आखिरी अंक तक जी-जान से खेलूंगा: मरे

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Image caption एंडी मरे अपना पहला विंबलडन फाइनल खेलने जा रहे हैं. वे दो ऑस्ट्रेलियाई ओपन और एक यूएस ओपन फाइनल खेल चुके हैं.

ये जानकर की मैं विंबलडन के फाइनल में पहुंच गया हूं मेरा मन कई तरह के भावों से सराबोर हो जाता है लेकिन अगर मैं खिताब नहीं जीत पाया तो ये सब बेमानी होगा.

मैं सिर्फ एक ही काम कर सकता हूं – फेडरर को साथ मैच पर फोकस. उन्हें मैंने पहले भी हराया है और अब भी हरा सकता हूं.

मेरे कोच इवान लेंडल और अभ्यास के साथ डानी वॉलवेर्दू फेडरर के पिछले पंद्रह दिनों के मैचों का अध्ययन करेंगे. साथ ही हम आपस में हुए पहले के मैचों को को भी देखेंगे और फिर रणनीति के बारे में चर्चा करेंगे.

मैं अपने पुराने मैच नहीं देखना चाहता क्योंकि टेनिस बहुत तेज़ी से बदलती है और आपको भविष्य की ओर देखना चाहिए लेकिन मैं ये देखूंगा कि मैंने पहले के मैचों में फेडरर के खिलाफ क्या कुछ अच्छा किया है.

अनुभव

फेडरर शायद महानतम खिलाड़ी हैं. ऐसे लोग बहुत कम हैं...शायद रोजर और पीट साम्प्रास. रविवार को एक बड़ी चुनौती से सामना होगा, जिसके प्रति उत्साहित हूं.

हालांकि विंबलडन में मेरा ये पहला फाइनल है लेकिन मैं साल 2008 में यूएस ओपन और साल 2010 और 2011 में ऑस्ट्रेलियाई ओपन के फाइनल में खेल चुका हूं. इसलिए मुझे मालूम है माहौल कैसा रहेगा.

तनाव तो होगा लेकिन मैं इसे सकारात्मकता में बदलना जानता हूं.

इससे पहले खेले गए ग्रैंड स्लैम फाइनलों में पिछले साल मेलबर्न में नोवाक जोकोविच से हारना बहुत ही दर्दनाक अनुभव था. वही मैच मुझे रविवार को ट्रॉफ़ी उठाने के लिए उत्साहित कर रहा है.

मैं दस साल पहले प्रोफेशनल टेनिस खिलाड़ी बनने का सपना लेकर स्पेन चला गया था. तब से ऐसे ही मौके के लिए में हर दिन मशक्कत करता रहा हूं.

मैं पंद्रह साल की उम्र से अपने परिवार से दूर, और पराए देश में रहकर ट्रेनिंग करता रहा हूं. जहां मैं आज पहुंचा हूं इसके ऐसा करना ज़रुरी था. ये आसान सफर नहीं रहा है और शुक्रवार को जो-विलफ्रेड सोंगा को सेमी-फाइनल में हराकर में काफी भावुक हो उठा था.

अवसर

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Image caption एंडी मरे पंद्रह साल की उम्र से पर स्पेन में रहकर टेनिस का प्रशिक्षण ले रहे हैं.

मैच के बाद होने वाले इंटरव्यू से पहले में बाथरुम में गया, अपने चेहरे पर पानी फेंका और थोड़ी देर बैठा रहा.

उसके बाद तुरंत मेरा ध्यान फाइनल की ओर पलट गया.

जब आप टूर्नामेंट में इतना आगे तक पहुंच जाते हैं तो आप भटक भी सकते हैं लेकिन मैंने जितना संभव हो सबकुछ साधारण रखने का प्रयास किया है. अभ्यास, व्यायाम, अपनी टीम के साथ गप्पबाज़ी और अपने कुत्ते के साथ घूमना-फिरना.

आखिरकार ये इंतज़ार खत्म हो ही जाएगा. मैं इस बात की गांरटी दे सकता दूं कि जी-जान खेलूंगा. मुझे पहले अंक से आखिरी तक अपना सारा दम लगाना होगा.

रोजर ने विंबलडन में अपना पहला खिताब साल 2003 में जीता था. उन साल मैंने जूनियर टूर्नामेंट में हिस्सा लिया था. तब मैंने सोचा था कि एक दिन मैं भी यहां खिताब जीतूंगा.

और अब मेरे पास ऐसा करने का अवसर है.

एंडी मरे से डेविड ऑर्नस्टीन की बातचीत पर आधारित.

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