलन पीड़ित परिवारों के दुख के साथ सहानुभूति जताता है और उस इलाके के लोगों की पीड़ा पर खेद व्यक्त करता है."

पत्राचार

मिरो ने अपने पत्र में लिखा है कि आईओसी ने खेल मंत्रालय के संयुक्त सचिव के पत्र पर गौर किया है. लेकिन डाओ केमिकल्स का यूनियन कार्बाइड के साथ भोपाल गैस त्रासदी के 16 साल तक और भारतीय सुप्रीम कोर्ट की ओर से 47 करोड़ डॉलर के मुआवजा को स्वीकृत किए जाने के 12 साल तक कोई संबंध नहीं था.

सुप्रीम कोर्ट ने उसके बाद से दो बार वर्ष 1991 और फिर 2007 में मुआवजे के लिए हुए समझौते को सही ठहराया था. अपने पत्र में पेरे मिरो ने लिखा है कि आईओसी को ये भी जानकारी है कि भारतीय सुप्रीम कोर्ट तीसरी बार इसकी समीक्षा कर रहा है.

डाओ केमिकल्स को लंदन ओलंपिक के प्रायोजक के रूप में हटाने को लेकर भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन ने पहले आईओसी को मनाने की कोशिश की थी, लेकिन एसोसिएशन ऐसा करने में नाकाम रहा. बाद में खेल मंत्रालय की ओर से चिट्ठी भेजी गई.

हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में खेल मंत्री अजय माकन ने कहा था कि लंदन ओलंपिक के बहिष्कार हो या न हो, इसका फैसला करने के मामले में भारतीय एथलीट अहम भूमिका निभाएँगे.

अजय माकन के इस बयान पर भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन ने आपत्ति जताई थी और कहा था कि खेल मंत्रालय की इस योजना के गंभीर परिणाम हो सकते हैं.

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