विरोधी घायल और साइना को मिला कांस्य पदक

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Image caption साइना नेहवाल ने भारत के लिए तीसरा मैडल जीता है

भारतीय स्टार खिलाड़ी साइना नेहवाल ने इतिहास रचते हुए बैडमिंटन की महिला एकल स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल किया है. ये लंदन ओलंपिक में भारत के लिए तीसरा पदक रहा.

बैडमिंटन प्रतिस्पर्धा में भारत के लिए ये पहला ओलंपिक पदक है.

साइना को ये पदक तब मिला जब चीन की शिन वांग घुटने में लगी चोट की वजह से खेल को जारी नहीं रख पाई और उन्होंने मुकाबले को बीच में ही छोड़ देने का फैसला किया.

शिन वांग ने जब ये मुकाबला छोड़ा, उस वक्त वो पहला गेम 21-18 से जीत चुकी थी जबकि दूसरे गेम में 1-0 से आगे थी.

शिन वांग को चोट का अहसास पहले ही गेम हो गया था और पहले गेम के अंतिम क्षणों में उन्होंने ब्रेक भी लिया था.

जब ये तय हो गया कि कांस्य पदक साइना नेहवाल का हैं तो भी साइना नेहवाल के चेहरे पर वो खुशी दिखाई नहीं दी.

साइना नेहवाल कोर्ट छोड़ने से पहले विरोधी शिन वांग से गले मिलीं.

चीन की खिलाड़ी के लिए मैदान पर व्हील चेयर लाई गई लेकिन उन्होंने लड़खड़ाते हुए अपने कोच के साथ बाहर जाने का विकल्प चुना.

साइना के कोच गोपीचंद ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि 'जिस तरह से साइना को मेडल मिला, उन्हें बहुत अच्छा तो नहीं लगा...लेकिन साइना अच्छा खेल, खेल रही थीं और ओलंपिक मेडल तो मेडल ही होता है.'

इससे पहले सेमीफाइनल में बैडमिंटन में शीर्ष वरीयता प्राप्त वांग ने साइना को सीधे गेम्स में 21-13 और 21-13 में हराया था और भारत में इससे खासी निराशा हुई थी.

साइना की जीत पर भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन्हें बधाई दी है.

हैदराबाद में टीवी चैनलों से बात करते हुए साइना के पिता हरवीर सिंह ने कहा, "मुझे अच्छा तो नहीं लगा कि उनकी प्रतिद्वंद्वी इस तरह से मैच पूरा नहीं कर पाई लेकिन आपको याद होगा कि कुछ महीने पहले साइना ने इसी लड़की को दो गेम्स में हराया था. शायद किस्मत ने ही साइना का साथ दिया...साइना की ये जीत सभी भारतीयों की जीत है."

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