ओलंपिक व रमजान के बीच फंसे खिलाड़ी

 बुधवार, 18 जुलाई, 2012 को 21:09 IST तक के समाचार
ओलंपिक

इस बार रमजान ओलंपिक के दौरान आया है, 44 सालों में एक बार ओलंपिक में ऐसा होने की संभावना रहती है.

यह इत्तफाक ही है कि मुसलमानों का पवित्र महीना रमजान ओलंपिक के दौरान आया है. 44 सालों में एक बार ओलंपिक में ऐसा होने की संभावना रहती है.

हर अभ्यास सत्र के दौरान खिलाड़ियों की लगभग छह हजार के करीब कैलरी जाया होती है. ऐसे में मुसलमान खिलाड़ी ओलंपिक के दौरान रोजे रखने को लेकर उहापोह की स्थिति में हैं. हालांकि कई ने इसे लेकर फैसला भी कर लिया है.

इनमें ब्रितानी नौकायन टीम के सदस्य मोहम्मद स्बीही भी हैं. स्बीही इस्लाम के नियमों का पालन करने वाले पहले ब्रितानी नाविक हैं.

मोहम्मद स्बीही ने बीबीसी से कहा, “रोजे न रखने का मेरा व्यक्तिगत फैसला है. मैंने खुद और अपने परिवार के बीच फैसला किया है. पिछले साल भी मैंने रोजे नहीं रखे थे ताकि ओलंपिक के लिए मैं खुद को तैयार कर सकूं. यह ओलंपिक है. ओलंपिक का मतलब कड़ी ट्रेनिंग होता है. मैंने इसके लिए काफी मेहनत की है. मेरे कोचों ने भी यही सलाह दी है. अगर किसी कारण से मेरा इस ओलंपिक में चांस खराब होता है तो यह मेरे लिए शर्मनाक होगा.”

खिलाड़ियों की दुविधा

"रोजा रखने या न रखने का फैसला खिलाड़ियों पर निर्भर करता है. हम इसमें पड़ना नहीं चाहते. हालांकि इसके लिए हम अपने अभ्यास का समय भी नहीं बदलेंगे"

सऊदी अरब पैरालंपिक टीम के कोच सामी जेरेली

मोहम्मद स्बीही जैसी दुविधा बाकी टीमों के खिलाड़ियों के साथ भी है. सउदी अरब की टीम इसका एक और उदहारण है.

सउदी अरब पैरालंपिक टीम के कोच सामी जेरेली ने कहा, “रोजा रखने या न रखने का फैसला खिलाड़ियों पर निर्भर करता है. हम इसमें पड़ना नहीं चाहते. हालांकि इसके लिए हम अपने अभ्यास का समय भी नहीं बदलेंगे.”

फलस्तीनी जूडो टीम के सदस्य मेहर अबु इस्लामी की समस्या खुद इस्लाम के जानकारों ने ही दूर की.

मेहर अबु इस्लामी ने बताया, “मुझे विद्घानों ने सलाह दी कि मैं खुद का नहीं देश का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं. इसलिए रोजे रखना जरूरी नहीं है. यकीनन घर लौटने के बाद मैं इसकी भरपाई करूंगा.”

इंटरनेशनल ओलंपिक समिति का कहना है कि इस बार के खेल खत्म होने के बाद वह यह सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में मुसलमान खिलाड़ियों को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े.

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