विश्वनाथन की पसंद सही थी:सुशीला आनंद

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Image caption ये विश्वनाथन आनंद का पांचवा विश्व चैंपियनशिप खिताब है.

विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद की मां सुशीला आनंद का कहना हैं कि उन्हें इस बात की खुशी हैं कि उनके बेटे ने शतरंज को खेल के तौर पर चुना.

ये बात सुशीला आनंद ने बुधवार को बीबीसी से खास बात करते हुए कही. बुधवार को ही विश्वनाथन आनंद ने इसराइल के बोरिस गेलफैंड को टाईब्रेकर में हरा कर पांचवीं बार वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप पर कब्जा कर लिया है.

दिलचस्प बात तो ये है कि विश्वनाथन आनंद के पिता बिहार की ओर से क्रिकेट खेलते थे. जब पत्रकारों ने सुशीला आनंद से पूछा कि पहली बार विश्वनाथन आनंद ने शतरंज खेलने का फैसला किया तो आपको कोई एतराज नहीं हुआ.

इस सवाल के जवाब में सुशीला आनंद कहती हैं, "हर कोई सचिन तो नहीं हो सकता, आप सचिन से तुलना नहीं कर सकते. यदि आनंद कुछ अलग करना चाहता था तो ये अच्छा था कि उन्होने अलग रास्ता चुना."

सुशीला आनंद ने कहा कि इस बार विश्वनाथन के प्रतिद्वंद्वी बडे मजबूत थे और उन्हें हराना एक बड़ी चुनौती थी.

लोग अक्सर मानते हैं कि शतरंज दिमाग का खेल है लेकिन सुशीला आनंद ने कहा कि विश्वनाथन ने हर तरह से मेहनत की थी चाहे वो दिमागी व्यायाम हो या शारीरिक व्यायाम.

सुशीला आनंद कहती हैं कि विश्वनाथन को शतरंज खेलना पसंद था लेकिन उन्होने कभी ऐसा नहीं सोचा था कि एक दिन विश्वनाथन विश्व चैंपियन बनेगा.

विश्व चैंपियनशिप 2012

भारत के विश्वनाथन आनंद ने इसराइल के मॉस्को में हुई शतरंज की विश्व चैंपियनशिप में बुधवार को बेहद उतार चढ़ाव वाले मैच में बोरिस गेलफैंड को 2.5 और 1.5 के अंतर से हरा दिया था.

टाइब्रेकर का पहला मैच 33 चालों के बाद ड्रॉ पर छूटा जबकि दूसरे मैच में आनंद ने गेलफैंड को 77 चालों के बाद मात दे दी.

टाइब्रेकर के चार में से शेष दो गेम भी ड्रॉ पर छूटे और इसके साथ ही आनंद ने ये खिताब जीत लिया.

इससे पहले विश्वनाथन आनंद और बोरिस गेलफैंड के बीच पहले 10 मैच बराबरी पर छूटे थे जबकि दो मैचो में से दोनों ने एक-एक में जीत दर्ज की थी. लेकिन इसके बाद वापसी करते हुए गेलफैंड ने आनंद को अच्छी टक्कर दी.

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