लंदन ओलंपिक : टॉप 10 हीरो

 सोमवार, 13 अगस्त, 2012 को 16:58 IST तक के समाचार

लंदन ओलंपिक दस चर्चित चेहरे

  • माइकल फेल्प्स

    अमरीकी तैराक माइकल फेल्प्स लंदन ओलंपिक के सबसे चर्चित चेहरे में शायद सबसे ऊपर आते हैं.

    फेल्प्स ने अपने करियर में चार ओलंपिक खेलों में कुल 22 ओलंपिक पदक जीते. इनमें 18 स्वर्ण पदक थे.

    फेल्प्स पहली बार 15 वर्ष की आयु में सिडनी में हुए 2000 के ओलंपिक में उतरे थे. उसके बाद हुए 2004 के एथेंस ओलंपिक में उन्होंने छह स्वर्ण और दो कांस्य पदक जीते.

    लेकिन 2008 में बीजिंग ओलंपिक में उन्होंने आठ स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया.

    लंदन ओलंपिक में अपने पहले मुकाबले में चौथे नंबर पर रहे फेल्प्स ने ढीली शुरुआत के बाद फिर रफ्तार पकड़ी और आखिर में उन्होंने किसी भी तैराक से ज़्यादा पदक जीते – चार स्वर्ण और दो रजत पदक.

    27 वर्षीय फेल्प्स अब तैराकी से रिटायर हो जाएंगे.

  • शनिवार को जमैका के धावक यूसेन बोल्ट और ओलंपिक इतिहास का नाता तब और मज़बूत हो गया जब बोल्ट ने लंदन ओलंपिक की 4 x100 मीटर दौड़ जीतकर तीसरा स्वर्ण पदक अपने नाम किया.

    इससे पहले 4x100 मीटर दौड़ का विश्व रिकॉर्ड भी जमैका के ही नाम था. डेगू में हुई 2011 की विश्व चैंपियनशिप में जमैका की टीम ने ये रेस 37.04 सेकेंड में पूरी की थी.

    यूसेन बोल्ट ने लंदन ओलंपिक में 100 मीटर, 200 मीटर और 4x100 मीटर की स्पर्धा में स्वर्ण जीता हैं और इन्हीं तीनों स्पर्धाओं में बोल्ट ने बीजिंग ओलंपिक में भी स्वर्ण पदक जीते थे.

    ओलंपिक इतिहास में ऐसा करने वाले बोल्ट पहले खिलाड़ी बन गए हैं.

    हालांकि वो अमरीकी धावक चैंपियन कार्ल लुई से उस वक्त उलझते भी दिखे जब लुई ने कहा कि जैमका के डोपिंग नियम बाकी देशों जितने कड़े नहीं हैं.

  • ईरान की ओलंपिक में उपस्थिति

    इस ओलंपिक में सिर पर हिजाब पहन कर खेलने वाली कई मुस्लिम देशों की खिलाड़ी पर सबकी नजरों में रहीं.

    क़तर, सऊदी अरब और ब्रुनई ने लंदन ओलंपिक में पहली बार अपनी महिला खिलाड़ियों को खेलने की इजाजत दी.

    इन तीन देशों के अलावा ईरान की महिला खिलाड़ियों ने भी हिजाब पहन कर ओलंपिक स्पर्धाओं में हिस्सा लिया.

    ये खिलाड़ी पदक भले ना जीत पाई हों लेकिन उनका ओलंपिक में हिस्सा लेना ही एक बड़ी कामयाबी है.

    हालांकि सऊदी जूड़ो खिलाड़ी वोजदान शहरखानी के हिजाब पहनने को लेकर खासा विवाद भी हुआ.

    सुरक्षा कारणों से पहले तो अंतरराष्ट्रीय जूडो संघ ने शहरखानी को हिजाब पहनने की अनुमति देने से मना कर दिया था.

    बाद में शहरखानी हिजाब के साथ स्पर्धा में उतरी. लेकिन वो प्युरेतो रीको की प्रतिद्वंदी से हार गईं.

  • अफगान खिलाड़ी को पदक

    अकसर हिंसा और हमलों के कारण सुर्खियों में रहने वाला अफगानिस्तान भी लंदन ओलंपिक में पदक जीतने वाले देशों की सूची में शामिल है.

    ताइक्वांडो खिलाड़ी रोहुल्लाह निकपाई ने फिर अपने देश को कांस्य पदक दिलाया है.

    58 किलोग्राम वर्ग में खेलने वाले निकपाई इससे पहले 2008 के बीजिंग ओलंपिक में भी कांस्य पदक जीत कर इतिहास रच चुके हैं. ये ओलंपिक खेलों में अफगानिस्तान को मिलने वाला पहला पदक था.

    लेकिन लंदन में कांस्य पदक लेते वक्त निकपाई की आंखों में आंसू थे क्योंकि वो स्वर्ण पदक जीतने के इरादे से लंदन गए लेकिन उन्हें कांस्य से ही संतोष करना पड़ा.

    बीजिंग से पहले अफगानिस्तान ने 12 ओलंपिक खेलों में हिस्सा लिया था लेकिन कभी पदक नहीं जीत पाया. उसके बाद निकपाई ने अपने देश को लगातार दो पदक दिलाए.

  • ऑस्कर पिस्टोरियस

    लंदन ओलंपिक को दक्षिण अफ्रीका के ऑस्कर पिस्टोरियस के लिए भी याद किया जाएगा जो दोनों पैर न होने के बावजूद 4x400 मीटर रिले दौड़ में उतरे.

    वो प्रोस्थेटिक टांगों यानी घुटनों से जुड़ी स्टील की छड़ों के साथ दौड़ते हैं.

