पहली बार ओलंपिक में जाएंगी सऊदी महिला खिलाड़ी

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Image caption साउदी अरब की ओर से साराह अत्तर आठ सौ मीटर की दौड़ में हिस्सा लेंगी

अतंरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने कहा है लंदन ओलंपिक 2012 में हिस्सा लेने के लिए साउदी अरब दो महिला एथलीट को भेज रहा है.

ये पहला मौका है जब सऊदी महिलाएं ओलंपिक में हिस्सा लेंने जा रही हैं.ये महिलाएं जूडो और एथलेटिक्स स्पर्धाओं में हिस्सा लेंगी.

साराह अत्तर आठ सौ मीटर की दौड़ में हिस्सा लेंगी और वोदिजान अली सेराज अब्दुलरहीम शहरखानी जूडो प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लेंगी.

साउदी अरब के अधिकारियों ने पिछले महीने ही महिलाओं के खेलों में हिस्सा लेने पर लगे प्रतिबंध को हटा लिया था.

अमरीका में प्रशिक्षण ले रही साउदी खिलाडी साराह अत्तर ने कहा," ये बड़े सम्मान की बात है और मुझे उम्मीद है कि इससे महिलाओं को खेल में शामिल होने का रास्ता खुलेगा."

सऊदी अरब ने अब तक सिर्फ अपने पुरूष खिलाड़ियों को ही ओलंपिक खेलों में भेजा है. इसीलिए अंतरराष्ट्रीय ओलपिक समिति और मानवाधिकार समूहों की तरफ से उस पर महिला खिलाड़ियों की अनदेखी को रोकने का भारी दबाव था.

अब तक महिलाओं को ओलंपिक में न भेजने वालों दो अन्य मुस्लिम देशों कतर और ब्रुनेई ने भी कहा है कि कि वो लंदन ओलंपिक में अपनी महिला खिलाड़ियों को भेजेंगे.

बहिया अल-हमद ओलंपिक के उद्घाटन समारोह में ध्वज के साथ कतर का प्रतिनिधित्व करेंगी. बहिया अल-हमद का कहना है कि ये एक ऐतिहासिक मौका होगा.

फैसले का स्वागत

ओलंपिक समिति के अध्यक्ष जैक्स रॉग ने एक बयान में कहा कि ये एक बेहद सकारात्मक और हौसला बढ़ाने वाली खबर है.

उन्होंने कहा," मुझे ये देखकर बेहद अच्छा लगा कि हमारी लगातार बातचीत का असर दिखाई दिया."

लंदन में कुल 10,500 खिलाड़ी हिस्सा लेंगे जो 200 से ज्यादा राष्ट्रीय ओलंपिक समितियों का प्रतिनिधित्व करते हैं.

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति महीनों से सऊदी अरब को ओलंपिक में अपनी सऊदी खिलाड़ियों को राजी करने में जुटा था.

मानवाधिकार संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है.

न्यूयॉर्क स्थित मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच की मिंकी वॉर्डन का कहना है कि ये अच्छा फैसला है जिससे महिलाओं के लिए अपने अधिकार पाने की गुंजाइश पैदा होगी और कट्टरपंथी सऊदी अधिकारियों के लिए इसे वापस ले पाना मुश्किल होगा.

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