मिसी मिसाइल - ओलंपिक मसाला

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मीठी मिसी

अमरीका की एक तैराक की खूब चर्चा है, नाम है उनका मिसी फ़्रैंकलिन. मगर लोग बुलाने लगे हैं उन्हें मिसी मिसाइल के नाम से.

अपने पहले ओलंपिक में मिसी ने कुल पाँच पदक जीते हैं – चार स्वर्ण, एक कांस्य.

मिसी ने अपना पदक कोलैरेडो राज्य के औरोरा शह को समर्पित किया है जहाँ वो रहती हैं.

औरोरा वही शहर है जहाँ पिछले दिनों बैटमैन की नई फ़िल्म के एक शो के दौरान एक हमलावर ने गोली चलाकर 12 लोगों को मार डाला था.

मिसी ने कहा – मैं इस सारे समय अपने शहर की उस घटना के बारे में सोचती रही. मैंने यहाँ जो भी किया वो उनको समर्पित है.

छोटी मिनी

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ओलंपिक स्टेडियम में दर्शकों की निगाह दो पैरों पर दौड़ते-कूदते एथलीटों पर तो लगी ही मगर बीच-बीच में अक्सर उनका ध्यान इधर-उधर भागती चौपहिया गाड़ियों पर चला जाता है.

मैदन पर तीन छोटी कारें – छोटी मिनी गाड़ियाँ – इधर-उधर भाग रही हैं जो एथलीटों के मुक़ाबले के बाद गोले, भाले और डिस्कस लेकर वापस एथलीटों के पास पहुँचा करती हैं.

इन्हें बीएमडब्ल्यू ने स्पॉन्सर किया है और इन्हें रिमोट से संचालित किया जाता है जिसके लिए विशेष प्रशिक्षित लोग मैदान पर तैनात हैं.

मगर ऐसा लगता है कि उन्हें अभी इन गाड़ियों को चलाने के लिए और अभ्यास की ज़रूरत थी क्योंकि पिछले दिनों एक गाड़ी सीधा एक माइक्रोफ़ोन से जा भिड़ी जबकि एक दिन एक गाड़ी दूरी नापनेवाले मार्कर से और माइक और मार्कर दोनों ही चित्त हो गए.

वैसे एसोसिएटेड प्रेस के एक रिपोर्टर को ओलंपिक स्टेडियम के एक कर्मचारी ने फुसफुसाते हुए एक और मज़ेदार बात बताई – कि रात में जब स्टेडियम ख़ाली हो जाता है, ये छोटी गाड़ियाँ एथलीटों के ट्रैक पर रेस भी लगाती हैं.

दौड़ से पहले जूता चोरी

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ऑस्ट्रेलिया के एथलीट एंड्रयू मैक्केब की साँस दौड़ने से पहले ही फूल गई, बल्कि रूक गई जब उनका ट्रेनिंग बैग चोरी चला गया.

इसमें उनके दौड़नेवाले जूते रखे थे जिन्हें पहन उनको इस शुक्रवार को दौड़ना है.

ऑस्ट्रेलियाई टीम के कोच ने उनके बारे में ये बताया – वो ख़ुश नहीं हैं. आपके पैर एक जूते में सेट होते हैं. और आप नए जूतों में दौड़ें, और वो भी ओलंपिक जैसे खेल में.

फ़िलहाल दौड़नेवाले जूतों को खोजने के लिए पुलिस भी दौड़ पड़ी है.

पुलिस का कहना है कि चोरी का संदेह दो लोगों पर है जिनमें से एक को गिरफ़्तार कर लिया गया है. उम्मीद है जूते भी पुलिस की पकड़ में आ जाएँगे.

चीख पर चीख

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उज़्बेकिस्तान के भारोत्तोलक शेर्ज़ोद्जोन यूसुपोव जीते तो नहीं मगर लोगों का ध्यान उन्होंने खूब खींचा – भार उठाने से पहले लगाई जानेवाली अपनी तेज़ चीखों से.

उनकी चीखों के लोग ऐसे अभ्यस्त हो गए थे कि अपने अंतिम प्रयास में जब वो आए, और चीखे, तो साथ-साथ स्टेडियम में जमा दर्शकों ने भी उनका उसी अंदाज़ में साथ दिया..

इस हौसला आफ़ज़ाई से गदगद यूसुपोव ने हाथों से चुंबन बिखरते हुए सबका आभार जताया.

वो बोले – मुझे यहाँ का माहौल अच्छा लग रहा है, बहुत जोश है. जब भार उठाता हूँ तो सब मेरे साथ चिल्लाते हैं – येह-येह!

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