बॉक्सिंग को और चमकाएँगे विजेंदर

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Image caption बॉक्सर विजेंदर सिंह का मानना है कि भारतीय टीम के लिए लंदन काफी लकी साबित होने वाला है.

बीजिंग ओलंपिक 2008 में कांस्य पदक गले में आया तो कुछ दिन बाद मु्क्केबाज विजेंदर सिंह के घर के बाहर चमचमाती कार थी.

मॉडलिंग के ऑफर मिलने लगे. इतने कि एक बार गुडगांव में विज्ञापन की शूटिंग बीच में ही छोड़ कर भागना पड़ा. अब पंजाबी फिल्म का आफर भी है.

लंदन ओलंपिक में 57 किलोग्राम भार वर्ग में विजेंदर के स्वर्ण पदक के बाद हो सकता है कि बॉक्सिंग को और चमक और फिल्मी दुनिया को नया हीरो मिले.

बीबीसी से बातचीत में विजेंदर ने कहा, “आपको पता है कि 2008 से पहले बॉक्सरों के पास गाड़ी नहीं होती थी. आज आप हमारे कैंपों में जाकर देखिए. महंगी गाडि़यों की लाइन नजर आएगी. बॉक्सिंग में अब काफा पैसा आ गया है. खासकर हरियाणा और पंजाब के बॉक्सर के पास अच्छी गाड़ियां हैं.”

लंदन लकी होगा

जाहिर है कि लंदन ओलंपिक में विजेंदर या किसी अन्य बॉक्सर का मेडल इस खेल को और चमकाने वाला है. वैसे विजेंदर को लंदन में रहने वाले भारतीयों खासकर पंजाबियों से पूरा समर्थन मिलने की उम्मीद है.

विजेंदर ने कहा, “लंदन बेहद सुंदर शहर है. मैंने कई टूर्नामेंट में हिस्सा भी लिया है. बैटन रिले में भी मैं गया था. अच्छी बात यह है कि लंदन में भारी संख्या में भारतीय रहते हैं. खासकर साउथाल में. वैसे भी सड़कों पर कहीं भी भारतीय मिल जाते है. मेरा मानना है कि भारतीय टीम के लिए लंदन काफी लकी साबित होने वाला है.”

लंदन ओलंपिक की तैयारियों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि यह काफी बेहतर हुई है. कैंप में आखिरी दौर में पूरी टीम ने उन गलतियों पर काम किया गया जो वर्ल्ड चैम्पियनशिप में हुईं थी.

'टर्निंग प्वाइंट'

विजेंदर ने कहा, “बीजिंग का कांस्य पदक मेरी जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट था. लंदन में उस प्रदर्शन को फिर से दोहराना चाहूंगा क्योंकि मैं कभी संतुष्ट नहीं होता. क्योंकि मैं पहले ही कई मेडल जीत चुका था. मेरे पास अच्छी नौकरी है. मेरा मानना है कि कभी संतुष्ट नहीं होना चाहिए.”

ओलंपिक में अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “यह सब ड्रॉ पर निर्भर करता है. यह ओलंपिक है और इसमें सबसे बेहतरीन बॉक्सर आते हैं. सभी अपने आप में शहंशाह होते हैं. ऐसे में किसी को भी कम आंकना सही नहीं होगा. ”

परिणाम जो भी रहे लेकिन इतना जरूर है कि इस ओलंपिक में भी हॉलीवुड के हीरो सिल्वेस्टर स्टेलॉन विजेंदर को प्रेरित करेंगे.

विजेंदर बताते हैं, “नहीं, मेरा स्टाइल रॉकी की तरह नहीं है. लेकिन स्टेलॉन की वह पूरी सिरीज काफी प्रेरणा देने वाली है क्योंकि यह फिल्म देखने के बाद लगता है कि अगर वह सभी दिक्कतों से पार पा जीत सकते हैं तो मैं क्यों नहीं. वह काफी प्रेरित करने वाले कलाकार हैं. मैं सभी से कहना चाहूंगा कि वो रॉकी सिरीज की सारी फिल्में देखें.”

भिवानी का अनुभव

विजेंदर भिवानी से हैं और वहां के साई सेंटर बॉक्सिंग क्लबों ने कई और बॉक्सर दिए हैं. असल में विजेंदर ने भिवानी की बॉक्सिंग परंपरा को आगे बढ़ाया है.

विजेंदर ने कहा, “भिवानी में किसी दूसरे खेल का क्रेज नहीं है. भिवानी ने हवा सिंह, मेहताब सिंह जैसे बॉक्सर दिए हैं. मैंने भी वही पर बॉक्सिंग शुरू की. मैंने काफी मार खाई है. काफी चोटे भी लगी हैं. ”

विजेंदर को काफी चोटे लग चुकी हैं. लेकिन वह अपनी आंख के पास लगी चोट को कभी नहीं भूलते. साथ ही उस चोट का इलाज करने वाली नर्स को भी.

विजेंदर ने बताया, “मुझे तीन टांके लगे थे. नर्स ने मुझे कोई इंजेक्शन लगाए बिना टांके लगा दिए थे. मेरी मम्मी ने उस नर्स के साथ झगड़ा भी किया था. मुझे काफी दर्द हुआ था. इस कारण में उस चोट को कभी नहीं भूला.”

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