मैं होता तो मेडल की उम्मीद बढ़ती : राज्यवर्धन राठौर

राज्यवर्धऩ सिंह राठौर

2004 के एथेंस ओलंपिक्स में भारत के लिए रजत पदक जीतने वाले निशानेबाज राज्यवर्धन सिंह राठौर इस बार लंदन ओलंपिक्स का मज़ा केवल बाहर से ही ले पाएंगे.

राठौर लंदन के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाए हैं लेकिन उनका मानना है कि ओलंपिक में हिस्सा ले रहे खिलाड़ियों के नजरिए से वो अच्छी तरह से वाकिफ है और वो समझ सकते हैं कि उनकी मनोदशा कैसी है . इसके साथ ही राठौर ने बताया कि लंदन ओलंपिक्स में भाग लेने वाले उनके विदेशी दोस्त उन्हें चिढ़ा भी रहे हैं कि वो इस बार अंदर नहीं बाहर होंगे.

राज्यवर्धन सिंह राठौर से पूरी बातचीत सुनिए

राठौर का मानना है कि अगर शूटिंग फेडरेशन उन्हें ओलंपिक्स में भेजती तो कोई शक नहीं कि भारत के लिए मैडल की संभावना बढ़ती.

साथ ही राठौर ने उम्मीद जताई है कि शूटिंग फेडरेशन का उनकी जगह किसी और को भेजने का फैसला भारत के लिए सही साबित हो.

राठौर ने उम्मीद जताई कि डबल ट्रेप शूटर रोंजन सिंह सोधी मैडल जीतने के असल दावेदार हैं.

वर्तमान शूटिंग टीम की खासियत बताते हुए राठौर कहते हैं इस बार कोई भी खिलाड़ी ओलंपिक में भाग लेने नहीं जा रहा, सब ओलंपिक में जीतने जा रहे हैं .

टीम में आत्मविश्वास की कमी नहीं है और यही बात मैदान पर कारगर साबित होगी. राठौर की शिकायत है कि शूटिंग में संसाधनों की नहीं, नीतियों में एकरुपता की कमी है जिसके कारण खिलाड़ी का खेल पर ध्यान कम और टीम में शामिल होने ना होने पर ज्यादा रहता है.

लंदन ओलंपिक्स में जाने वाली शूटिंग टीम के लिए राठौर का कहना है "टारगेट वही है, कारतूस वही है,बंदूक वही है, बस जगह और दर्शक अलग है . वो अपना काम करेंगे और आप अपना काम कीजिए, मंजिल दूर नहीं ".

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