महिलाओं से भेदभाव पर सानिया को समर्थन

Image caption सानिया मिर्ज़ा की बात का कई खिलाड़ियों ने समर्थन किया है

भारत के कई जाने-माने वर्तमान और पूर्व खिलाड़ियों ने महिला खिलाड़ियों से भेदभाव के मुद्दे पर टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्ज़ा की तरफदारी की है.

सानिया मिर्जा ने भारतीय टेनिस संघ को एक पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि भारतीय टेनिस में चल रहे विवाद के बीच उनके साथ एक महिला होने के नाते भेदभाव किया गया है.

टेनिस के जाने-माने कोच अख्तर अली का कहना है कि सानिया मिर्जा के साथ ऑल इंडिया टेनिस एसोसिएशन को बेहतर पेश आना चाहिए था.

साथ ही बैडमिंटन में डबल्स की खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा ने भी सानिया की भावनाओं को दोहराते हुए कहा कि उन्होंने भी खेल में लिंग के आधार पर भेदभाव वाले बर्ताव का सामना किया है.

लेकिन कुछ खिलाड़ियों का ये भी कहना है कि ओलंपिक से ठीक पहले इस तरह का विवाद छेड़ना ठीक नहीं है.

'नारीत्व का अपमान'

सानिया मिर्जा ने भारतीय टेनिस में चल रहे विवाद और उनसे हुए बर्ताव पर लिएंडर पेस, महेश भूपति और टेनिश फेडरेशन को जमकर लताड़ा.

ऑल इंडिया टेनिस एसोसिएशन ने कुछ दिन पहले घोषणा की थी कि मिक्स्ड डबल्स में सानिया के साथ लिएंडर खेलेंगे हालांकि सानिया और भूपति साथ-साथ खेलते आ रहे हैं.

सानिया का कहना था, "एक पुरुष टेनिस खिलाड़ी को खुश करने के लिए भारत की नंबर एक महिला टेनिस खिलाड़ी को बतौर मुआवजा पेश किया गया ताकि वो पुरुष खिलाड़ी पुरुष डबल्स में ऐसे प्लेयर के साथ खेलने के लिए राजी हो जाएँ जिसके साथ वो खेलना नहीं चाहते. इस तरह नारीत्व के अपमान की निंदा की जानी चाहिए, फिर चाहे ये काम देश की सर्वोच्च टेनिस एसोसिएशन का हो."

सानिया मिर्जा के बयान ने ये सवाल भी खड़ा किया है कि भारतीय खेल में लिंग भेद एक बड़ा मसला है.

भेदभाव

टेनिस कोच अख्तर अली का कहना है कि सानिया ने देश का नाम रौशन किया है और उनकी बात को सुनना चाहिए.

बीबीसी से बातचीत में अख्तर अली ने कहा,"हिंदुस्तान में वो सबसे बढ़िया महिला टेनिस खिलाड़ी रही हैं. साथ ही उन्होंने देश के लिए खेलने के लिए कभी भी मना नहीं किया. उनकी ये बात सही है कि उनसे भी तो बात करनी चाहिए थी. वो उस मुकाम पर हैं जहां वो सोच सकती हैं कि किसके साथ खेंलें तो मेडल जीत पाएंगी."

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Image caption ज्वाला गुट्टा का कहना है कि उन्होंने भी भेदभाव का सामना किया है.

वहीं बैडमिंटन खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा का कहना है कि खेल में लिंग के आधार पर भेदभाव आम बात है. गुट्टा का कहना है कि इस तरह की बातें उनके साथ बहुत हुई है और खेल संघ हमेशा खिलाड़ियों को नियंत्रण में रखना चाहती है.

उन्होंने कहा, "भेदभाव बहुत सालों से होते आ रहा है. उदाहरण दूं तो भारतीय बैडमिंटन टीम में दस लड़के होते हैं और 4-5 लड़कियां. इसी से पता चल जाता है कि कितना भेदभाव हो रहा है. हम एक पुरुष प्रधान समाज में जी रहे हैं और इन हालातों में ऐसा होगा ही."

गलत बयान

वहीं डोला बनर्जी का कहना था कि लदंन ओलंपिक के लिए समय बहुत कम बचा है ऐसा में किसी तरह के विवाद में फंसने से खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर खराब असर पडेगा.

उन्होंने कहा, "अभी 20-25 दिन ओलंपिक के लिए बाकी है. इस समय खिलाड़ी को सिर्फ टूर्नामेंट के बारे में सोचना चाहिए - कैसे तैयारी करनी है? छह-सात महीने पहले अगर जोड़ीदार पर बात होती तो समझ में आता, अभी तो इतना कम वक्त है ऐसे में इस तरह के विवाद में पड़ना मुझे समझ में नहीं आ रहा है."

वहीं एआइटीए ने एक बयान में सानिया के उठाए सवालों से बचते हुए कहा कि सानिया महान खिलाड़ी हैं.

एआइटीए के अनुसार, "हम सभी खिलाड़ियों से अपील करेंगे कि वो मतभेद भुलाकर देश के लिए मेडल लाने के लिए खेलें. हम अच्छे के लिए दुआ करेंगे. ये समय एक को दूसरे के साथ लड़ाने का नहीं है."

साथ ही चयनकर्ता एसपी मिश्रा ने ये भी सवाल उठाया कि अगर सानिया के पास इतने मुद्दे थे तो उन्होंने बयान देने कि लिए इतना समय क्यों लगाया और वाइल्डकार्ड मिलने का इंतजार क्यों किया.

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