ट्विटर पर ललित मोदी की लड़ाई

 सोमवार, 14 मई, 2012 को 16:16 IST तक के समाचार
ललित मोदी

ललित मोदी क्रिस क्रेन्स के खिलाफ मानहानि का मुकदमा हार गए हैं

13 मई 2012 कई मायनों में खेल प्रशंसकों के लिए यादगार था. इंग्लिश प्रीमियर लीग में मैनचेस्टर सिटी का खिताब जीतना, उनके प्रशंसकों का जश्न.

रोजर फेडेरर का मैड्रिड मास्टर्स जीतकर नया रिकॉर्ड बनाना और आईपीएल के दो जबरदस्त मैचों में स्थानीय खिलाड़ियों का बेहतरीन प्रदर्शन.

किसी भी खेल प्रेमी के लिए इतना अच्छा रविवार कम ही आता है. खासकर वैसी स्थिति में जब आपकी फेवरिट टीम और फेवरिट खिलाड़ी मैदान पर अपना जलवा दिखा रहे हों.

लेकिन खेल के मैदान पर चल रहे संघर्ष के बीच सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर एक नए तरह का जंग चल रहा था. इस जंग के केंद्र में थे आईपीएल के पूर्व चेयरमैन ललित मोदी और भारत के कुछ चर्चित खेल पत्रकार.

लोगों की प्रतिक्रिया जानने की इच्छा और फटाफट अपडेट की चाहत में टीवी पर मैच देखने के साथ-साथ मैं ट्विटर पर भी जुड़ा हुआ था.

एकाएक ललित मोदी और खेल पत्रकारों के बीच चल रहे शब्द वाणों पर नजर गई, तो मैं चौंका और फिर ललित मोदी और बाकी लोगों के ट्वीट पर नजर गई, तो लगा मामला कितना गंभीर है.

गुस्सा

खिसियाए ललित मोदी सीएनएन-आईबीएन के स्पोर्ट्स एडीटर गौरव कालरा, क्रिकेट संवाददाता संजीब मुखर्जी और दिग्विजय सिंह देव से भिड़े हुए थे.

इन पत्रकारों के खफा ललिद मोदी उनकी पत्रकारिता पर सवाल उठा रहे थे और खुन्नस में पता नहीं क्या-क्या लिख रहे थे.

ललित मोदी की पीड़ा समझ में आती है. लेकिन ये भी समझ में आती है कि जब सब कुछ इतना ही सही था, तो मोदी दूर लंदन में बैठकर आजकल बीसीसीआई को क्यों कोस रहे हैं.

सवाल-जवाब के क्रम में तल्ख टिप्पणियाँ उस समय शुरू हुईं, जब ललित मोदी से ये पूछा गया कि क्या 2010 में आईपीएल की नीलामी के दौरान पाकिस्तानी खिलाड़ियों को जान-बूझकर अलग रखा गया था.

ललित मोदी जवाब में बड़ी बात कह गए और बीसीसीआई के तत्कालीन अध्यक्ष और चेयरमैन पर ठीकरा फोड़ा.

मोदी के इस जवाब ने जैसे सवाल-जवाब का पिटारा खोल दिया. जब पत्रकारों ने इसे महत्वपूर्ण स्वीकारोक्ति कहा, तो ललित मोदी भड़क गए. कहने लगे- नई बात क्या है, वे ये कह चुके हैं.

दंभ

उन्होंने पहले की रिपोर्ट्स के लिंक भेजे और अपने को राजा हरिश्चंद्र साबित करने की भरपूर कोशिश की. लेकिन इस कोशिश में वे फँसते चले गए. फिर होना क्या था- सस्ती पत्रकारिता जैसे शब्द इस्तेमाल करने लगे.

सबको याद होगा वर्ष 2010 का वो आईपीएल की बोली, जब पाकिस्तानी खिलाड़ियों को शामिल करने के बाद भी उनके किसी खिलाड़ी को शामिल नहीं किया गया.

सवाल उस समय भी उठे थे, लेकिन शिल्पा शेट्टी और प्रीटि जिंटा के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में आए मोदी ने हँसते हुए दंभ से कहा था कि ऐसा कुछ नहीं है.

इससे अंदाजा होता है कि ललित मोदी आईपीएल को कैसे चलाते थे. अगर बोली लगने से पहले ही कुछ अहम चीजें तय हो जाती हैं, तो क्या-क्या होता होगा, ये सोचकर अच्छा नहीं लगता.

ललित मोदी ने आईपीएल को ब्रांड दिया, स्थापित किया, लेकिन ऐसा करते-करते वे दंभी हो गए. उन्होंने आईपीएल को जागीर बना लिया. जब आप किसी आयोजन को जागीर बनाएँगे, तो फिर कुछ भी हो सकता है.

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