भारत में फुटबॉल के बढ़ते कदम

Image caption युवाओं में फुटबॉल की लोकप्रियता बढ़ रही है

वर्ष 1950 में भारत ने ब्राजील में खेली जा रही फुटबॉल विश्व कप के लिए क्वालिफाई तो किया, लेकिन उसने खेलने के लिए मना कर दिया.

इसका एक कारण ये भी था कि खेलने के लिए फुटबॉल बूट पहनने पड़ते, जबकि भारतीय खिलाड़ियों को नंगे पांव खेलने की आदत थी.

2014 में एक बार फिर ब्राजील में विश्व कप का आयोजन हो रहा है. इसके लिए भारतीय टीम का क्वालिफाई करना दूर की बात है.

लेकिन पिछले कुछ साल में क्रिकेट के दीवाने देश में फुटबॉल को बढ़ावा देने की उम्मीदें काफी बढ़ी हैं.

विकास की योजनाएं

ऑल इंडिया फुटबॉल एसोसिएशन (एआईएफएफ) के सचिव कुशल दास मानते हैं कि फुटबाल को सबसे बड़ी चुनौती क्रिकेट से है जिसे सबसे ज्यादा निवेश मिलता है.

उन्होंने कहा, "हमें भारतीय फुटबॉल लीग में लोगों की रूचि बढ़ानी होगी और उसके लिए खेल के विकास की योजनाओं को बढ़ावा देना जरूरी है. कई युवा आज फुटबॉल देख रहे हैं लेकिन उनकी पहली पसंद यूरोपीय फुटबॉल ही है."

एआईएफएफ का कहना है कि हाल ही में फीफा अध्यक्ष सेप ब्लैटर के दौरे से नई उम्मीद जगी है.

फुटबॉल को बढ़ावा देने के लिए संघ कई कदम उठा रही है. कुशल दास ने कहा, "हम जुलाई तक चार फुटबॉल की अकादमी खोल रहे हैं और अगले साल तक चार और अकादमी खोलने की योजना है."

भारतीय फुटबॉल संघ को उम्मीद है कि वो 2017 में अंडर-17 जूनियर विश्व कप का आयोजन करेगी.

दास ने कहा, "अगर हमें जूनियर विश्व कप के आयोजन का अधिकार मिलता है तो इससे कारोबार के कई अवसर मिलेंगे और भारत में फुटबॉल के विकास के लिए नए रास्ते खुलेंगे. लेकिन सबसे बड़ी चुनौती मूलभूत सुविधाओं की कमी है जिसे विश्व कप के आयोजन से पूरा किया सकता है."

एआईएफएफ का कहना है कि 20 सालों में पहली बार एशियन फुटबॉल चैंपियनशिप में खेलना और आईएमजी-रिलायंस के साथ 16 साल का अनुबंध भारतीय फुटबॉल के लिए अच्छी खबर है.

बेहद लोकप्रिय

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Image caption कई यबरोपीय क्लब भारत में ट्रेनिंग खदामी खोल रहे हैं

पुणे जिला फुटबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष विश्वजीत कदम का कहना है कि युवाओं में फुटबॉल बेहद लोकप्रिय हो रहा है.

पुणे का इंग्लिश प्रीमियर लीग के कुछ क्लबों के साथ करार हुआ है. लिवरपूल और ब्लैकबर्न रोवर्स ने शहर में ट्रेनिंग अकादमी खोले हैं.

कदम मानते हैं कि इसके बावजूद ज्यादातर यूरोपीय क्लब भारतीय फुटबॉल बाजार को कम कर आंकते हैं.

उनका कहना है, "भारत में कई ऐसी संस्थाएं हैं जो यूरोपीय क्लबों के साथ साझेदारी करने के लिए पैसे खर्च करने को तैयार हैं."

इंटर मिलान एक ऐसा ही क्लब है जिसने टाटा टी के साथ मिलकर भारत में फुटबॉल टूर्नामेंट की योजना बनाई है.

इस टैलेंट खोज प्रतियोगता के तहत 15 शहर के 1000 स्कूलों में टूर्नामेंट कराया जाएगा.

प्रतिभा की खोज

इंटर मिलान के चीफ कमर्शियल अफसर मारियो डे विवो कहते हैं, "हम इन बच्चों में से 16 खिलाड़ियों को चुनेंगे जिन्हें इंटर मिलान की ट्रेनिंग अकादमी में तीन दिनों का प्रशिक्षण दिया जाएगा. हम भारत को सिर्फ तकनीकी प्रशिक्षण नहीं दे रहे बल्कि मेडिकल, खानपान और मनोवैज्ञानिक मामलों में भी सहयोग दे रहे है."

भारत में कई व्यापार के घराने भी फुटबॉल में निवेश के बारे में सोच रहे हैं.

फेटेरेशन ऑफ इंडियन चेंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इडस्ट्रीज (फिक्की) के सदस्य राजपाल सिंह का कहना है, "हम जानते हैं कि खेलों में हमें विदेशी मदद की जरूरत है. हम भारत में खेल का माहौल बनाना चाहते हैं. भारत एक क्रिकेट प्रेमी देश है लेकिन पिछले दो सालों में दूसरे खेंलों पर लोगों की नजर गई है और फुटबॉल भी इसमें शामिल है."

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