जब एक खिलाड़ी ने तीर से जलाई ओलंपिक मशाल..

Image caption लंदन ओलंपिक में 128 तीरंदाज हिस्सा ले रहे हैं

तीरंदाजी को ओलंपिक खेलों में पहली बार वर्ष 1900 में जगह मिली, लेकिन इसके बाद ये खेल ओलंपिक से नदारद रहा और वर्ष 1972 में इसकी वापसी हुई.

वर्ष 1988 में तीरंदाजी ने टीम-स्पर्धा की शक्ल ले ली. दक्षिण कोरिया के तीरंदाज ओलंपिक में छाए रहे जिन्होंने बीते सात ओलंपिक खेलों में पदक अपने नाम किए.

ओलंपिक में शामिल अन्य खेलों से उलट इसमें महिलाओं की भागीदारी शुरू से ही रही और मौजूदा दौर में दक्षिण कोरिया की तीरंदाज टीम लगभग अजेय है.

तीरंदाजी के निहित कौशल पर सारी दुनिया का ध्यान तब गया जब वर्ष 1992 के बार्सिलोना ओलंपिक में पैरालिम्पिक तीरंदाज एंटोनियो रिबेलो ने सुलगते तीर से ओलंपिक मशाल को रौशन किया.

लंदन ओलंपिक में 128 तीरंदाज हिस्सा ले रहे हैं.

निशानेबाजी की तरह तीरंदाजी में भी संतुलन और अनुशासन का बड़ा महत्व है. इसमें 70 मीटर की दूरी से निशाना लगाया जाता है.

दुनिया के बेहतरीन तीरंदाजों में दक्षिण कोरिया के इम डोंग ह्यून को याद किया जाता है जिनकी एक आंख खराब है, फिर भी उन्होंने टीम स्पर्धा में वर्ष 2004 और वर्ष 2008 के ओलंपिक में अपने देश को स्वर्ण पदक दिलाया था.

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