बॉक्सर शिव की नींद में ओलंपिक के सपने

18 साल के शिव थापा ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने वाले सबसे युवा मुक्केबाज़ हैं. शिव को अभी से ही ओलंपिक में जीत के सपने आने लगे हैं. शिव ने बताया कि उनकी तैयारी काफी अच्छी है.

असम के बॉक्सर शिव ने बीबीसी को बताया, “मुझे ओलंपिक के कई सपने आ रहे हैं. ऐसे भी कि मैं चैंपियन बन गया हूं. शायद इसलिए कि मैंने पूरी जिंदगी इस मौके के बारे में सोचा है. जाहिर है कि जिस चीज को आप हासिल करना चाहते हैं, उसके सपने आना लाजिमी है.”

जाहिर है कि एशियन ओलंपिक क्वालिफायर में 56 किलोग्राम भार वर्ग का स्वर्ण पदक जीत कर लंदन का टिकट हासिल करने वाले शिव की फाइट का इंतजार खेल प्रेमियों को रहेगा.

बड़ा मौका

शिव भी खुद के लिए इसे जिंदगी का सबसे बड़ा मौका मान रहे है. हालांकि उन्होंने कहा कि ओलंपिक में क्वालिफाई करना ही उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है.

उनके खेल के बारे में पूछे जाने पर शिव ने कहा, “मैं जिस्मानी ताकत से ज्यादा माइंडगेम में विश्वास रखता हूं. क्योंकि दिमाग ही ऐसी चीज है जो आपको हर पल ताकत देती है. बॉक्सिंग रिंग में यह चीज काफी अहम होती है. रिंग की सिचुएशन को समझना आना चाहिए. क्योंकि कभी आप स्कोर में पीछे होते हैं. ऐसे में आपको खुद पर काबू रखना पड़ता है.”

टाइसन हीरो

छोटी उम्र में किक बॉक्सिंग और फुटबाल भी खेल चुके हैं. लेकिन माइक टाइसन को देख कर शिव बॉक्सिंग में आए.

अपने हीरो के बारे में शिव ने कहा, “मैंने पहली बार माइक टाइसन और लेनॉक्स लुइस की फाइट टीवी पर देखी थी. उस जबरदस्त मुकाबले ने मुझे बॉक्सिंग के लिए प्रेरित किया. खासकर टाइसन ने मुझे काफी प्रभावित किया. वही मेरे हीरो हैं.”

सात साल की उम्र में बॉक्सिंग शुरू करने वाले शिव ने कहा, “वह मेरी जिंदगी का यादगार दिन था. क्योंकि एशियन क्वालिफायर मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा मुकाबला था. यह मेरा बड़ा टारगेट भी था क्योंकि वह आखिरी क्वालिफायर बचा था. उस टूर्नामेंट का सेमीफाइनल जीत कर ही मैं क्वालिफाई कर सकता था. ”

रणनीति

शिव ने कहा, “ओलंपिक जैसी बड़ी स्पर्धा में हर मुकाबला बिलकुल अलग होता है. हर बॉक्सर को अपनी रणनीति तैयार करनी पड़ती है. छोटे कद वाले बॉक्सर के लिए अलग खेलना पड़ता है और लंबे बॉक्सर से सामने अलग तरह से. ओलंपिक में हर खिलाड़ी तैयारी के साथ आता है. ऐसे में सभी को अपना श्रेष्ठ देना पड़ता है.”

शिव ने बताया कि भगवान में उनकी आस्था काफी मजबूत है. वह भगवान से काफी डरते हैं. लेकिन घर को लेकर वह थोडे़ कमजोर भी हैं.

घर का दर्द

उन्होंने बताया, “मैं काफी लंबे समय से घर से बाहर हूं. शुरू में कई बार घर की याद आने पर मैं रो भी पड़ता था. कई बार मैंने रोते हुए अपनी मां से बात भी की है. मेरे माता-पिता ने मुझे काफी समझाया. उन्हें भी काफी दुख होता था. खासकर मेरे पिता ने मेरा करियर बनाने में बड़ी मेहनत की है.”

शिव ने कहा कि विजेंदर सिंह के ओलंपिक पदक के बाद बॉक्सिंग में हालात काफी बदले हैं. विजेंदर का वह पदक भारतीय बॉक्सिंग का चेहरा बन गया है. वह रोल मॉडल हैं. अब यह इस खेल को काफी गंभीरता से लिया जा रहा है. पहले यह खेल इतना लोकप्रिय नहीं था. लोग इस खेल में आने से डरते थे.

शिव ने कहा, “मैं हमेशा ही बॉक्सर बनना चाहता था. इसके लिए मैंने कई बार अपनी पढ़ाई भी छोड़ी. कई बार स्कूल में भी सभी मुझे बॉक्सिग के कारण ही जानते थे. सभी कहते थे कि शिव हमारा दोस्त है. कभी ऐसा नहीं हुआ कि मैने किसी को घूंसा मारा हो.”

शिव खुश हैं कि मीडिया और बाकी लोग उनके नाम के आगे युवा सनसनी की संज्ञा का इस्तेमाल कर रहे हैं.

शिव ने कहा, “मेरे नाम के आगे टीन एज सेंसेशन सुन कर काफी अच्छा लगता है. लेकिन मैं चाहता हूं कि मुझसे भी अच्छे और युवा बॉक्सर क्वालिफाई करें.”

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