एथलीटों पर नहीं लगेगा आजीवन प्रतिबंध

Image caption लंदन शहर ओलंपिक के लिए पूरी तरह तैयार दिख रहा है.

ब्रिटेन में प्रतिबंधित दवा लेने के दोषी पाए गए एथलीट अब लंदन ओलंपिक में हिस्सा ले सकेंगे क्योंकि अदालत ने ब्रिटिश ओलंपिक एसोसिएशन (बीओए) की आजीवन प्रतिबंध की नीति को ख़ारिज कर दिया है.

खेल मामलों की मध्यस्थता करने वाली अदालत में इस मामले पर चल रही सुनवाई में ब्रिटिश ओलंपिक एसोसिएशन और विश्व एंटी डोपिंग एजेंसी के बीच मामला था जो एसोसिएशन हार गई है.

इसका मतलब ये हुआ कि धावक ड्वेन चैंबर्स और साइकिल चालक डेविड मिलर लंदन ओलंपिक में ब्रिटेन की टीम का हिस्सा बनने के लिए पूरी कोशिश कर सकते हैं.

इन दोनों पर प्रतिबंधित दवाएं लेने के आरोप में आजीवन प्रतिबंध लगाया गया था. 34 वर्षीय चैंबर्स और 36 वर्षीय मिलर अगर तय मानकों पर खरे उतरते हैं तो वो टीम का हिस्सा बन सकते हैं.

दोनों ही एथलीट लंबे समय से विश्व एंटी डोपिंग एजेंसी के साथ काम कर रहे थे ताकि उन पर लगे प्रतिबंध खत्म हो. बीओए का कहना था कि उन्हें दोषी पाए गए खिलाड़ियों पर आजीवन प्रतिबंध लगाने का अधिकार है.

यह क़ानून 20 साल पहले लाया गया था जिसके कारण लंबे समय से कई ब्रितानी एथलीट दोषी पाए जाने के बाद किसी और खेल में हिस्सा नहीं ले सके हैं.

चैंबर्स लगातार इस क़ानून को खत्म करने की मांग करते रहे हैं.

ब्रिटेन में एक एंटी डोपिंग कंसल्टेंसी के निदेशक मिशेल वेर्रोकन का कहना था, ‘‘ मैं तो एथलीटों और बीओए दोनों के लिए दुःखी हूं. ये क़ानून 20 साल से है और अब अदालत ने फ़ैसला दिया है कि इस क़ानून को हटाना चाहिए. इसका ये मतलब है कि अब बीओए को अपनी ही टीम चुनने का अधिकार नहीं होगा. जो लोग पहले दोषी पाए जा चुके हैं उनके साथ बाकी एथलीटों को दिक्कत भी हो सकती है.’’

रविवार को जारी एक बयान में बीओए ने कहा है कि उन्हें कोर्ट का फ़ैसला मिल गया है लेकिन हम अभी इस पर कोई टिप्पणी करना नहीं चाहेंगे.

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