1500 मीटर की दौड़: दमखम और युक्ति का खेल

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Image caption महिलाओं के लिए ये स्पर्धा वर्ष 1972 में म्यूनिख ओलंपिक से हुई

ओलंपिक में 1500 मीटर की दौड़ दर्शकों को हमेशा से लुभाती रही है और 800 मीटर दौड़ की तरह इसमें दमखम के साथ ही युक्ति और तकनीक की बड़ी जरूरत होती है.

ओलंपिक खेलों में 1500 मीटर की दौड़ वर्ष 1896 से ही लगातार हो रही है. इसे 400 मीटर के ट्रैक पर ही दौड़ा जाता है.

हाल के वर्षों में 1500 मीटर की दौड़ में उत्तर अफ्रीकी और केन्या के धावकों का बोलबाला रहा है.

अल्जीरिया के मोरसेली ने वर्ष 1990 के शुरुआती दशक में 1500 मीटर दौड़ में अपना वर्चस्व स्थापित किया था.

इसके बाद मोरक्को के अल गुरोज छा गए जिन्होंने वर्ष 2004 के एथेंस ओलंपिक में 1500 मीटर और 5000 मीटर की दौड़ जीती थी.

खिताब

पूर्व सोवियत संघ की धाविका तात्याना कजानकिना ऐसी पहली महिला हैं जिन्होंने वर्ष 1976 के मॉन्ट्रियल ओलंपिक में 800 मीटर और 1500 मीटर दोनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीता था.

इसके बाद वर्ष 1980 में मॉस्को ओलंपिक में भी उन्होंने 1500 मीटर में खिताब अपने नाम किया था.

पुरुषों की 1500 मीटर दौड़ भले ही वर्ष 1896 से हो रही है, लेकिन महिलाओं के लिए ये स्पर्धा वर्ष 1972 में म्यूनिख ओलंपिक से हुई थी जहां ल्यूडमिला ब्रेगिना ने पहला स्वर्ण पदक जीता था.

दक्षिण अफ्रीका की केस्टर सेमेन्या को अपने लिंग संबंधी जांच-पड़ताल का सामना करना पड़ा. उनका कहना है कि वे लंदन ओलंपिक में भी हिस्सा लेना चाहती हैं. वे विश्व-चैम्पियनशिप में 800 मीटर की दौड़ में खिताब जीत चुकी हैं.

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