ओलंपिक मसाला: ये राजकुमारी मांगे मेडल

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Image caption ख़ानदानी घुड़सवार ज़ारा फ़िलिप्स ओलंपिक में हैं.

ये ओलंपिक ब्रितानी राजपरिवार के लिए ख़ास है, सिर्फ़ इसलिए नहीं कि ब्रिटेन मेज़बान है और क्वीन ने इसका उदघाटन किया बल्कि इसलिए भी कि राजपरिवार की एक सदस्य टीम ग्रेट ब्रिटेन में शामिल है.

महारानी की नातिन ज़ारा फ़िलिप्स ब्रिटेन की घुड़सवारी टीम में शामिल हैं और ब्रितानी मीडिया की उन पर और उनके घोड़े पर ख़ास नज़र है, घोड़े का नाम काफ़ी दिलचस्प है--हाइ किंगडम.

31 वर्षीय ज़ारा फ़िलिप्स महारानी की बेटी, प्रिंसेस एन की बेटी हैं और इसी साल उनकी शादी हुई है.

ये भी दिलचस्प बात है कि इससे पहले उनकी माँ प्रिसेंस एन भी ओलंपिक खेलों में ब्रिटेन का प्रतिनिधत्व कर चुकी हैं, उन्होंने 1976 के मांट्रिएल ओलंपिक में हिस्सा लिया था.

ख़ानदानी घुड़सवार ज़ारा फ़िलिप्स ओलंपिक में हिस्सा लेकर बहुत ख़ुश हैं.

उन्होंने इस बात पर ख़ास ज़ोर दिया कि लंदन दुनिया का अकेला शहर है जो तीसरी बार ओलंपिक खेलों की मेज़बानी कर रहा है.

दाँव खाली गया

ब्रिटेन में बेटिंग या सट्टा खेलना वैध है, देश में कई बड़ी कंपनियाँ हैं जिनके दफ़्तरों में जाकर या ऑनलाइन लोग दाँव लगा सकते हैं.

ओलंपिक जैसे बड़े खेल आयोजनों के समय तो सट्टेबाज़ों की बन आती है.

इस बात पर लाखों पाउंड का सट्टा लगाया गया कि ओलंपिक की मशाल से स्टेडियम में ज्योति कौन प्रज्ज्वलित करेगा, इसके लिए बीसियों बड़े एथलीटों के नाम की चर्चा थी.

लोगों ने बढ़-चढ़कर दाँव लगाए, मगर आयोजकों ने सात अनजान युवा एथलीटों को यह काम सौंप दिया जिससे सारे अनुमान धरे के धरे रह गए.

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Image caption अनजान युवा एथलीटों ने ओलंपिक उद्धाटन समारोह में ज्योति प्रज्ज्वलित की.

देश की सबसे बड़ी बेटिंग कंपनी 'विलियम हिल' ने लोगों के पैसे वापस कर दिए हैं क्योंकि न कोई जीता, न कोई हारा, पूरी बाज़ी ही बेकार गई.

भूखे खिलाड़ी

ओलंपिक खेलों में मिलने वाले खाने की चर्चा हर बार होती है, वैसे ब्रिटेन - फ्रांस या इटली की तरह अपने खानों के लिए नहीं जाना जाता.

लंदन में ग्रीनीच पार्क में जहाँ घुड़सवारी के आयोजन हो रहे हैं वहाँ दोपहर के वक़्त खाना ख़त्म हो गया, खिलाड़ियों को लंबे समय तक लंच के लिए इंतज़ार करना पड़ा.

एक घुड़सवार ने स्थानीय अख़बार से कहा, "मुझे तो ऐसी भूख लगी है कि पूरा घोड़ा ही खा जाऊँ."

कुछ लोगों ने कहा कि ज़्यादातर जगहों पर सिर्फ़ स्नैक्स उपलब्ध हैं, भरपेट खाना आसानी से नहीं मिल रहा.

ओलंपिक पार्क से रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों की भी शिकायत है कि उन्हें ढंग का खाना-पीना नसीब नहीं हो रहा.

रमज़ान के इंतज़ाम

जहाँ कई खिलाड़ी खाना न मिलने की वजह से भूखे हैं, वहीं कुछ लोगों के भूखे रहने की वजह आस्था है.

ओलंपिक खेल ऐसे समय हो रहे हैं जबकि रमज़ान का महीना चल रहा है, लंदन में सूरज के देर से डूबने की वजह से रोज़े और भी लंबे हो गए हैं.

कई धार्मिक नेताओं ने कहा है कि खेलों के दौरान रोज़ा रखना ज़रूरी नहीं है, एथलीट खेलों के बाद अपने रोज़े पूरे कर सकते हैं, मगर ऐसी खिलाड़ी भी अच्छी-ख़ासी संख्या में हैं जो रोज़ा रख रहे हैं.

ओलंपिक आयोजन समिति ने रोज़ा रखने वाले खिलाड़ियों के लिए विशेष प्रबंध किए हैं, उनके लिए अलग वक़्त पर खाने का इंतज़ाम है, और वैसे भी हर ओलंपिक में हलाल खाने की व्यवस्था तो होती ही है.

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