एक अरब की आबादी में कितने पदक की आस !

अजय माकन
Image caption अजय माकन का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में एथलीटों का क्वालिफाई करना गर्व की बात है

भारत की आबादी एक अरब से भी ज्यादा है लेकिन खेल मंत्री अभी पदक के बारे में कुछ नहीं कहना चाहते. उनका कहना है कि वे खिलाड़ियों पर दबाव नहीं बनाना चाहते.

ओलंपिक खेलों के लिए भारत की तैयारी पर खेल मंत्री अजय माकन ने बीबीसी हिंदी के सवालों के जवाब दिए.

पदक की उम्मीद पर उन्होंने कहा, “पदक के बारे में कुछ नहीं कह सकते, लेकिन अगर खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दें और किस्मत उनका साथ दे, तो कोई भी खिलाड़ी पदक जीत सकता है. इसलिए पदक के बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है. ये लोग क्वालिफाई कर गए, ये भी बड़ी बात है. ओलंपिक में क्वालिफाई करना ही किसी भी खिलाड़ी और देश के लिए बड़े गर्व की बात होती है.”

तैयारियों के बारे में उन्होंने कहा कि ये खास तैयारी का ही नतीजा है कि 81 एथलीटों ने क्वालिफाइ किया है.

खेल मंत्री ने कहा, “ मैं तैयारियों से काफी संतुष्ट हूँ. सबसे अच्छी बात है कि भारत के 81 एथलीट लंदन ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किए हैं. ये संख्या ओलंपिक खेलों में भारत की ओर से सबसे ज्यादा है. 2008 में सिर्फ 56 एथलीटों ने क्वालिफाई किया था. इसलिए आप ये कह सकते हैं कि अच्छी तैयारी का ही ये नतीजा है.”

वैसे भारत ने ओलंपिक की तैयारी के लिए पिछले साल ओपेक्स लंदन लाँच किया था.

तैयारी

इसमें 732 संभावित खिलाड़ियों को चुना गया था. उनके साथ 121 कोच थे और 29 विदेशी कोच भी थे. इसके अलावा 65 सपोर्ट स्टाफ भी शामिल किए गए थे.

अजय माकन ने बताया, “हमने इसके लिए 260 करोड़ रुपए की धनराशि मुहैया कराई थी, जिनमें से 148 करोड़ रुपए खर्च भी हो चुके हैं और बाकी के पैसे भी लगाए जा रहे हैं. ये पहला मौका है कि ओलंपिक के लिए इतने पैसे लगाए जा रहे हैं. मुझे नहीं लगता कि 2008 के बीजिंग ओलंपिक में इसका 10 प्रतिशत भी खर्च हुआ था.”

उन्होंने कहा कि 2008 के बीजिंग ओलंपिक से लेकर अभी तक भारत ने खेलों में अभी तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है. वो चाहे कॉमनवेल्थ गेम्स हों या फिर एशियाई खेल.

खेल मंत्री ललित माकन ने कहा, “बीजिंग ओलंपिक में भी भारत ने ओलंपिक खेलों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था. 2008 से लेकर 2012 तक के दौर में भारत ने कई खेलों में सबसे ज्यादा पदक हासिल किए. इस लिहाज से ये भारतीय खेल का सुनहरा दौर रहा है.”

हॉकी टीम की समस्या के बारे में उन्होंने कहा कि ये कोई समस्या नहीं है. क्योंकि एक ऐसा समय था जब देश में एस्ट्रो टर्फ या सिंथेटिक्स टर्फ सिर्फ तीन या चार थे. जबकि इस समय ये 100 के करीब है.

उन्होंने कहा, “ये सच है कि देश में इस समय ब्लू टर्फ नहीं हैं, लेकिन हमने खिलाड़ियों को लंदन में, स्पेन में, दक्षिण अफ्रीका में और मलेशिया में ब्लू टर्फ पर खेलने के लिए भेजा. इस पर बहुत सारा खर्च हुआ है, जिसे खेल मंत्रालय ने वहन किया है. हमने खिलाड़ियों को मौका दिया कि भारत में खेलने की बजाए वे दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों के साथ ब्लू टर्फ पर खेलें. मैं ये नहीं कहता कि हम सीधे पदक तालिका में पहुँच जाएँगे, लेकिन हमारा लक्ष्य पहले छह में जगह बनाने की है.”

'अजीब बात नहीं है'

ओलंपिक परेड में देश का झंडा लेकर कौन चलेगा, इस पर अभी फैसला नहीं हुआ है. लेकिन खेल मंत्री का कहना है कि ये कोई अजीब बात नहीं है. ये फैसला तो एक दिन पहले भी हो सकता है. भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन ये फैसला करता है.

उन्होंने कहा कि कई बार खिलाड़ियों का ख्याल रखते हुए ये फैसला करना होता है. मसलन अगर दूसरे दिन अभिनव बिंद्रा या फिर लिएंडर पेस जैसे खिलाड़ी का मैच हो तो एसोसिएशन इसका भी ध्यान रखते हुए फैसला करता है.

बॉक्सिंग में भारत की तैयारी और इस क्षेत्र में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर खेल मंत्री ने कहा कि उन्हें काफी सुविधाएँ दी गई हैं और विदेशी कोच भी उपलब्ध कराए गए हैं.

सानिया की माँ को टेनिस टीम का मैनेजर बनाए जाने पर अजय माकन ने कहा कि ये फैसला ऑल इंडिया टेनिस एसोसिएशन करता है न कि खेल मंत्रालय. इसलिए वे इस मामले पर कुछ नहीं कह सकते.

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