विश्वनाथन आनंद पाँचवीं बार विश्व चैंपियन बने

आनंद और गेलफेंड इमेज कॉपीरइट BBC World Service

भारत के विश्वानाथन आनंद ने मॉस्को में इसराइल के बोरिस गेलफैंड को टाईब्रेकर में हरा कर पांचवीं बार वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप पर कब्जा कर लिया है.

मॉस्को में चल रही शतरंज की विश्व चैंपियनशिप में बुधवार को लंबे इंतजार के बाद उतार चढ़ाव वाले मैच में आनंद ने 2.5 और 1.5 के अंतर से गेलफैंड का हरा दिया.

टाइब्रेकर का पहला मैच 33 चालों के बाद ड्रा पर छूटा जबकि दूसरे मैच में आनंद ने गेलफैंड को 77 चालों के बाद मात दे दी. टाइब्रेकर के चार में से शेष दो गेम भी ड्रा पर छूटे और इसके साथ ही आनंद ने ये खिताब जीत लिया.

विजेता विश्वनाथन आनंद को 14 लाख डॉलर और उप विजेता को साढ़े ग्यारह लाख डॉलर की राशि मिलेगी.

इससे पहले विश्वनाथन आनंद और बोरिस गेलफैंड के बीच पहले 10 मैच बराबरी पर छूटे थे जबकि दो मैचो में से दोनों ने एक-एक में जीत दर्ज की थी. लेकिन इसके बाद वापसी करते हुए गेलफैंड ने आनंद को अच्छी टक्कर दी.

लगातार तीसरा खिताब

42 वर्षीय आनंद ने वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप लगातार तीसरी बार जीती है. जबकि ये उनका लगातार चौथा खिताब है.

इस जीत के बाद विश्वनाथन आनंद में एक प्रेसवार्ता में कहा कि मैच सचमुच तनावपूर्ण रहा. उनका कहना था कि जब सुबह वे सोकर उठे तो उन्हें लगा कि अब तो कोई परिणाम निकलना ही है.

उनका कहना था कि मैच जिस तरह से बराबरी पर चल रहा था यह कहना मुश्किल था कि उसका परिणाम क्या निकलेगा.

आनंद ने कहा, "इस मैच के बाद मै राहत महसूस कर रहा हूँ. इस मैच में अपनी क्षमताओं का मुझे पता था और मैच जीतकर मुझे अच्छा लग रहा है."

अपने दूसरे प्रतिवद्वंदियों के बारे में आनंद ने कहा, "मैने खांति-मांसिस्क में साल 2009 में हुए विश्व कप में बोरिस को देखा, वो आत्मविश्वास से लबरेज थे और फिर वो कजान की प्रतियोगिता भी जीत गए. इसलिए मुझे कभी नहीं लगा कि टूर्नामेंट में मेरा पलड़ा भारी है."

इससे पहले 2000, 2007, 2008 और 2010 में विश्व विजता रह चुके हैं.

विश्वनाथन आनंद ने 2007 में टूर्नामेंट में आठ खिलाड़ियों के बीच खिताब जीता था.

2008 और 2010 में उन्होंने रूस के व्लादीमीर क्रामनिक और बल्गारिया के वेसेलीन टोपालोव को हराया था. तब टूर्नामेंट का फार्मेट बदल गया था और अब नियमानुसार मौजूदा चैंपियन को चुनौती देने वाले खिलाड़ी के साथ खेलना होता है.

आनंद पहली बार 1987 में वह भारत के पहले ग्रेंडमास्टर बने थे.

11 दिसंबर 1969 को जन्मे आनंद ने 14 साल की उम्र में 9-9 का स्कोरिंग का रिकॉर्ड बनाया था. 12 महीने बाद वह इंटरनेशनल मास्टर बने.

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