'पिता ने कहा - नहीं कर पाओगी, मैंने कहा - करके दिखाऊँगी'

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पांच बार की विश्व चैंपियन एमसी मैरी कॉम ने भारत के लिए कांस्य पदक पक्का कर लिया है और भारतीय खेल प्रेमी खुशी मना रहे हैं. लेकिन ये कांस्य पदक शायद ही एमसी मैरी कॉम की ललक को शांत कर पाए.

लंदन ओलंपिक के लिए रवाना होने से पहले मैरी कॉम ने साफ तौर पर कहा था कि उनका लक्ष्य सिर्फ गोल्ड मेडल है और मैरी कॉम जो करने की ठान लेती हैं वो करके दिखाती हैं.

ओलंपिक में जाने से पहले एमसी मैरी कॉम से साथ हुई मुलाकातों के अंश:

ओलंपिक के लिए जाने से पहले ठीक पहले जब मैं मैरी कॉम से मिला तो मैंने पूछा - "पांच बार की चैंपियनशिप में से आपके दिल के करीब कौन सा खिताब है?"

मैरी कॉम ने जवाब दिया, “2008 की विश्व चैंपियनशिप का खिताब, जब मैं मां बनने के बाद चैंपियन बनी.”

इस जवाब के बाद इस खिताब के खास होने की वजह पूछना कोई वाजिब सा सवाल नहीं लगता लेकिन मैंने पूछ ही लिया था और इसका जवाब सुनकर पता चला कि एमसी मैरी कॉम की इच्छाशक्ति क्या चीज है.

मैरी कॉम ने जवाब दिया,“मां बनने के बाद जब मैंने वापसी का फैसला किया, तो मेरे पिताजी ने कहा कि बेटा आप मां बन गई हैं आप नहीं कर पाएंगी और मैंने कहा नहीं मैं करके दिखाउंगी.”

एमसी मैरी कॉम ने अपने पिता को दिखाया कि वो दोबारा विश्व चैंपियन बन सकती हैं. इस घटना ने दिखाया की मैरी कॉम की सोच क्या है और ये सोच क्या कमाल कर सकती है.

एक मुलाकात के दौरान मैंने मैरी कॉम से मैंने पूछा - "जिस तरह से आप पांच बार की विश्व चैंपियन हैं, क्या आपको लगता हैं कि आपको अपना वाजिब हक मिला."

इस सवाल के जवाब में मैरी कॉम ने कहा, “महिला खिलाड़ियों के मुकाबले मुझे नाम, पैसा, शोहरत ज्यादा मिली हैं लेकिन अगर उसकी तुलना आप बाकी पुरुष खिलाड़ियों से करें तो मुझे उतनी शोहरत नहीं मिली.”

इस जवाब को उन्होंने जिस वाक्य से पूरा किया उसने दिखा दिया कि उनके मन में क्या चल रहा है - “मैं इससे निराश नहीं हूं. जब मैं ओलंपिक में गोल्ड मेडल लेकर आउंगी तो मुझे मेरा वाजिब हक मिलेगा.”

जब मैरी कॉम के मन में ये सब चल रहा हो तो ये भरोसा करना आसान है कि वो लंदन ओलंपिक में स्वर्ण जीतने के लिए जी-जान लगा देंगी.

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