बोल्ट के कमरे का फ़र्नीचर 8500 में

 सोमवार, 13 अगस्त, 2012 को 19:30 IST तक के समाचार
जॉक रोग

आयोजकों ने जिस कंपनी से फ़र्नीचर किराए पर लिया था, वही कंपनी इसकी बिक्री कर रही है. आयोजन समिति से इस बिक्री के लिए सहमति नहीं ली गई है.

अगर आपको वही बीन बैग चाहिए जिस पर ओलंपिक खेलों के दौरान खेल गांव में बैठकर साइना नेहवाल आराम करती थीं तो अब ये मुमकिन है. आपको बस 13 सौ रुपए ख़र्च करने होंगे.

लंदन ओलंपिक के प्रायोजकों को फ़र्नीचर मुहैया करने वाली कंपनी ने खेलों के इस महाकुंभ के ख़ात्मे के बाद इससे जुड़े सामान की ऑनलाइन बिक्री शुरू कर दी है.

तो कुल मिलाकर ये कि अब कोई भी ओलंपिक इतिहास से जुड़ी किसी कुर्सी, सोफ़े, बेड या गद्दे को अपने घर की शोभा बढ़ाने के लिए ख़रीद सकता है.

एथलीटों के बेडरूम के चार सामान आप 99 पाउंड यानि 8,590 रुपए में ख़रीद सकते हैं. इसमें एक सिंगल बेड, एक मैट्रेस, एक छोटी अलमारी और एक नाइट लैंप.

साथ ही लंदन के खेल गांव में रखा गया एक सीट वाला सोफा भी है जिसे आप चाहें तो करीब छह हज़ार रुपए में ख़रीद सकते हैं.

इसके लिए क्लिक करें एक विशेष वेबसाइट भी खोली गई है.

थोड़ा इंतज़ार

"सभी को सामान दोबारा पैक करके और गुणवत्ता की जांच करके ख़रीदारों को भेजा जाएगा."

सामान बेचने वाली कंपनी

लंदन खेलों की आयोजक समिति के लिए फर्नीचर किराए पर देने वाली कंपनी रेमलर के सेल्स विभाग के प्रमुख पॉल लेविन ने समाचार एजेंसी एपी को बताया, “मुझे लगा कि आम लोग लंदन खेलों से जुड़े फ़र्नीचर को ख़रीदना चाहेंगे.”

आप सामान तो ख़रीद सकते हैं लेकिन किसी को भी ये बिल्कुल नहीं बताया जाएगा कि फ़र्नीचर किस खिलाड़ी के कमरे में था. लेविन कहते हैं कि इससे कोई भी ये कल्पना करने के लिए आज़ाद होगा कि उसका सामान यूसैन बोल्ट या माइकल फ़ेल्प्स ने इस्तेमाल किया है.

वेबसाइट पर आप ओलंपिक पार्क के लैंडस्केप में इस्तेमाल किए गए मामूली सामान से लेकर नीली और गुलाबी अंपायर की ऊंची कुर्सी तक को ख़रीद सकते हैं.

सामान के बिक्री के लिए बनाई गई वेबसाइट पर लिखा है कि सारा सामान नया बनाया गया है और इसे औसतन 14 दिनों के लिए इस्तेमाल किया गया है.

स्टिकर पर सबूत

वेबसाइट पर लिखा है, “सभी को सामान दोबारा पैक करके और गुणवत्ता की जांच करके भेजा जाएगा. ”

अगर आप ऑनलाइन ऑर्डर दे भी देते हैं तो आपको डिलिवरी के लिए थोड़ा इंतज़ार करना पड़ेगा क्योंकि डिलिवरी पैरा ओलंपिक के बाद सितंबर के महीने में ही की जाएगी.

खेलों से जुड़े सामान की बिक्री के लिए आयोजन समिति की सहमति नहीं ली गई है.

लेकिन वेबसाइट के अनुसार हर सामान पर एक स्टिकर होगा जिसमें ये लिखा होगा कि इसे ओलंपिक के दौरान कहां और किस वक्त रखा गया था.

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