जुडवां बच्चों की मां - मैरी कॉम का ओलंपिक सपना होगा पूरा?

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Image caption मैरी कॉम का सपना है पदक जीतने का

विश्व की नंबर वन महिला मुक्केबाज़ मैरी कॉम का प्यार सिर्फ़ और सिर्फ बॉक्सिंग है जिसके बिना वो जी नहीं सकतीं.

बॉक्सिंग की प्रेमी इस खिलाड़ी का सपना आज पूरा होगा या नहीं ये भारतीय समयानुसार शाम के साढ़े छह बजे ही तय हो जाएगा.

मैरी का सपना है ओलंपिक पदक जीतने का और आज के मैच में अगर वो जीतती हैं तो उनके लिए एक पदक तो तय हो ही जाएगा.

अब ये पदक कांस्य, रजत या स्वर्ण होगा ये उसके बाद के मैचों पर निर्भर करेगा.

जाहिर है भारत में उनके समर्थक चाहेंगे कि मैरी स्वर्ण पदक ही जीतें और मैरी भी यही चाहेंगे कि वो स्वर्ण की मंजिल तक पहुंचे.

स्वर्ण जीता तो पहली भारतीय महिला होंगी

मैरी पहले भी कह चुकी है कि उनका सपना ओलंपिक में पदक जीतने का है और अगर वो स्वर्ण जीतती हैं तो वो ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला होंगी.

इससे पहले कर्णम मल्लेश्वरी और साइना नेहवाल भारत के लिए कांस्य पदक जीत चुकी हैं लेकिन किसी भी भारतीय महिला ने आज तक ओलंपिक में स्वर्ण पदक नहीं जीता है.

मैरी कॉम ने प्री क्वार्टर फाइनल उस दिन जीता जब भारत में उनके जुड़वां बच्चों का जन्मदिन था. जी हां, कल मैरी कॉम के जुड़वां बच्चों का जन्मदिन था.

मैरी कॉम के माता पिता नहीं चाहते थे कि वो बॉक्सिंग करे. हालांकि उनके मां बाप को एथलेटिक्स से कोई समस्या नहीं थी.

मैरी ने डिस्कस और शॉट पुट से शुरु किया लेकिन चुपके चुपके वो बॉक्सिंग करने लगीं. तीन महीने बाद ही पोल खुल गई जब मैरी ने एक बड़ी प्रतियोगिता जीती.

मैरी के पिताजी कुश्ती लड़ते हैं. वो बताते हैं कि उन्होंने मैरी की फोटो देखी जिससे उन्हें पता चला कि मैरी बॉक्सिंग कर रही है.

ओलंपिक के दौरान मैरी अपने जुड़वा बच्चों को 'मिस' कर रही हैं.

वो कहती हैं, ‘‘ मैं अपने बच्चों को मिस करती हूं. बहुत कठिन है. मुझे अपने देश के लिए कुछ करना है. मुझे अपने सपने को पूरा करना था 2012 लंदन ओलंपिक में आने का.’’

वो कहती हैं, ‘‘ मुझे बॉक्सिंग से प्रेम है. मैं इसके बिना रह नहीं सकती.’’

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