विंबलडन डायरी : कपड़े, रंगीनियाँ और कमाई

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Image caption दूसरे खिलाड़ियों की तुलना में सानिया मिर्ज़ा कहीं परंपरावादी हैं

सानिया मिर्ज़ा की डबल्स पार्टनर बेथनी मैटेक सैंड्स की वेशभूषा और हेयर स्टाइल ऐसी है कि सबका ध्यान बरबस खिंच जाता है. औरों से अलग वह पूरी आस्तीन की टी-शर्ट पहनती हैं और घुटने तक के मोज़े भी.

उन्होंने अपने बाल हरे और बैंगनी रंगवा रखे हैं और उनकी दोनों आँखों के नीचे काले स्टिकर लगे हुए हैं.

उनकी तुलना में सानिया मिर्ज़ा कहीं परंपरावादी हैं. सिवाए एक चीज के - उन्होंने अपनी पलकों को हरा व बैंगनी रंगवा रखा है. गले में एक चेन पहन रखी है जिस पर अरबी में अल्लाह लिखा हुआ है.

मैटेक सानिया को थोड़ा और बोल्ड बनाने के लिए तैयार कर रही हैं लेकिन अभी तक उन्हें सफलता नहीं मिली है. बेथनी की दिली इच्छा है कि टेनिस जगत अपने अंपायरों की पोशाक में भी बदलाव करे.

लिएंडर के डबल्स पार्टनर रादेक स्टेपनाक नोवाक जोकोविच के खिलाफ जब अपने एकल मुकाबले में सेंटर कोर्ट में उतरे तो उन्होंने लाल और नीले रंग के जूते पहन रखे थे.

कोई रंगीनियाँ नहीं

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Image caption विंबल्डन में खिलाड़ी मैच के दौरान सिर्फ सफेद कपड़े या जूते पहन सकते हैं

विंबलडन में सख्त ड्रेस कोड का पालन किया जाता है जिसके तहत खिलाड़ी मैच के दौरान सिर्फ सफेद कपड़े या जूते पहन सकते हैं. इसलिए दर्शकों को ताज्जुब नहीं हुआ जब अंपायर मोहम्मद लाएमानी ने रादेक को निर्देश दिया कि वह अपने जूते बदल कर आएं.

इसी विंबलडन प्रतियोगिता की शुरुआत में अमरीकी खिलाड़ी जॉन इजनर से रंगीन रिस्ट बैंड हटाने के लिए कहा गया था. इटली के फ़ेबियो फ़ोनिनी का सिर में बाँधा गया स्कार्फ भी विंबल्डन के आयोजकों को रास नहीं आया था और उनसे कहा गया था कि वह इसे पीछे से एक इंच काट दें.

1991 में भी एक मजेदार घटना घटी थी. आंद्रे अगासी एक रंगीन ट्रैक सूट पहन कर विंबलडन कोर्ट पर उतरे थे. अभी अंपायर उन्हें टोकने जा ही रहे थे कि उन्होंने अपना ट्रैक सूट उतार दिया. उसके नीचे वह सफेद बुर्राक टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहने हुए थे.

2002 मे भी अभ्यास के दौरान अन्ना कुर्नीकोवा सफेद के स्थान पर काली शॉर्ट्स पहन कर आई थीं. अंपायर ने उन्हें तुरंत अपना शॉर्ट्स बदलने का आदेश दिया था.

आसान कमाई?

विंबलडन में पहला मैच हारा इटली के तीस वर्षीय पोतीतो स्टारेस ने. 59 मिनट और 10 गेम खेलने के बाद वह रयान स्वीटिंग के खिलाफ रिटायर हर्ट हो गए.

कोर्ट पर 59 मिनट खेलने के लिए विंबलडन ने उन्हें 14,500 पाउंड दिए. एक घंटे में 14,500 पाउंड कमाना वह भी बिना जीते हुए कोई बुरा सौदा नहीं है. ऐसे कई एटीपी टूर्नामेट हैं जहाँ विजेता को भी इतना पुरस्कार नहीं मिलता.

बाज की चोरी

भारत में जिस तरह बंदरों को भगाने के लिए लंगूर का सहारा लिया जाता है, विंबल्डन में कबूतरों को दूर रोकने के लिए रफूज नाम के एक बाज की सेवाएं ली गई है. लेकिन इससे पहले कि वह अपना काम शुरू कर पाता उसे पिंजड़े समेत चुरा लिया गया.

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