भारोत्तोलन: ताक़त और तकनीक की असल परीक्षा

 मंगलवार, 24 जुलाई, 2012 को 06:48 IST तक के समाचार

डोपिंग मामलों की वजह से इस खेल पर बुरा असर पड़ा है

भारोत्तोलन, ताक़त और तकनीक की असल परीक्षा होती है. चोटी के भारोत्तोलक अपने वज़न से तीन गुना ज़्यादा तक भार उठा लेते हैं.

इसके लिए उन्हें अच्छी सेहत के साथ ही मानसिक तौर पर भी मज़बूत होने की ज़रूरत होती है.

भारोत्तोलक दो तरह की तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं.

पहली तकनीक स्नेच, जिसमें भार को सिर के ऊपर तक उठाना होता है. दूसरी तकनीक क्लीन एंड जर्क कहलाती है जिसमें भार को दो चरणों में उठाना होता है.

सफलतापूर्वक भार उठाने के लिए भारोत्तोलक के हाथ सिर के ऊपर तक जाना और शरीर का सीधा रहना जरूरी होता है.

हर भारोत्तोलक को भार उठाने के लिए तीन अवसर मिलते हैं.

डोपिंग मामलों की वजह से इस खेल पर बुरा असर पड़ा है.

बीजिंग ओलंपिक में बुल्गारिया की पूरी टीम को मुक़ाबलों से हटा दिया गया था क्योंकि उसे प्रतिबंधित दवा लेने का दोषी पाया गया था.

भारोत्तोलकों की दुनिया में सबसे महान नाम बुल्गेरिया में जन्में तुर्की में नैम सुलेमानोग्लू का है जिन्हें अपने करियर में 46 विश्व-रिकॉर्ड तोड़े.

वर्ष 2008 के बीजिंग ओलंपिक में चीन की चेंग येंक्विन भारोत्तोलन में दोबारा स्वर्ण पदक जीतने में कामयाब हुई थीं. उन्होंने इससे पहले एथेंस ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता था.

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