विकास गौड़ा हारे में मगर लोगों का दिल जीता

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भारत के विकास गौड़ा चक्का फेंक प्रतिस्पर्धा के फाइनल में आठवें स्थान पर रहे हैं.

विकास इस मुकाबले में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं दोहरा पाए और खेल प्रेमियों को निराश किया मगर फिर भी उनके फ़ाइनल तक पहुँचने की ठीक उसी तरह तारीफ़ हो रही है जैसे महिला वर्ग में कृष्णा पूनिया के फ़ाइनल में पहुँचने पर हुई थी.

गौड़ा ने दो किलोग्राम के चक्के को पहली कोशिश में 64.79 मीटर तक की दूरी तक फेंका.

इससे पहले फाइनल के लिए क्वालिफाइंग मुकाबले में लंदन ओलंपिक के लिए अमरीका में ट्रेनिंग कर रहे गौड़ा ने 65.20 मीटर चक्का फेंक कर फाइनल में जगह बनाई थी.

मंगलवार को फाइनल के पहले दौर में 64.79 की दूरी फेंकने से वो मुकाबले में तो बने रहे लेकिन पदक के लिए उनसे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी.

लेकिन गौड़ा ने अगले पांच प्रयासों में 60.95, 63.03, 64.15, 64.48 और 63.89 मीटर की दूरी नापी और पदक तालिका से दूर रहे.

सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से दूर

इस श्रेणी में स्वर्ण पदक जर्मनी के रॉबर्ट हार्टिंग ने 68.27 मीटर चक्का फेंक कर हासिल किया.

विकास गौड़ा अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 66.28 से काफी पीछे रहे.

हालांकि इतनी दूरी तक फेंकने पर भी उन्हें पदक नहीं मिलता क्योंकि कांस्य पदक जीतने वाले खिलाड़ी ने 68.03 तक डिस्कस फेंका था.

विकास गौड़ा वर्ष 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीत चुके हैं तो उसी साल के एशियाई खेलों में उन्हें कांस्य पदक मिला था.

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