    हालांकि इस स्पर्धा में दक्षिण अफ्रीका की टीम आखिरी पायदान पर ही और पदक जीतने का पिस्टोरियस का सपना पूरा न हो सका. लेकिन वो 400 मीटर स्पर्धा में सेमीफाइनल तक पहुंचे.

    पिस्टोरियस के जन्म से ही पैर नहीं हैं. इसलिए पदक न जीतने पाने से बावजूद लंदन ओलपिक में सबने उनके जज्बे को सलाम किया.

    अब उनका पूरा ध्यान लंदन में ही 29 अगस्त से शुरू होने वाले पैरालंपिक खेलों पर है जिनमें दुनिया भर के विकलांग खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं.

  • ये शिवेन

    चीन की 16 वर्षीया तैराक ये शिवेन इतना तेज़ तैरीं कि सब हैरान रह गए हैं. 400मीटर मेडले के आखिरी 50 मीटर की दूरी उन्होंने मात्र 28.93 सेकंड में पूरी कर ली.

    इतनी तेज़ी से तो पुरूषों के स्वर्ण पदक विजेता अमरीकी तैराक रायन लोटे भी नहीं तैरे जिन्होंने इसके लिए 29.10 सेकंड लिए.

    उनके अद्भुत प्रदर्शन को देखते हुए ये अटकलें लगने लगीं कि कहीं उन्होंने प्रदर्शन बेहतर करने वाली दवाएं तो नहीं ली हैं.

    लेकिन ये शिवेन का कहना है कि उन्होंने किसी तरह की कोई शक्तिवर्धक दवा या ड्रग्स नहीं लिया है.

    शिवेन ने अपना ही व्यक्तिगत रिकॉर्ड तोड़ते हुए पहले के मुकाबले पांच सेकंड कम समय लेकर 400 मीटर तैराकी में स्वर्ण पदक अपने नाम किया था.

  • चीन का बैडमिंटन में दबदबा

    बैडमिटंन में चीनी खिलाड़ियों ने अपना दबदबा साबित कर दिया है.

    लंदन ओलंपिक में बैडमिंटन की पांचों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक चीनी खिलाडियों के नाम रहे.

    पुरूषओं की डबल्स स्पर्धा में चीन के त्साई युन और फु हाईफेंग ने सोने का तमगा अपने नाम कर बैडमिंटन में पूरी तरह चीन का दबदबा साबित किया.

    भारत के लिए कांस्य पदक जीतने वाली साइना नेहवाल को सेमीफाइनल में भी चीनी खिलाड़ी यिहान वांग के हाथों हार झेलनी पड़ी थी.

    यिहान वांग ने ही महिला सिंगल्स स्पर्धा में स्वर्ण पदक अपने नाम किया.

    हालांकि लंदन ओलंपिक में बैडमिंटन के मुकाबलों में निर्णयों को लेकर कई बार सवाल भी उठाए गए.

  • ब्रिटेन की जेसिका एनिस

    लंदन ओलंपिक कई खिलाड़ियों के लिए अपने पुराने सपनों को पूरा करने का वजह भी बना.

    खास कर ब्रिटेन की जेसिका एनिस और कीनिया के डेविड रुडिसा का जिक्र करना होगा जिन्हें चोटिल होने की वजह से बीजिंग में 2008 के ओलंपिक में निराशा हाथ लगी थी.

    लेकिन लंदन ओलंपिक में उन्होंने अपने मजबूत इरादों से कामयाबी हासिल की.

    जेसिका एनेस ने हेप्थालन स्पर्धा में स्वर्ण पदक अपने नाम किया जबकि डेविड रुडेशिया ने 800 मीटर दौड़ में विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया.

    इन दोनों ही खिलाड़ियों के लिए लंदन ओलंपिक बेशक यादगार बन गया.

  • क्रिस होए

    इस बार के ओलंपिक के चर्चित चेहरों में साइकलिस्ट क्रिस होए को भी शामिल करना होगा जिन्होंने लंदन में अपना छठा ओलंपिक पदक हासिल किया.

    इनमें से तीन स्वर्ण पदक उन्होंने पिछले बीजिंग ओलंपिक में जीते थे.

    होए स्कॉटलैंड के सबसे सफल ओलंपियन हैं.

    वो 1908 में हेनरी टेलर के बाद एक ही ओलपिक में तीन स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले ब्रितानी खिलाड़ी हैं.

    लंदन ओलंपिक में उन्होंने दो स्वर्ण और एक रजत पदक अपने नाम किए.

  • किरानी जेम्स

    ग्रेनेडा के किरानी जेम्स में पुरूषों की 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक अपने नाम किया.

    इस खुशी में उनके देश में आधे दिन की छुट्टी का एलान किया गया. ऐसा हो भी क्यों ना.

    ये आखिर कैरेबियाई भेत्र में स्थित एक लाख दस हजार लोगों की आबादी वाले छोटे से देश ग्रेनेडा के लिए ओलंपिक खेलों में पहला पदक है.

    ग्रेनेडा के प्रधानमंत्री तिलमान थोमस ने कहा, “ये वाकई अद्भुत उपलब्धि है. इसके कारण दरअसल ग्रेनेडा को अंतरराष्ट्रीय समुदाय में उपस्थिति हासिल हुई है जो पहले खेलों के क्षेत्रों में हमें प्राप्त नहीं थी. ”

    19 साल के जेम्स ने 43.94 सेकंड का समय लेकर 400 मीटर की दौड़ पूरी की और सोने का तमगा उनके गले में सजा रहा था.

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