कीनिया: जहाँ हर कोई दौड़ता है

कीनिया के धावक
Image caption वैज्ञानिकों का कहना है कि इन धावकों के शरीर की बनावट उनके लिए कई फायदे लाती है

कीनिया दुनिया के बेहतरीन धावक पैदा करता है, लेकिन कीनियाई धावकों को अपने देश के लिए ओलंपिक स्वर्ण जीतना ही उत्साहित नहीं करता.

इटन के हरे पेड़ों से भरे पहाड़ों के पास से गुज़रते हुए हमारी मुलाकात स्कूल जा रहे कुछ बच्चों से हुई.

ज्यादातर बच्चों के कंधों पर बैग लटके थे और वो उसे लेकर भी बहुत तेज़ दौड़ रहे थे.

13 वर्षीय केनेथ ने बताया कि वो कैसे दोपहर के भोजन के लिए स्कूल से घर और फिर घर से स्कूल दौड़ कर जाते हैं.

एक तरफ की दूरी पूरी करने में केनेथ को 40 मिनट लगते हैं. उनकी पतली, लंबी टांगे हैं और उन्हें दौड़ना अच्छा लगता है.

पश्चिमी केन्या में पैदा हुआ दूसरे बच्चों की तरह केनेथ भी धावक बनना चाहते हैं. ताकि वो अपने परिवार और पूरे गाँव की आर्थिक मदद कर सकें.

यहीं के पले-बढ़े डेविड रुडीशा के नाम 800 मीटर का विश्व रेकॉर्ड है. यहाँ रहने वाले बच्चे डेविड रुडीशा की तरह गरीबी के चंगुल से निकलना चाहते हैं, लेकिन यहाँ इतने अच्छे धावक हैं कि मुकाबला कड़ा है.

यहाँ से एक घंटे की दूरी पर कई भवन हैं जिनकी छत लोह की चादर की है.

ये एक कैंप है जहाँ बच्चों को ट्रेनिंग दी जाती है ताकि वो अमेरिका की किसी विश्वविद्यालय में स्कॉलरशिप हासिल कर सकें, ना कि देश के लिए स्वर्ण पदक जीतें.

पहले ये बच्चे पहाड़ के चारों ओर 45 मिनट तक दौड़ लगाते हैं. फिर उनकी ट्रेनिंग शुरू होती है. तीस मिनट के बाद उनकी कसरतें शुरू होती है.

नोओमी नर्स बनना चाहती हैं, बीट्रिस मॉलेक्युलर वैज्ञानिक और सुस्टीन टीवी ऐंकर, लेकिन उन्हें पता कि अमेरिकी उनकी तेज़ दौड़ के दीवाने हैं.

उनकी कड़ी ट्रेनिंग उन्हें अमेरिका का वीज़ा पाने में मदद करेगी. सबसे अच्छे धावकों की लंबी और पतली टाँगे हैं.

शरीर की बनावट

Image caption कीनियाई स्कूलों में बच्चों के लिए दौड़ें आयोजित की जाती हैं

वैज्ञानिकों का कहना है कि इन धावकों के शरीर की बनावट उनके लिए कई फायदे लाती है.

एक धावक ने मुझे बताया कि लोगों में गरीबी से निकलने की भावना इतनी तीव्र है कि अगर कीनिया एक अमीर देश होता तो यहाँ इतने अच्छे धावक पैदा नहीं होते.

मैं एक दूसरे गाँव में गया जहाँ तीन स्कूलों में प्रतिस्पर्धाएँ हो रही थीं. यहाँ सभी बच्चों को हिस्सा लेने की खुली छूट थी.

बच्चों को अपनी उम्र के हिसाब से लाइन में खड़े होने को कहा गया. वो काफ़ी उत्तेजित थे और वो सभी दौड़ना चाहते थे.

सात साल के बच्चों ने सबसे पहले दौड़ना शुरू किया. उन्होंने अपने जूते फेंके और दौड़ लगा दी.

मैने भी उनके साथ धीरे-धीरे दौड़ना शुरू किया. दस सेकेंड में ही 30 में से एक बच्चे को छोड़कर सभी मुझसे आगे निकल गए.

मैं इसके लिए हाथ में लिए माइक्रोफोन को दोष दे सकता था लेकिन ये बात भी सच थी कि मैं इतनी उँचाई पर दौड़ने का आदि नहीं हूँ.

लेकिन इन सभी बच्चों को मुझे हरा देने में काफ़ी मज़ा आया.

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