छोटा है, पर मेडल तो हैः मैरी कॉम

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Image caption बीबीसी के लंदन मुख्यालय में ओलंपिक मशाल के साथ तस्वीर खिंचवा रहीं मैरी कॉम

भारतीय बॉक्सर एम सी मैरी कॉम लंदन ओलंपिक से संतुष्ट होकर लौट रही हैं.

सेमीफ़ाइनल के अगले दिन बीबीसी के लंदन दफ़्तर में उन्होंने बीबीसी हिन्दी से कहा,”मैं खुश हूँ, कि मेडल तो मिला, छोटा होने से क्या होता है, वो मेडल तो है…ओलंपिक एक बड़ा खेल है. इसमें मेडल जीतना आसान नहीं है. मैं ये कर पाई ये सोचकर मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है”

हालाँकि भारत को ओलंपिक में शानदार उपलब्धि दिलानेवाली इस खिलाड़ी को फ़ाइनल में नहीं पहुँच पाने का मलाल अवश्य है.

वो कहती हैं,"मैं कभी भी नर्वस या कन्फ़्यूज़ नहीं होती और पहले भी मुक्केबाज़ों के साथ उनके घरेलू अखाड़े में भिड़ चुकी हूँ, पर कल पता नहीं क्या हुआ, मैं अभी भी नहीं समझ पा रही कि क्या हुआ.“

सुनिए मैरी कॉम के साथ इंटरव्यू

सेमीफ़ाइनल में मैरी कॉम का मुक़ाबला ब्रिटेन की निकोला एडम्स के साथ था जिनको एक्सेल एरेना में आए दर्शकों का ज़बरदस्त समर्थन मिल रहा था.

समर्थन का आलम ये कि स्वयं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन और ब्रिटेन के मशहूर पेशेवर बॉक्सर आमिर ख़ान भी मैच देखने आए हुए थे.

निकोला जीतें सोना

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Image caption अपने पति और अपनी माँ के साथ बीबीसी के लंदन मुख्यालय में मैरी कॉम

क्या मैरी कॉम जानती थीं कि कैमरन बैठे हैं, ये पूछे जाने पर मैरी ने कहा, "मुझे नहीं पता था कि डेविड कैमरन भी वहाँ हैं, बाद में मेरे पति ने बताया कि वो और ब्रिटेन के बॉक्सर आमिर ख़ान भी मेरा मैच देख रहे थे."

मैरी ने कहा कि उन्हें फ़ाइनल में नहीं पहुँच पाने का एक और मलाल इस कारण भी है कि वो फ़ाइनल में गईं चीन की खिलाड़ी रेन कैनकैन को पहले हरा चुकी थीं.

मगर मैरी ने कहा कि उनकी इच्छा है कि निकोला एडम्स ही ये मुक़ाबला जीतें.

और यही हुआ भी. मैरी को हरानेवाली निकोला एडम्स ने 51 किलोग्राम बॉक्सिंग मुक़ाबले का स्वर्ण पदक अपने गले में डाल लिया.

असंतोष

मैरी को उम्मीद है कि उनके लंदन ओलंपिक के प्रदर्शन से भारत में खेलों के प्रति और विशेष रूप से मुक्केबाज़ी को लेकर नज़रिए में कुछ बदलाव आएगा.

मणिपुर की इस खिलाड़ी को लेकर पिछले कुछ समय से सारा भारत समर्थन में खड़ा था, ये देखकर कैसा लग रहा है, ये पूछने पर मैरी कहती हैं,"मुझे बहुत अच्छा लग रहा है, आख़िर हम सब भारतीय हैं."

पर जब क्रिकेट की बात छिड़ी तो इसपर मैरी के मन का असंतोष ख़ुलकर सामने आया. वो बोलीं,"मुझे बहुत बुरा लगता था ये सोचकर कि मैं पाँच बार विश्व चैंपियन रह चुकी हूँ मगर कोई मुझे नहीं जानता और उधर क्रिकेट में खिलाड़ी हर सेकेंड कमाई कर रहे हैं, और मुझे तो वैसा कुछ नहीं मिला."

क्या संदेश देना चाहेंगीं युवाओं को? ये पूछने पर मैरी कहती हैं,"दो जुड़वाँ बच्चों की माँ होकर जब मैं मेडल जीत सकती हूँ तो फिर दूसरे लोग क्यों नहीं जीत सकते.“

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