ओलंपिक: एथलीट्स ही नहीं जेबकतरे भी तैयार

Image caption बार्सिलोना में तीन रुमानियाई जेबकतरों के साथ बीबीसी संवाददाता क्रिस रोजर्स

लंदन की पुलिस स्कॉटलैंड यार्ड का कहना है कि उन्हें खुफ़िया जानकारी मिली है कि दक्षिण अमरीका और पूर्वी यूरोप के संगठित गिरोहों की ओलंपिक के दौरान शहर में आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने की योजना है.

हाल ही में पुलिस ने सुबह के समय पूर्वी लंदन के एक इलाके में छापा मारकर रोमानिया और लिथुआनिया के एक संदिग्ध जेबकतरे गिरोह को पकड़ा.

स्कॉटलैंड यार्ड का कहना है कि इस तरह के गिरोह ओलंपिक खेलों के दौरान खतरा हैं.

पूर्वी लंदन में इस छापे में हिस्सा लेने वाले अधिकारी मार्क टियोडोरिनी कहते हैं, "इस तरह के छापे, शहर में पर्यटकों के आने से पहले, इन जेबकतरों को पकड़ने के लिए किए जा रहे हैं."

'लंदन ओलंपिक की तैयारी'

वहीं लगभग 900 मील दूर बार्सिलोना शहर के एक इंटरनेट कैफ़े में ऐसा ही एक गिरोह ओलंपिक के लिए तैयारी कर रहा है.

जॉनी, मारियो और डैनी उन 50 रोमानियाई जेबकतरों में से हैं जो स्पेन के इस शहर में जेबें काटते हैं.

इन तीनों का कहना है कि अब उनका लक्ष्य लंदन ओलंपिक है और इसके लिए वे इंटरनेट पर ओलंपिक खेलगांव के आस-पास के बाज़ार, ट्यूब और बस स्टेशनों की तस्वीरों का अध्ययन कर रहे हैं.

यहां तक कि पूर्वी लंदन की सैटेलाइट तस्वीरों की मदद से वे भागने के रास्ते भी तय कर रहे हैं.

इन तीनों से मेरा परिचय इस इंटरनेट कैफ़े के मालिक ने कराया और इन्हें बात करने के लिए राज़ी करने में मुझे ज़्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी. बल्कि उन्हें तो अपने "काम" पर नाज़ है और वे कहते हैं कि उन्हें ये काम उनके मां-बाप ने सिखाया.

'ध्यान बंटाओ और जेब काटो'

जॉनी मुझे ताश के पत्तों से एक जादू का खेल दिखाते हैं. वे कहते हैं, "पर्यटकों का ध्यान बंटाने के लिए मैं जादू करता हूं और बस उनका बटुआ या फोन ग़ायब! इसमें बस एक सेकंड लगता है और उनकी छुट्टी बर्बाद हो जाती है."

ये तीनों मुझे बताते हैं कि हिरासत और गिरफ़्तारी से बचने के लिए वे कुछ नियमों का पालन करते हैं- काम पर ध्यान केंद्रित करने के लिए शराब नहीं पीना और लोगों की नज़रों में न आने के लिए लूटमार न करना.

जॉनी कहते हैं, "कुछ जेबकतरे नशीले पदार्थों में लिप्त होते हैं या फिर वे अपना सारा पैसा जुआघरों में खर्च कर देते हैं. और फिर हताश होकर वे हिंसक हो उठते हैं. हम उनकी तरह नहीं हैं."

वे बताते हैं, "चोरी किए हुए कैमरे, लैपटॉप और फोन रोमानिया भेज दिए जाते हैं जहां उन्हें काला बाजार में बेच दिया जाता है और हम एक हफ़्ते में 5000 यूरो कमा लेते हैं."

लेकिन जब जॉनी और उनके दोस्तों से ये पूछा गया कि क्या वे कसूरवार महसूस करते हैं, तो थोड़ी हिचकिचाहट के बाद उन्होंने कहा, "हां, मैं कसूरवार महसूस करता हूं."

इनके जेब काटने के तरीकों में एक तरक़ीब का नाम इन्होंने मशहूर फ़ुटबॉलर रोनाल्डिन्हो पर रखा है जो गोल करने के बाद नाचते हैं.

जॉनी कहते हैं, "हमें पकड़ने के लिए लंदन में पुलिस और सीसीटीवी को फु़र्ती दिखानी होगी. हमारा पहनावा पर्यटकों की तरह होगा. सैकड़ों की भीड़ में पुलिस हमें पहचान नहीं पाएगी. हम बहुत तेज़ हैं."

खेल शुरू होने से पहले की कार्रवाई में अब तक पुलिस ने 80 से ज़्यादा संदिग्ध जेबकतरों को पकड़ा है.

पुलिस की इस कार्रवाई का नाम है ऑपरेशन पोडियम और स्कॉटलैंड यार्ड ने ये टीम ख़ासतौर पर ओलंपिक से जुड़े अपराधों से निपटने के लिए बनाई है.

इस टीम के प्रमुख, मार्क टियोडोरिनी मानते हैं कि चोर-उचक्कों पर नज़र रखने के लिए 9000 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों के अलावा आम लोगों में सतर्कता भी ज़रूरी है.

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