विनम्रता की मिसाल सुशील

 सुशील कुमार मुकेश शर्मा

राष्ट्रमंडल खेलों में महिला मुक्केबाज़ी तो थी नहीं मगर मुझे याद है जब मैं सुशील का स्वर्ण पदक का मैच देखने गया था. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी भी वह मैच देख रहे थे और पूरा स्टेडियम सुशील सुशील के नारों से गूँज रहा था.

सुशील कुमार ने स्वर्ण पदक जीता मगर क्या मजाल कि कहीं से भी उनके अंदर इसका कोई अभिमान आया हो.

उसके कुछ दिनों बाद सुशील को हमने अपने स्टूडियो में आमंत्रित किया था. हमारे सहयोगी आदेश कुमार काफ़ी पहले से सुशील के मुक़ाबलों में जाया करते थे. उनके साथ ही सुशील हमारे दफ़्तर पहुँचे.

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सुशील के साथ उन्हीं के जैसे कुछ साथी थे, पूरे दल-बल के साथ सुशील बीबीसी के दिल्ली दफ़्तर पहुँचे और लोग रुक-रुककर उन्हें देख रहे थे.

उनके साथ उनकी सफलता को लेकर लंबी बात हुई. सवाल किसी भी तरह का मगर जवाब में ऊपर वाले को और अपने गुरु को वो याद करना कभी नहीं भूले.

सुनते और पढ़ते आए थे कि पेड़ पर जितने फल लगते हैं वो उतना ही झुकता जाता है और इसका जीता जागता उदाहरण सुशील कुमार मेरे सामने स्टूडियो में थे.

पूरी विनम्रता के साथ उन्होंने हमसे बात की और हर चीज़ का श्रेय उन्होंने अपने गुरु जी को दिया. गुरु सतपाल उन्हें अपने बच्चे की तरह मानते हैं और सुशील की हर बात से लग रहा था कि उनके गुरु उनके पिता से कहीं कम नहीं.

इससे पहले जब सुशील ने बीजिंग में काँस्य पदक जीता था तब भी उन्होंने सबसे पहले वहाँ मौजूद बीबीसी संवाददाता मलय नीरव से बात की थी.

बीबीसी के साथ उनका संबंध काफ़ी पुराना रहा है क्योंकि जब बाक़ी मीडिया माध्यम अन्य खेलों की ओर ज़्यादा ध्यान रखते थे तब भी बीबीसी हिंदी ने कुश्ती जैसे खेल में अच्छा प्रदर्शन कर रहे सुशील कुमार के प्रदर्शन लोगों तक पहुँचाया.

सुशील ने ये बात उस साक्षात्कार में भी मानी और उसके बाद भी उनके साथ संपर्क बना रहा.

सुशील एक बार फिर लंदन से पदक के साथ लौटेंगे और लगातार दो ओलंपिक में व्यक्तिगत स्पर्द्धा में पदक जीतने वाले वो पहले भारतीय हैं मगर मुझे पूरा विश्वास है कि इस बात का कोई अहंकार उनमें देखने को नहीं मिलेगा. एक बार फिर सुशील ज़मीन से जुड़े और विनम्र सुशील के ही रूप में नज़र आएँगे.

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